एस जयशंकर ने रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों से की अहम मुलाकात; ब्रिक्स और पश्चिम एशिया पर गहन मंथन

एस जयशंकर ने रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों से की अहम मुलाकात; ब्रिक्स और पश्चिम एशिया पर गहन मंथन

न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें उच्चस्तरीय सत्र के बीच भारत की विदेश नीति और स्वतंत्र कूटनीति का असरदार रूप देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी प्रतिबंधों के नए दबाव और मध्य-पूर्व में जारी उथल-पुथल के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के इतर (UNGA Sidelines) रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ताएं की हैं।

विदेश मंत्री ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची के साथ आमने-सामने बैठकर द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा सुरक्षा, खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात और ब्रिक्स (BRICS) संगठन के ढांचे के तहत आपसी सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा की। अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन दोनों बैठकों को भारत के कूटनीतिक संतुलन और 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) के एक बड़े प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।

सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय संपर्क और यूक्रेन संकट पर बातचीत

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मुलाकात के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए इसे बेहद सकारात्मक बैठक बताया। जयशंकर ने लिखा कि लावरोव के साथ कई समसामयिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार, आगामी उच्चस्तरीय संपर्कों के शेड्यूल और ब्रिक्स संगठन के तहत समन्वय की समीक्षा की।

रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों विदेश मंत्रियों ने भारत-रूस के "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" (Special and Privileged Strategic Partnership) को और अधिक सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। बातचीत में यूक्रेन संकट, मध्य-पूर्व के हालात और संयुक्त राष्ट्र, जी-20 व ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर आपसी तालमेल बनाए रखने पर सहमति जताई गई।

ईरानी समकक्ष से खाड़ी संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा पर विमर्श

रूसी विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद डॉ. एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची से भी मुलाकात की। खाड़ी क्षेत्र, लाल सागर और पश्चिम एशिया में जारी गंभीर तनाव के बीच यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।

जयशंकर ने बैठक के संदर्भ में कहा कि उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री के साथ खाड़ी संघर्ष के ताजा घटनाक्रमों और पश्चिम एशिया के नाजुक हालात पर विस्तार से बात की है और दोनों पक्ष निरंतर संपर्क में बने रहेंगे। गौरतलब है कि हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी शिरकत की थी, जिससे तीनों देशों के बीच कूटनीतिक निरंतरता बनी हुई है।

अमेरिकी प्रतिबंध कानूनों के बीच भारत की स्वतंत्र ऊर्जा नीति

जयशंकर की ये मुलाकातें ऐसे संवेदनशील समय में हुई हैं जब अमेरिकी संसद और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा रूस और ईरान से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून को आगे बढ़ाया गया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के साए के बीच मॉस्को और तेहरान के शीर्ष राजनयिकों के साथ जयशंकर की यह बातचीत इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा और अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता बनाए रखेगा।

जीसीसी और समुद्री सुरक्षा पर भी भारत ने रखी बात

न्यूयॉर्क में अपने व्यस्त कार्यक्रमों के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ट्रोइका मंत्रिस्तरीय बैठक की भी सह-अध्यक्षता की, जहां भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं की शुरुआत का स्वागत किया गया।

इसके साथ ही, ग्रीस के विदेश मंत्री के साथ संयुक्त रूप से समुद्री सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आयोजित सत्र में बोलते हुए जयशंकर ने स्पष्ट किया कि समुद्री मार्गों में अंतरराष्ट्रीय कानूनों और जहाजरानी की सुरक्षा सर्वोपरि है। कुल मिलाकर, संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर जयशंकर की इस सक्रियता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत गुटनिरपेक्षता और राष्ट्रीय हितों के आधार पर दुनिया के सभी खेमों के साथ स्वतंत्र संवाद कायम रखने में पूरी तरह सक्षम है।