PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर! 21 लाख से ज्यादा EPF अकाउंट हुए ठप, संसद में सरकार ने दी चौंकाने वाली जानकारी; निष्क्रिय खातों में फंसे हैं ₹8500 करोड़ से अधिक, जानिए आपका पैसा तो नहीं अटका
नौकरीपेशा कर्मचारियों की जीवनभर की सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट की सबसे बड़ी पूंजी कहे जाने वाले 'कर्मचारी भविष्य निधि संगठन' (EPFO) से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक आंकड़ा संसद के पटल पर सामने आया है। देश में 21 लाख से भी अधिक ईपीएफ (EPF) खाते पूरी तरह ठप यानी निष्क्रिय (Inoperative/Dormant) हो चुके हैं। इन खातों में आम कर्मचारियों के खून-पसीने की कमाई के 8,505 करोड़ रुपये से अधिक की भारी धनराशि बिना किसी दावे (Unclaimed Balance) के जमा पड़ी है। संसद के उच्च सदन राज्यसभा में सरकार द्वारा पेश की गई इस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि पिछले चार वर्षों में निष्क्रिय खातों की संख्या में लगभग 84 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यदि आपने भी कभी नौकरी बदली है और पुराने पीएफ का पैसा नए खाते में ट्रांसफर नहीं कराया है, तो हो सकता है कि आपका पैसा भी इन निष्क्रिय खातों की सूची में फंस गया हो।
संसद में सरकार का खुलासा: 4 साल में 84% बढ़े निष्क्रिय पीएफ खाते, फंसा ₹8505 करोड़
राज्यसभा में सांसद नीरज डांगी द्वारा पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से लेकर 2023-24 तक के विस्तृत आंकड़े सदन के समक्ष प्रस्तुत किए।
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में जहां देश भर में निष्क्रिय ईपीएफ खातों की संख्या 11,72,923 (करीब 11.72 लाख) थी, वहीं 2023-24 के अंत तक यह संख्या 83.76 प्रतिशत (करीब 84%) बढ़कर 21,55,387 (21.55 लाख) के पार पहुंच गई।
इसके साथ ही इन खातों में लावारिस पड़े अनसेटल्ड फंड में 116 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है। वर्ष 2020-21 में इन बंद खातों में 3,930.85 करोड़ रुपये जमा थे, जो 2023-24 में बढ़कर 8,505.23 करोड़ रुपये हो गए।
आंकड़ों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया कि प्रत्येक निष्क्रिय खाते में औसतन करीब ₹39,460 (लगभग 40 हजार रुपये) की राशि फंसी हुई है, जो चार साल पहले औसतन ₹33,513 थी।
4 सालों में इनऑपरेटिव अकाउंट्स और फंसे पैसों का पूरा लेखा-जोखा
| वित्तीय वर्ष (Financial Year) | निष्क्रिय खातों की संख्या (Inoperative Accounts) | खातों में फंसा कुल बैलेंस (₹ करोड़) | सेटल की गई कुल राशि (₹ करोड़) |
| 2020-21 | 11,72,923 | ₹3,930.85 करोड़ | ₹1,855.55 करोड़ |
| 2021-22 | 13,41,848 | ₹4,962.70 करोड़ | ₹2,269.75 करोड़ |
| 2022-23 | 17,44,518 | ₹6,804.88 करोड़ | ₹2,673.98 करोड़ |
| 2023-24 | 21,55,387 | ₹8,505.23 करोड़ | ₹2,632.29 करोड़ |
(स्रोत: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत आधिकारिक डेटा)
क्यों ठप हो रहे हैं लाखों ईपीएफ अकाउंट? श्रम मंत्रालय ने बताईं 2 मुख्य वजहें
केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने सदन को बताया कि ईपीएफ खातों के निष्क्रिय होने और उनके तेजी से बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण जिम्मेदार हैं:
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1. नौकरी छोड़ने के बाद क्लेम या ट्रांसफर न करना: जब कोई कर्मचारी अपनी नौकरी छोड़ता है या एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जाता है, तो वह अक्सर पुराने पीएफ खाते में जमा राशि की निकासी (Withdrawal) के लिए क्लेम फाइल नहीं करता और न ही उसे नए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) में ट्रांसफर कराता है। ईपीएफओ नियमों के अनुसार, यदि किसी खाते में लगातार 36 महीनों (3 साल) तक कोई नया अंशदान (Contribution) जमा नहीं होता है, तो वह खाता स्वतः 'इनऑपरेटिव' की श्रेणी में डाल दिया जाता है।
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2. केवाईसी अपडेशन और आधार सीडिंग अभियान: सरकार द्वारा चलाए गए सख्त केवाईसी और आधार लिंकिंग अभियान के तहत जिन खातों में जन्मतिथि (Date of Birth), नाम में विसंगति या पिता के नाम का सही ब्योरा नहीं था और जो पहले वर्गीकृत नहीं थे, उन्हें पहचान कर इनऑपरेटिव खातों के रूप में दर्ज किया गया है।
क्या इनऑपरेटिव खाते पर भी मिलता है ब्याज? जानिए ईपीएफओ का नियम
कई खाताधारकों के मन में यह भ्रांति रहती है कि खाता निष्क्रिय होने के बाद उसमें जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज बंद हो जाता है।
ईपीएफओ के संशोधित नियमों के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी 58 वर्ष की आयु तक अपनी नौकरी छोड़ देता है और उसका खाता इनऑपरेटिव हो जाता है, तो भी उसके खाते में जमा राशि पर 58 वर्ष की आयु पूरी होने तक सामान्य रूप से सालाना चक्रवृद्धि ब्याज जुड़ता रहता है। हालांकि, कर्मचारी के 58 वर्ष (रिटायरमेंट की मानक आयु) पार करने के बाद यदि खाते से निकासी का क्लेम नहीं किया जाता, तब उस पर ब्याज मिलना पूरी तरह बंद हो जाता है।
इसके अतिरिक्त, यदि कोई निष्क्रिय खाता 7 वर्षों तक लावारिस पड़ा रहता है, तो उस राशि को 'सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर फंड' (SCWF) में ट्रांसफर करने का प्रावधान है, जिसे बाद में वैध प्रमाण प्रस्तुत करके वापस हासिल किया जा सकता है।
बंद या निष्क्रिय पीएफ खाते से पैसे कैसे निकालें और दोबारा कैसे एक्टिव करें?
