पॉजिटिव शुरुआत के बाद औंधे मुंह गिरा लीप इंडिया का शेयर, फायदे पर लिस्टिंग के बाद 12% टूटकर IPO प्राइस से भी नीचे फिसला भाव; जानिए ₹2480 करोड़ के इश्यू में दांव लगाने वाले निवेशकों को क्या हुआ नुकसान

पॉजिटिव शुरुआत के बाद औंधे मुंह गिरा लीप इंडिया का शेयर, फायदे पर लिस्टिंग के बाद 12% टूटकर IPO प्राइस से भी नीचे फिसला भाव; जानिए ₹2480 करोड़ के इश्यू में दांव लगाने वाले निवेशकों को क्या हुआ नुकसान

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार (14 अगस्त) के कारोबारी सत्र के दौरान प्राथमिक बाजार (Primary Market) से लिस्ट हुई सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस प्रदाता कंपनी लीप इंडिया लिमिटेड (Leap India Ltd) के शेयरों में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन कंपनी के शेयरों ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सकारात्मक प्रीमियम के साथ एक अच्छी शुरुआत की थी। हालांकि, लिस्टिंग के कुछ ही मिनटों बाद बाजार में मुनाफावसूली और भारी बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि शेयर औंधे मुंह गिर पड़ा। लिस्टिंग के दिन ही कंपनी का स्टॉक अपने इश्यू प्राइस (IPO Price) से भी काफी नीचे फिसल गया, जिससे लिस्टिंग गेन की उम्मीद लगाए बैठे खुदरा और संस्थागत निवेशकों को बड़ा झटका लगा है।

4% प्रीमियम पर खुला भाव, फिर 12% से अधिक टूटकर ₹145 पर आया स्टॉक

शुक्रवार सुबह जब शेयर बाजार में घंटी बजी, तो लीप इंडिया लिमिटेड के शेयरों की शुरुआत संतोषजनक रही। कंपनी ने अपने 2,480 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए 159 रुपये प्रति शेयर का इश्यू प्राइस तय किया था।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी का शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले 4.40 प्रतिशत के फायदे के साथ 166 रुपये के भाव पर लिस्ट हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर भी शेयर ने 165.90 रुपये के स्तर पर शुरुआत की।

शुरुआती चंद मिनटों के जश्न के बाद अचानक बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स की ओर से बिकवाली शुरू हो गई। बिकवाली का दायरा इतना गहरा गया कि शेयर ने लिस्टिंग के ऊपरी स्तरों से 12 प्रतिशत से अधिक का गोता लगा दिया। देखते ही देखते बीएसई पर शेयर लुढ़ककर 145.05 रुपये के इंट्रा-डे लो स्तर पर आ गया, जबकि एनएसई पर इसने 145 रुपये का निचला स्तर छू लिया। दिन के निचले स्तर पर यह शेयर अपने तय आईपीओ प्राइस (159 रुपये) से लगभग 8.80 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहा था।

8.82 गुना हुआ था सब्सक्राइब: संस्थागत खरीदारों का था जबर्दस्त भरोसा

लीप इंडिया का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 7 अगस्त को खुला था और 11 अगस्त तक निवेशकों के लिए खुला रहा। इस सार्वजनिक निर्गम को घरेलू और विदेशी निवेशकों की ओर से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी और यह कुल मिलाकर 8.82 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

संस्थागत और गैर-संस्थागत निवेशकों ने इश्यू में खासी दिलचस्पी दिखाई थी:

  • क्वॉलीफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB): संस्थागत खरीदारों का कोटा सबसे ज्यादा 17.73 गुना भरा था।

  • नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII/HNI): गैर-संस्थागत निवेशकों की कैटेगरी में 13.31 गुना बोलियां प्राप्त हुई थीं।

  • कर्मचारी कोटा (Employees): कंपनी के कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से को 11.57 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।

  • रिटेल इनवेस्टर्स (Retail Category): आम खुदरा निवेशकों का कोटा 1.81 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

भारी सब्सक्रिप्शन के बावजूद लिस्टिंग के दिन शेयरों में आई इस गिरावट ने यह साबित किया है कि मौजूदा बाजार परिदृश्य में केवल सब्सक्रिप्शन के आंकड़े लिस्टिंग के बाद की मजबूती की गारंटी नहीं होते।

क्या करती है लीप इंडिया लिमिटेड? ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म KKR का है निवेश

