बर्कशायर हैथवे छोड़ने से पहले वॉरेन बफे ने दिए शेयर बाजार में दौलत बनाने के 5 गोल्डन नियम, कभी नहीं डूबेगा पैसा

बर्कशायर हैथवे छोड़ने से पहले वॉरेन बफे ने दिए शेयर बाजार में दौलत बनाने के 5 गोल्डन नियम, कभी नहीं डूबेगा पैसा

वैश्विक शेयर बाजार और वेल्थ क्रिएशन की दुनिया में एक ऐतिहासिक युग का समापन होने जा रहा है। दुनिया के सबसे दिग्गज और सम्मानित वैल्यू इन्वेस्टर वॉरेन बफे ने पांच दशकों से भी अधिक समय तक बर्कशायर हैथवे का नेतृत्व करने के बाद चेयरमैन का पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है। 96 वर्ष की आयु में सक्रिय रहने वाले ओमाहा के इस ओरेकल की कुल संपत्ति फोर्ब्स के आंकड़ों के अनुसार 144.6 बिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 13.89 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि वे चेयरमैन पद से हट रहे हैं, लेकिन कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बने रहेंगे। वहीं उनके बेटे हॉवर्ड बफे अब इस विशाल वित्तीय साम्राज्य के नए गैर-कार्यकारी चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।

वॉरेन बफे ने अपने सहयोगी चार्ली मंगर के साथ मिलकर एक साधारण टेक्सटाइल मिल को दुनिया के सबसे बड़े समूह में बदल दिया। उन्होंने सिद्ध किया कि बिना सट्टेबाजी और बिना अनावश्यक जोखिम उठाए केवल अनुशासित सोच और धैर्य के दम पर दुनिया का सबसे अमीर इंसान बना जा सकता है। पद से विदा लेते हुए बफे ने आम निवेशकों के लिए अपने जीवन भर के वित्तीय अनुभवों का निचोड़ 5 व्यावहारिक सूत्रों के रूप में साझा किया है, जिन्हें अपनाकर कोई भी निवेशक मंदी और बाजार के क्रैश से सुरक्षित रहकर मजबूत पोर्टफोलियो बना सकता है।

नियम 1 और 2: डर और लालच के चक्रव्यूह से बचें, सही मूल्यांकन पर ही खरीदें मजबूत बिजनेस

शेयर बाजार में अधिकांश खुदरा निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई केवल इसलिए गंवा बैठते हैं क्योंकि वे भीड़ की भावनाओं का शिकार हो जाते हैं। बफे का पहला और सबसे प्रसिद्ध नियम कहता है कि "जब दूसरे लोग लालची हो रहे हों तब डरें, और जब पूरी दुनिया डर के मारे शेयर बेच रही हो तब आप लालची बनें।" बुल मार्केट के चरम पर जब हर कोई स्टॉक खरीदने की होड़ में होता है, तब समझदार निवेशक को सतर्क रहना चाहिए। वहीं जब बाजार में मंदी या पैनिक सेलिंग का दौर हो, तब बेहतरीन कंपनियों के शेयर कौड़ियों के भाव मिलते हैं और यही खरीदारी का सबसे सुनहरा अवसर होता है।

इसके साथ जुड़ा दूसरा सूत्र है मजबूत बुनियादी ढांचे वाले बिजनेस को उचित मूल्य पर खरीदना। बफे की वैल्यू इन्वेस्टिंग फिलॉसफी यह सिखाती है कि केवल कंपनी का अच्छा होना काफी नहीं है, बल्कि उसके शेयर का सही वैल्यूएशन पर मिलना अनिवार्य है। जब किसी मजबूत कंपिटीटिव एडवांटेज (मजबूत मोट) वाली कंपनी का शेयर किसी अस्थायी संकट की वजह से सस्ता मिल रहा हो, तभी उसमें पूंजी लगानी चाहिए। अधिक मूल्य चुकाकर खरीदा गया बेहतरीन शेयर भी भविष्य में नुकसान का कारण बन सकता है।

नियम 3 और 4: कंपाउंडिंग के लिए धैर्य रखें और अपने सर्कल ऑफ इन्फ्लुएंस का रखें खास ख्याल

वॉरेन बफे और दिवंगत चार्ली मंगर की निवेश यात्रा की सबसे बड़ी ताकत धैर्य रही है। उनका मानना है कि दौलत धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से बनती है, रातों-रात अमीर बनने की चाहत केवल नुकसान की ओर ले जाती है। बफे का कहना है कि किसी अच्छे शेयर को खरीदने के बाद उस पर रोजाना के उतार-चढ़ाव को देखने के बजाय सालों तक शांति से बैठना आना चाहिए। वित्तीय विशेषज्ञ और रिटायर्ड प्रोफेसर टॉड फिंकल का भी यही मानना है कि बफे की सीखें केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे व्यक्तिगत जीवन में भी वित्तीय स्थिरता और मानसिक संतुलन प्रदान करती हैं।

चौथा सबसे महत्वपूर्ण सबक यह है कि आपके फैसलों को कौन प्रभावित कर रहा है। बफे बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी व्यक्ति की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह किन लोगों के साथ समय बिताता है। यदि आप ऐसे लोगों के संपर्क में हैं जो बाजार में केवल टिप्स, अफवाहों और क्विक-रिच स्कीमों पर चर्चा करते हैं, तो आपके वित्तीय फैसले भी गलत दिशा में चले जाएंगे। अपने आसपास ऐसे लोगों का दायरा बनाएं जो आपसे बेहतर हों, दीर्घकालिक सोच रखते हों और वित्तीय अनुशासन का सम्मान करते हों।

नियम 5: पूंजी सुरक्षा सबसे बड़ा धर्म, ज्वार उतरने पर ही खुलती है ज्यादा जोखिम लेने वालों की पोल

वॉरेन बफे के निवेश दर्शन का अंतिम और सबसे बुनियादी नियम सीधे तौर पर पूंजी की रक्षा से जुड़ा हुआ है। वे हमेशा याद दिलाते हैं कि "नियम नंबर 1: कभी अपने पैसे न गंवाएं। और नियम नंबर 2: नियम नंबर 1 को कभी न भूलें।" इसका अभिप्राय यह है कि किसी भी निवेश में संभावित लाभ से पहले स्थायी पूंजी हानि (Permanent Loss of Capital) के जोखिम का सटीक आकलन करना चाहिए। बाजार में गलत दांव लगाने से जो पूंजी एक बार पूरी तरह नष्ट हो जाती है, उसकी भरपाई करना गणितीय रूप से बेहद कठिन होता है। बफे का एक और बेहद लोकप्रिय रूपक बाजार की सच्चाई को बयान करता है कि "जब समुद्र का ज्वार-भाटा उतरता है, तभी पता चलता है कि कौन बिना कपड़ों के तैर रहा था।" जब तक बाजार में लिक्विडिटी और तेजी रहती है, तब तक भारी कर्ज और अत्यधिक रिस्क लेकर ट्रेड करने वाले लोग भी मुनाफा कमाते दिखते हैं। लेकिन जैसे ही आर्थिक मंदी आती है और बाजार का ज्वार नीचे गिरता है, तब वही निवेशक बचते हैं जिन्होंने कम रिस्क लिया था और जिनके पास पर्याप्त कैश रिजर्व था। बफे के ये पांचों सूत्र किसी भी निवेशक को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने का सबसे सुरक्षित रोडमैप हैं।