यदि आपका भी कोई पुराना पीएफ खाता निष्क्रिय हो गया है, तो आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। ईपीएफओ ने इनऑपरेटिव खातों को दोबारा शुरू करने और फंड ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को काफी सरल बनाया है:
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वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों के लिए (ऑनलाइन ट्रांसफर): यदि आप वर्तमान में किसी अन्य ईपीएफओ-पंजीकृत संस्थान में काम कर रहे हैं, तो आप ईपीएफओ के 'यूनिफाइड मेंबर पोर्टल' (Member Sewa Portal) पर लॉगिन करें। वहां 'ऑनलाइन सर्विसेज' टैब में जाकर 'वन मेंबर - वन ईपीएफ अकाउंट (Transfer Request)' विकल्प चुनें। इसके जरिए आप अपने पुराने निष्क्रिय खाते की पूरी जमा पूंजी को अपने मौजूदा एक्टिव यूएएन खाते में बिना किसी शुल्क के ऑनलाइन ट्रांसफर करा सकते हैं।
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रिटायर हो चुके या गैर-नौकरीपेशा लोगों के लिए: यदि आप पूरी तरह नौकरी छोड़ चुके हैं या रिटायर हो चुके हैं, तो आप ई-सेवा पोर्टल पर 'फॉर्म 19' (पूर्ण पीएफ निकासी) और 'फॉर्म 10C' (पेंशन निकासी) ऑनलाइन भरकर पूरा पैसा अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करा सकते हैं।
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दस्तावेजों में गड़बड़ी होने पर (ऑफलाइन प्रक्रिया): यदि आपका यूएएन नंबर एक्टिव नहीं है या आधार व जन्मतिथि में मिसमैच है, तो आपको अपने नजदीकी क्षेत्रीय ईपीएफओ (Regional EPFO) कार्यालय जाना होगा। वहां 'जॉइंट डिक्लेरेशन फॉर्म' (Joint Declaration) भरकर और आधार व पैन कार्ड की स्व-सत्यापित प्रति जमा करके आप अपनी ई-केवाईसी पूरी करा सकते हैं। केवाईसी सत्यापित होते ही आपका खाता दोबारा सक्रिय हो जाएगा।
निधि आपके निकट 2.0 और ऑटो-क्लेम: अटके पैसों को दिलाने के लिए सरकार की नई पहल
कर्मचारियों के इस 8,500 करोड़ रुपये के अटके फंड को सुरक्षित रूप से उनके असली हकदारों तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार और ईपीएफओ ने कई बड़े कदम उठाए हैं:
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ऑटो-इनिशिएशन ऑफ क्लेम्स (Auto Claims): संशोधित ईपीएफ योजना के तहत ईपीएफओ उन निष्क्रिय खातों में ऑटो-क्लेम सुविधा विकसित कर रहा है जहां आधार-सीडेड बैंक खाते पहले से लिंक हैं, ताकि पैसा सीधे बिना किसी जटिल आवेदन के लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जा सके।
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'निधि आपके निकट 2.0' (Nidhi Aapke Nikat) जिला स्तरीय कैंप: ईपीएफओ हर महीने की 27 तारीख को देश के सभी जिलों में विशेष जन-जागरूकता और शिकायत निवारण कैंप आयोजित कर रहा है। इन कैंपों में जाकर कर्मचारी अपने पुराने और बंद खातों की स्थिति की मौके पर ही जांच करा सकते हैं और केवाईसी समस्याओं का तुरंत समाधान पा सकते हैं।
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सोशल मीडिया और एसएमएस आउटरीच: ईपीएफओ उन रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर सीधे अलर्ट मैसेज भेज रहा है जिनके खाते इनऑपरेटिव श्रेणी में पहुंच चुके हैं, ताकि खाताधारक समय रहते अपनी जमा पूंजी का क्लेम कर सकें।
अपनी मेहनत की कमाई को न छोड़ें लावारिस
ईपीएफ का पैसा किसी भी कर्मचारी के भविष्य की आर्थिक ढाल होता है। संसद में सामने आए 21 लाख से अधिक बंद खातों के ये आंकड़े इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि जागरूकता की कमी के कारण हजारों करोड़ रुपये बिना क्लेम के पड़े हुए हैं।
यदि आपने अपने करियर में कभी भी कंपनियां बदली हैं, तो तुरंत ईपीएफओ पोर्टल पर जाकर अपने सभी पुराने मेंबर आईडी (MID) की जांच करें और उन्हें अपने मौजूदा यूएएन के साथ मर्ज करें। चंद मिनटों का यह डिजिटल प्रयास आपके बैंक खाते में आपकी अपनी मेहनत के हजारों रुपये सुरक्षित वापस दिला सकता है।