बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधार की तैयारी, जल्द बनेगी हाई-लेवल कमेटी; वित्त मंत्री सीतारमण ने किया ऐलान
देश के वित्तीय और बैंकिंग ढांचे को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के एक महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान देश में बैंकिंग सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए एक हाई-पावर कमेटी के गठन का औपचारिक ऐलान किया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य साल 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र ('Viksit Bharat') बनाने के सपने को पूरा करना है, जिसके तहत बैंकिंग सेक्टर की कार्यप्रणाली, वित्तीय स्थिरता और विकास की रफ्तार को और अधिक तेज किया जाएगा। वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश के बैंक अब पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में हैं, क्योंकि उनके पास मजबूत बैलेंस शीट और ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर का मुनाफा मौजूद है। इसके अलावा, बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) यानी डूबे हुए कर्ज भी अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ चुके हैं, जो इस सेक्टर को नए सुधारों की ओर ले जाने के लिए सबसे सही समय बनाता है।
कमिटी के मुख्य एजेंडे और सात प्रमुख प्राथमिकता वाले विषय
वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा तैयार किए गए विशेष और गहन शोध दस्तावेजों के आधार पर इस हाई-लेवल कमेटी के लिए कई अहम मुद्दों को चिन्हित किया गया है। इस कमिटी का मुख्य फोकस देश की बदलती आर्थिकी के हिसाब से बैंकिंग सिस्टम की संरचना और उसकी दक्षता की समीक्षा करना होगा। वित्त मंत्री ने बताया कि हाल ही में आयोजित दो दिवसीय 'पीएसबी कॉन्फ्लुएन्स' में जिन सात प्रमुख विषयों पर व्यापक चर्चा की गई है, वे सभी इस नई समिति के लिए एक मजबूत आधार का काम करेंगे। इन प्रमुख विषयों में डिपॉजिट मोबिलाइजेशन (जमा जुटाना), युवाओं के लिए विशेष बैंकिंग उत्पाद (Banking for Youth), निवेश चक्र को गति देना, कृषि और बागवानी मूल्य श्रृंखला बुनियादी ढांचा (Agriculture Infrastructure), प्रायोरिटी सेक्टर लैंडिंग, ग्लोबल कैपिसिटी सेंटर (GCCs) और क्रेडिट कार्ड बिजनेस का आधुनिकीकरण शामिल हैं। विशेष रूप से देश की युवा आबादी, जो कुल आबादी का लगभग 29 प्रतिशत हिस्सा (15 से 29 आयु वर्ग) है, उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक बैंकिंग रणनीतियों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों का सामना
सरकार का यह दूरदर्शी कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, देश के बैंकों को वैश्विक स्तर पर टॉप-5 बैंकों की श्रेणी में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी वित्तीय संस्थाओं के साथ मुकाबला कर सकें। इस दिशा में कमिटी वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion), उपभोक्ता संरक्षण और जोखिम प्रबंधन जैसे पहलुओं की भी बारीकी से समीक्षा करेगी। वित्त मंत्री ने सभी वरिष्ठ बैंकर्स और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों से आग्रह किया है कि वे इन सात अहम विषयों पर अपने ठोस सुझाव और विचार साझा करें, ताकि जब यह हाई-लेवल कमेटी अपना काम शुरू करे तो उसे जमीनी स्तर की वास्तविक जानकारियों के आधार पर त्वरित और प्रभावी सिफारिशें तैयार करने में मदद मिल सके। सरकार की योजना इन सिफारिशों के मिलने के बाद बिना किसी देरी के तेज गति से नीतिगत बदलाव लागू करने की है, जिससे देश के विकास को एक नई रफ्तार मिल सके।