8th Pay Commission: 5 साल पर नया चयन वेतन और फैमिली यूनिट 5 करने की जोरदार मांग

8th Pay Commission: 5 साल पर नया चयन वेतन और फैमिली यूनिट 5 करने की जोरदार मांग

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पदोन्नति और पेंशन सुधारों को लेकर आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के तहत बैठकों और प्रस्तावों का दौर तेज हो चुका है। पिछले दिनों दिल्ली और जयपुर में कर्मचारी यूनियनों के साथ हुए संवाद के बाद अब सबकी निगाहें 16, 17 और 18 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में होने वाली आयोग की उच्चस्तरीय बैठक पर टिक गई हैं।

इस बैठक से पहले कर्मचारी परिसंघों (Staff Side of NC-JCM और AINPSEF) ने वेतन आयोग के समक्ष दो बेहद अहम और क्रांतिकारी प्रस्ताव रखे हैं। पहला—पदोन्नति के अभाव में वित्तीय गतिरोध तोड़ने के लिए हर 5 साल पर संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (MACP / नया चयन वेतन) का लाभ दिया जाए। दूसरा—न्यूनतम वेतन की गणना में दशकों पुराने 3 'फैमिली यूनिट' फॉर्मूले को बदलकर '5 फैमिली यूनिट' किया जाए। यदि आयोग इन मांगों पर मुहर लगाता है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में 66 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखने को मिल सकता है।

10, 20 और 30 साल का इंतजार खत्म हो: हर 5 साल पर मिले नया चयन वेतन (MACP)

वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) स्कीम के तहत 10, 20 और 30 साल की नियमित सेवा पूरी करने पर अगला वित्तीय अपग्रेडेशन (चयन वेतनमान) दिया जाता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कई विभागों में कैडर पुनर्गठन न होने के कारण कर्मचारियों को एक ही पद पर 10 से 15 साल तक बिना किसी पदोन्नति के काम करना पड़ता है।

  • 5 साल का फॉर्मूला: यूनियनों ने मांग की है कि 10-10 वर्षों का लंबा अंतराल कर्मचारियों में निराशा पैदा करता है। इसलिए इसे घटाकर हर 5 वर्ष की संतोषजनक सेवा पर नया चयन वेतन (अपग्रेडेड ग्रेड पे/लेवल) लागू किया जाए।

  • सीधा असर: इससे निचले और मध्यम वर्ग के कर्मचारियों को समयबद्ध वित्तीय लाभ मिलेगा, जिससे पदोन्नति के सीमित अवसरों के बावजूद उनके वेतन में ठहराव (Stagnation) की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

फैमिली यूनिट 3 से 5 करने की मांग: आश्रित माता-पिता को भी मिले अधिकार

वेतन आयोग के इतिहास में पहली बार न्यूनतम मूल वेतन तय करने के बुनियादी आधार यानी 'एकरायड फॉर्मूले' (Aykroyd Formula) में बड़े संरचनात्मक बदलाव का मसौदा पेश किया गया है:

  • मौजूदा 3 यूनिट फॉर्मूला: वर्तमान में वेतन आयोग 3 सदस्यों की फैमिली यूनिट मानकर न्यूनतम वेतन तय करता रहा है। इसमें स्वयं कर्मचारी (1 यूनिट), पति/पत्नी (1 यूनिट) और दो बच्चे (0.5 + 0.5 = 1 यूनिट) शामिल होते हैं। इसमें बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के खर्च को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया था।

  • प्रस्तावित 5 यूनिट फॉर्मूला: कर्मचारी संगठनों (NC-JCM) ने दलील दी है कि 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम' तथा 'सोशल सिक्योरिटी कोड 2020' के तहत माता-पिता की देखभाल कर्मचारी का कानूनी और नैतिक दायित्व है। नए प्रस्ताव में कर्मचारी (1 यूनिट), जीवनसाथी (1 यूनिट), दो बच्चे (0.8 + 0.8 यूनिट) और आश्रित माता-पिता (0.8 + 0.8 यूनिट) को जोड़कर कुल 5.2 यूनिट (राउंड ऑफ में 5 यूनिट) का पैमाना तय करने की मांग की गई है।

66% तक बढ़ सकता है बेसिक पे: समझिए ₹39,000 बनाम ₹65,000 का गणित

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) के मानदंडों के अनुसार, एक वयस्क इकाई (1 Unit) के लिए भोजन, वस्त्र, आवास, बच्चों की उच्च शिक्षा और चिकित्सा का न्यूनतम मासिक खर्च लगभग ₹13,000 आंका गया है:

  • पुराने 3-यूनिट मॉडल पर न्यूनतम बेसिक पे: 3 × ₹13,000 = ₹39,000 प्रति माह।

  • नए 5-यूनिट मॉडल पर अनुमानित न्यूनतम बेसिक पे: 5 × ₹13,000 = ₹65,000 प्रति माह।

  • यदि इसमें तकनीकी खर्च, कौशल विकास और विवाह/सामाजिक दायित्वों के सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को पूरी तरह जोड़ दिया जाए, तो कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन को ₹69,000 प्रति माह तक निर्धारित करने और इसके आधार पर 3.83 का फिटमेंट फैक्टर देने का प्रस्ताव रखा है।

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भी संशोधन की दरकार

कर्मचारियों का यह भी तर्क है कि देश के महानगरों और प्रमुख शहरों में जीवनयापन की लागत बेतहाशा बढ़ चुकी है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चंडीगढ़ जैसे शहरों में वर्तमान HRA दरें (X श्रेणी के लिए 30%, Y के लिए 20% और Z के लिए 10%) व्यावहारिक रूप से पर्याप्त नहीं हैं। यूनियनों ने मांग की है कि मकान किराए के वास्तविक बाजार भाव को ध्यान में रखते हुए एचआरए स्लैब में भी बढ़ोतरी की जाए ताकि कर्मचारियों को अपनी जेब से मकान का किराया न भरना पड़े।

16-18 सितंबर को चंडीगढ़ बैठक: उत्तर भारत के कर्मचारी संगठनों की निगाहें

वेतन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के तहत आयोग की टीम 16 से 18 सितंबर 2026 तक चंडीगढ़ के दौरे पर रहेगी। इस तीन दिवसीय बैठक में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के विभिन्न कर्मचारी महासंघों और रेलवे, डाक, रक्षा व असैन्य विभागों के प्रतिनिधि आयोग के सामने अपना पक्ष रखेंगे।

जयपुर बैठक के बाद चंडीगढ़ सम्मेलन को इस लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है क्योंकि यहां उत्तरी क्षेत्र के कर्मचारी परिसंघ 5 साल के चयन वेतन और 5 फैमिली यूनिट के फॉर्मूले पर विस्तृत वित्तीय डेटा और प्रजेंटेशन पेश करने वाले हैं। यदि आयोग इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाता है, तो यह 8वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे में आजादी के बाद का सबसे बड़ा ऐतिहासिक सुधार साबित होगा।