साल 2013 में स्थापित लीप इंडिया लिमिटेड भारत में सस्टेनेबल सप्लाई चेन, रिटर्नएबल पैकेजिंग और एसेट-पूलिंग सॉल्यूशंस (Asset Pooling Solutions) के क्षेत्र में एक अग्रणी कंपनी है। कंपनी मुख्य रूप से लकड़ी के पैलेट्स (Wooden Pallets), प्लास्टिक कंटेनर्स, फोल्डेबल लार्ज कंटेनर्स और मैटेरियल हैंडलिंग इक्विपमेंट्स (MHE) के प्रबंधन और पूलिंग का काम करती है।

कंपनी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG), ई-कॉमर्स, ऑटोमोटिव, बेवरेजेज और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसी दिग्गज इंडस्ट्रीज को इन्वेंटरी मैनेजमेंट, ट्रांसपोर्टेशन, रिपेयर और मेंटेनेंस की सेवाएं मुहैया कराती है।

इस कंपनी की एक बड़ी ताकत इसका मजबूत प्रमोटर बैकग्राउंड और वैश्विक निवेशकों का जुड़ाव है। दुनिया की प्रमुख प्राइवेट इक्विटी फर्म केकेआर (KKR) ने साल 2023 में लीप इंडिया में नियंत्रण हिस्सेदारी (Controlling Stake) का अधिग्रहण किया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के पास 400 से अधिक स्थायी कर्मचारी और 2,000 से अधिक मैटेरियल हैंडलिंग ऑपरेटर्स का बड़ा नेटवर्क है।

आईपीओ आने से पहले कंपनी में प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी 90.04 प्रतिशत थी, जो कि आईपीओ के बाद घटकर 55.64 प्रतिशत रह गई है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आईपीओ से जुटाई गई शुद्ध धनराशि का इस्तेमाल अपने पुराने कर्जों के पुनर्भुगतान (Debt Repayment) और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाएगा।

लिस्टिंग के बाद क्यों फिसला शेयर? बाजार विश्लेषकों ने बताई 3 बड़ी वजहें

शेयर बाजार के जानकारों और ब्रोकरेज एनालिस्ट्स के अनुसार, लीप इंडिया के शेयरों में लिस्टिंग के बाद आई इस तेज गिरावट के पीछे कई तकनीकी और फंडामेंटल कारक जिम्मेदार हैं:

  • वैश्विक और घरेलू बाजार में सुस्ती: व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में पिछले कुछ दिनों से मुनाफावसूली का दौर चल रहा है, जिसका असर नए लिस्ट होने वाले शेयरों के सेंटिमेंट पर सीधा पड़ा।

  • शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स की आक्रामक मुनाफावसूली: रिटेल और एनआईआई श्रेणी के जिन निवेशकों ने केवल 4-5% के त्वरित लिस्टिंग गेन के लिए आवेदन किया था, उन्होंने स्टॉक खुलते ही बिकवाली शुरू कर दी, जिससे निचले स्तरों पर बिकवाली का दबाव गहरा गया।

  • वैल्यूएशन को लेकर सतर्कता: लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मार्जिन के दबाव को देखते हुए संस्थागत निवेशकों ने लंबी अवधि के लिए नए सिरे से पोजीशन बनाने से पहले शेयर के सही मूल्य पर स्थिर होने का इंतजार करना बेहतर समझा।

क्या करें निवेशक? लंबी अवधि का नजरिया या स्टॉपलॉस का सहारा

शेयर के इश्यू प्राइस से नीचे आने के बाद अब उन निवेशकों के सामने असमंजस की स्थिति है जिन्हें आईपीओ में शेयर अलॉट हुए थे।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिन निवेशकों का नजरिया केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग या लिस्टिंग गेन का था, उन्हें सख्त जोखिम प्रबंधन नियमों का पालन करना चाहिए। वहीं, जो निवेशक लंबी अवधि के लिए कंपनी के बिजनेस मॉडल पर भरोसा रखते हैं, उनके लिए केकेआर जैसी मजबूत प्रमोटर बैकिंग और भारत के संगठित वेयरहाउसिंग व लॉजिस्टिक्स सेक्टर की तेज ग्रोथ एक सकारात्मक पहलू हो सकती है।

तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि जब तक शेयर 155 से 160 रुपये के अपने आईपीओ प्राइस बैंड को दोबारा पार करके ऊपर टिक नहीं जाता, तब तक इसमें सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।