5 राज्यों से गुजरेगा ₹90000 करोड़ का मेगा हाईवे, 12 घंटे में पहुंचेंगे दिल्ली से मुंबई
भारत में वर्ल्ड क्लास सड़क बुनियादी ढांचे के विकास के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ चुका है। देश की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली को आर्थिक राजधानी मुंबई और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) से जोड़ने वाला ऐतिहासिक 'दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे' (Delhi-Mumbai Expressway) देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो रहा है। करीब ₹90,000 करोड़ की अनुमानित लागत से निर्मित हो रहा यह महा-राजमार्ग न केवल उत्तर भारत और पश्चिमी भारत के बीच माल ढुलाई और व्यापारिक परिवहन की सूरत बदल देगा, बल्कि दोनों महानगरों के बीच यात्रा के समय को लगभग आधा कर देगा। वर्तमान में जहां सड़क मार्ग से दिल्ली से मुंबई जाने में 20 से 24 घंटे का लंबा समय खप जाता है, वहीं इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे के पूर्ण संचालन के बाद यह फासला सिमटकर महज 12 से 13 घंटे का रह जाएगा। आधुनिक इंजीनियरिंग, अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों और ग्रीनफील्ड डिजाइन के दम पर यह एक्सप्रेसवे भारत के हाई-स्पीड कनेक्टिविटी नेटवर्क की रीढ़ बनने की दिशा में अग्रसर है।
हरियाणा से महाराष्ट्र तक 5 राज्यों को जोड़ेगा एक्सप्रेसवे: सोहना से लेकर जेएनपीटी तक कनेक्टिविटी का नया जाल
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का मुख्य रूट देश के पांच प्रमुख और आर्थिक रूप से समृद्ध राज्यों—हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरता है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न उपग्रह शहरों और औद्योगिक टाउनशिप को सीधे इस गलियारे से जोड़ने के लिए कई हाई-स्पीड लिंक रोड भी तेजी से विकसित किए जा रहे हैं। एक्सप्रेसवे के रणनीतिक अलाइनमेंट में सोहना, दौसा, कोटा, रतलाम, वडोदरा और सूरत जैसे बड़े औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन केंद्र शामिल हैं। इस मार्ग का अंतिम छोर महाराष्ट्र के प्रमुख बंदरगाह जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से जोड़ा जा रहा है, जिससे उत्तर भारत की विनिर्माण इकाइयों और औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे समुद्री बंदरगाह तक हाई-स्पीड कार्गो कॉरिडोर की सुविधा मिलेगी। इस निर्बाध सड़क संपर्क से लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी और भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बड़ी बढ़त हासिल होगी।
1386 किमी लंबा 8 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे: भविष्य में 12 लेन तक विस्तार की बेमिसाल इंजीनियरिंग
परियोजना के विस्तृत विवरणों के अनुसार, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 1,350 से 1,386 किलोमीटर के बीच आंकी गई है। यह एक पूर्ण ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसका तात्पर्य यह है कि इसे किसी पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करके नहीं बल्कि पूरी तरह नई जमीन अधिग्रहित करके आधुनिक ज्यामितीय मानकों पर समतल और सुव्यवस्थित बनाया जा रहा है। मूल डिजाइन के तहत इसे 8 लेन का एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे तैयार किया गया है, जिसके बीच में चौड़ा मीडियन छोड़ा गया है ताकि भविष्य में ट्रैफिक दबाव बढ़ने पर इसे बिना किसी रुकावट के 12 लेन तक आसानी से अपग्रेड किया जा सके। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, एक्सप्रेसवे की डिजाइन स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इस पर प्रवेश और निकास के लिए पूरी तरह ऑटोमेटेड इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे स्थानीय ट्रैफिक या चौराहों के जाम से यात्रियों को पूर्ण मुक्ति मिलेगी।
24 घंटे का थकाऊ सफर अब 12 घंटे में पूरा: समय और ईंधन दोनों की होगी भारी बचत
सड़क मार्ग से राष्ट्रीय राजधानी और वित्तीय राजधानी के बीच सफर करने वाले यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा। अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग 48 (पुराना NH-8) पर अत्यधिक ट्रैफिक दबाव, शहरों के बाईपास और लगातार आने वाले टोल प्लाजा के कारण निजी वाहनों को 20 से 24 घंटे और भारी ट्रकों को 35 से 40 घंटे का समय लग जाता था। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार 120 किमी/घंटा की गति से फर्राटा भरते हुए निजी कार चालक इस दूरी को मात्र 12 से 13 घंटे में तय कर सकेंगे। यात्रा समय में 50 प्रतिशत तक की कटौती होने से न केवल करोड़ों लीटर महंगे ईंधन की बचत होगी, बल्कि वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी भारी गिरावट आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान मिलेगा।
₹90,000 करोड़ का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट: नए आर्थिक गलियारों और स्मार्ट शहरों को मिलेगी संजीवनी
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे इस एक्सप्रेसवे की कुल निर्माण लागत करीब 90,000 करोड़ रुपये तय की गई है। इस विशाल बजट में आधुनिक पुल, सुरंगें, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष अंडरपास और ओवरपास (एनिमल ओवरपास), ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क और हाईवे किनारे विकसित किए जा रहे वे-साइड एमिनिटीज (Way-side Amenities) केंद्र शामिल हैं। पूरे एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर नए लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग हब, फूड प्रोसेसिंग जोन और नए टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के वे पिछड़े और आंतरिक इलाके जो अब तक मुख्य विकास की धारा से कटे हुए थे, इस महा-एक्सप्रेसवे के बनने से देश के शीर्ष औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों से सीधे जुड़ रहे हैं, जिससे लाखों स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।