नानी की 'द पैराडाइस' की रेटिंग और रिव्यूज बुकमायशो से क्यों हटे? कमाई में गिरावट के बीच मेकर्स ने लिया बड़ा फैसला

नानी की 'द पैराडाइस' की रेटिंग और रिव्यूज बुकमायशो से क्यों हटे? कमाई में गिरावट के बीच मेकर्स ने लिया बड़ा फैसला

तेलुगु सिनेमा के नेचुरल स्टार नानी और निर्देशक श्रीकांत ओडेला की बहुचर्चित एक्शन ड्रामा फिल्म 'द पैराडाइस' (The Paradise) इन दिनों बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ इंटरनेट के गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। 1980 के दशक की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म ने सिनेमाघरों में धमाकेदार ओपनिंग के साथ शुरुआत की थी और नानी के करियर की सबसे बड़ी ओपनर साबित हुई। लेकिन रिलीज के अगले ही दिन फिल्म के कलेक्शन में आई भारी गिरावट और समीक्षकों से मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया के बीच एक हैरान कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया। देश के सबसे बड़े ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म 'बुकमायशो' (BookMyShow) से फिल्म के यूजर रेटिंग्स और रिव्यूज सेक्शन को पूरी तरह से डिसेबल यानी बंद कर दिया गया है। अब फिल्म के पेज पर दर्शकों को स्टार रेटिंग या लिखित समीक्षाएं दिखाई देने के बजाय सीधे 'Rating & Review Disabled' लिखा नजर आ रहा है। इस फैसले के पीछे की असल वजहों को लेकर अब इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच बहस छिड़ गई है।

'रिव्यू बॉम्बिंग' और फर्जी बॉट्स पर लगाम लगाने का दावा

मेकर्स और प्रोडक्शन टीम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण सुनियोजित 'रिव्यू बॉम्बिंग' (Review Bombing) और फर्जी बॉट खातों के जरिए फैलाए जा रहे नकारात्मक माहौल को रोकना है। फिल्म उद्योग में पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा है कि किसी बड़े बजट की फिल्म के रिलीज होते ही प्रतिद्वंद्वी गुट या शरारती तत्व सोशल मीडिया और टिकट बुकिंग ऐप्स पर एक साथ 1-स्टार या निगेटिव रिव्यूज की बाढ़ ला देते हैं।

निर्माताओं का कहना है कि जब कोई दर्शक टिकट बुक करने जाता है, तो वह प्लेटफॉर्म की रेटिंग देखकर फैसला लेता है। ऐसे में कृत्रिम बॉट्स द्वारा गिराई गई रेटिंग सीधे तौर पर फिल्म की एडवांस बुकिंग और कलेक्शन को प्रभावित करती है। मेकर्स का तर्क है कि उन्होंने फिल्म के निर्माण, तकनीकी पहलुओं, वीएफएक्स, मार्केटिंग और वितरण पर भारी-भरकम पूंजी निवेश की है। ऐसे में अनर्गल और गैर-प्रामाणिक समीक्षाओं के चलते फिल्म को होने वाले अपूरणीय आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए तकनीकी तौर पर इस विकल्प को बंद करने का आग्रह किया गया।

नानी का बयान: 'असली दर्शकों की राय से हमें कोई परहेज नहीं'

इस पूरे विवाद और फैसले पर फिल्म के मुख्य अभिनेता नानी ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। नानी ने साफ शब्दों में कहा कि यह कदम आम दर्शकों या निष्पक्ष फिल्म समीक्षकों की वास्तविक राय (Genuine Reviews) को दबाने के लिए नहीं उठाया गया है। नानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि वे दर्शकों के प्यार के साथ-साथ आलोचकों द्वारा बताई गई कमियों को भी पूरी विनम्रता से स्वीकार करते हैं और ट्रोलर्स के मजेदार मीम्स का भी आनंद ले रहे हैं।

नानी ने मुंबई में फिल्म प्रमोशन के दौरान भी स्पष्ट किया था कि मेकर्स की आपत्ति केवल उस दुर्भावनापूर्ण और प्रायोजित कंटेंट को लेकर है, जो रिलीज से पहले ही एजेंडे के तहत प्रचारित किया जाने लगता है। उन्होंने कहा कि असली जनता सिनेमाघरों में जाकर जो फैसला सुनाएगी, वह हर कलाकार के लिए हमेशा सिर-माथे रहेगा।

कोर्ट से मानहानिकारक कंटेंट पर पहले ही मिल चुका था अंतरिम आदेश

गौरतलब है कि 'द पैराडाइस' की रिलीज से कुछ दिन पहले ही बेंगलुरु की एक अदालत ने फिल्म के निर्माताओं (श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर सिनेमाज और आईवीवाई एंटरटेनमेंट) की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक अंतरिम निषेधाज्ञा (Injunction) जारी की थी। इस आदेश में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल मंचों पर फिल्म के खिलाफ मानहानिकारक और दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार फैलाने वाले यूआरएल और पोस्ट्स पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म का टीजर आने के बाद से ही कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स जानबूझकर व्यावसायिक मूल्य को घटाने की नीयत से फर्जी बातें फैला रहे थे।

पहले भी कई बड़ी फिल्मों में उठाया जा चुका है ऐसा कदम

बुकमायशो जैसे प्लेटफॉर्म पर रेटिंग और रिव्यूज का फीचर बंद करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले सुपरस्टार यश की फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स', पवन कल्याण की 'उस्ताद भगत सिंह', चिरंजीवी की 'मन शंकरा वर प्रसाद गारू' और शाहिद कपूर की 'ओ रोमियो' के समय भी टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर इसी तरह रेटिंग्स को डिसेबल किया गया था।

हालांकि, डिजिटल युग में इस प्रवृत्ति को लेकर दो तरह के मत सामने आ रहे हैं। एक तबके का मानना है कि करोड़ों के निवेश वाली फिल्मों को पेड ट्रोल्स और बॉट हमलों से सुरक्षा मिलनी जरूरी है। वहीं, आम दर्शकों और कंज्यूमर राइट्स पैरोकारों का कहना है कि टिकट खरीदने से पहले जनसाधारण का सच्चा फीडबैक जानना हर दर्शक का अधिकार है। बहरहाल, रेटिंग हटने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि नानी की 'द पैराडाइस' अपने पहले शनिवार और रविवार के वीकेंड पर बॉक्स ऑफिस पर कितना दम दिखा पाती है।