अमेरिका-चीन के रिश्तों में पिघली बर्फ! वाशिंगटन में ट्रंप और जिनपिंग के बीच बनी सहमति
दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों—अमेरिका और चीन—के बीच लंबे समय से जारी तल्खी, व्यापार युद्ध और भू-राजनीतिक खींचतान के बीच रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक घटनाक्रम सामने आया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तीन दिवसीय आधिकारिक वाशिंगटन यात्रा के समापन पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे संवाद की प्रक्रिया को थामने के बजाय इसे और तेज गति से आगे बढ़ाने के पक्षधर हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वे साल 2026 के अंत से पहले दो और मौकों पर आमने-सामने द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में यह संकेत गया है कि प्रतिद्वंद्विता और गहरे मतभेदों के बावजूद वाशिंगटन और बीजिंग एक-दूसरे के साथ नियमित संवाद बनाए रखकर किसी भी बड़े सैन्य या आर्थिक टकराव को टालने की ठोस रणनीति पर काम कर रहे हैं।
नवंबर में शेनझेन और दिसंबर में मियामी में जमेगी बैठक
तीन दिनों के सघन और हाई-प्रोफाइल दौरे के आखिरी दिन दोनों नेताओं ने आगामी मुलाकातों का खाका दुनिया के सामने रखा। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को नवंबर में चीन के शेनझेन शहर में आयोजित होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान चीन आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। ट्रंप ने इस आमंत्रण को स्वीकार करते हुए कहा कि वे निश्चित रूप से चीन जाएंगे और दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर व्यापक बातचीत होगी।
इसके ठीक एक महीने बाद, यानी दिसंबर 2026 में दोनों नेता एक बार फिर अमेरिका की धरती पर रूबरू होंगे। यह मुलाकात फ्लोरिडा के मियामी स्थित 'ट्रंप नेशनल डोरल' में आयोजित होने वाले बहुप्रतीक्षित जी-20 (G20) शिखर सम्मेलन के दौरान होगी। यदि ये दोनों प्रस्तावित बैठकें तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होती हैं, तो साल 2026 में ट्रंप और जिनपिंग के बीच व्यक्तिगत रूप से होने वाली बैठकों की कुल संख्या चार हो जाएगी, जो पिछले कई दशकों में दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुखों के बीच संवाद का एक नया रिकॉर्ड है।
'मित्रता, ताकत और सफलता': ट्रंप का ट्रुथ सोशल पर बयान
शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के चीन रवाना होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस शिखर वार्ता को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। ट्रंप ने इस बैठक को दोनों देशों के लिए "मित्रता, ताकत और सफलता" की मुलाकात बताया। उन्होंने लिखा, "हम नवंबर में चीन में और फिर दिसंबर में मियामी (फ्लोरिडा) में जी-20 में दोबारा मिलेंगे। बहुत कुछ हासिल किया जा चुका है और आने वाले समय में बहुत कुछ हासिल किया जाएगा।"
दौरे के अंतिम पड़ाव में ट्रंप खुद शी जिनपिंग को अमेरिका के नेशनल आर्काइव्स (राष्ट्रीय अभिलेखागार) लेकर गए, जहां उन्होंने अमेरिकी लोकतंत्र के ऐतिहासिक दस्तावेजों—स्वतंत्रता की घोषणा (Declaration of Independence), संविधान और बिल ऑफ राइट्स—को चीनी राष्ट्रपति को दिखाया। ट्रंप ने इस दौरान दोनों देशों के ऐतिहासिक संदर्भों की तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका अपने 250 साल के गौरवशाली इतिहास पर गर्व करता है, जबकि चीन की सभ्यता 6,000 साल पुरानी है।
मतभेदों के बीच भी नहीं टूटा संवाद का सिरा
हालांकि, रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नियमन, ताइवान के संवेदनशील मुद्दे, दुर्लभ खनिजों (Rare Earths) की आपूर्ति और ईरान संकट जैसे पेचीदा मसलों पर कोई बहुत बड़ा नीतिगत समझौता या निर्णायक सफलता हासिल नहीं हो सकी है। इसके बावजूद, दोनों पक्षों ने टैरिफ और ट्रेड ट्रूस (व्यापार संघर्ष विराम) को आगे बढ़ाने पर सहमति जताकर यह संदेश दिया है कि आर्थिक स्थिरता दोनों ही देशों की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
शी जिनपिंग ने भी व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया था कि चीन और अमेरिका के रिश्ते दो कप्तानों की तरह हैं जो एक विशाल जहाज को सुरक्षित दिशा में आगे ले जा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि साल में लगातार बैठकों का यह दौर यह सुनिश्चित करेगा कि वैश्विक बाजार में अचानक कोई बड़ा भूचाल न आए और दोनों देश एक-दूसरे की रेड लाइन्स का सम्मान करते हुए आगे बढ़ें।