ग्लोबल ETF का ऐसा क्रेज! NAV से 112% तक महंगे बिक रहे 6 इंटरनेशनल फंड्स

ग्लोबल ETF का ऐसा क्रेज! NAV से 112% तक महंगे बिक रहे 6 इंटरनेशनल फंड्स

भारतीय शेयर बाजार के रिटेल और हाई-नेट-वर्थ निवेशकों में विदेशी बाजारों, विशेषकर अमेरिकी और एशियाई टेक दिग्गजों में निवेश करने की होड़ ने एक बेहद असामान्य और खतरनाक स्थिति पैदा कर दी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (International ETFs) अपनी वास्तविक अंतर्निहित परिसंपत्ति के शुद्ध मूल्य यानी नेट एसेट वैल्यू (NAV) से अत्यधिक ऊंचे प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। बाजार के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कुछ प्रमुख ग्लोबल ईटीएफ अपनी वास्तविक एनएवी की तुलना में 100 प्रतिशत से भी अधिक प्रीमियम पर ट्रेड हो रहे हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि निवेशक 100 रुपये की संपत्ति खरीदने के लिए एक्सचेंजों पर 200 रुपये से अधिक की कीमत चुका रहे हैं। विदेशी शेयरों में निवेश की जबरदस्त मांग और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) व पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) द्वारा तय की गई विदेशी निवेश की सीमा के कारण बने मांग-आपूर्ति के इस भारी असंतुलन ने अब खुदरा निवेशकों की पूंजी के डूबने का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक Q50 में 111.8% का रिकॉर्ड प्रीमियम: मिराए एसेट FANG+ और S&P 500 भी आसमान पर

घरेलू एक्सचेंजों पर उपलब्ध छह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ईटीएफ के आंकड़ों की पड़ताल करने पर पता चलता है कि मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक Q50 ईटीएफ (Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF) में प्रीमियम का स्तर सबसे अधिक विकृत हो चुका है। 14 अक्टूबर 2026 तक यह फंड 111.8 प्रतिशत के अविश्वसनीय प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि 30 सितंबर को इसका प्रीमियम 62.6 प्रतिशत के स्तर पर था। उस कारोबारी सत्र में इस फंड की वास्तविक एनएवी 117.96 रुपये थी, लेकिन निवेशक इसे एक्सचेंज पर 249.83 रुपये के भाव पर खरीद रहे थे। इसी तरह अमेरिकी टेक कंपनियों में निवेश करने वाला मिराए एसेट एनवाईएसई फेंग प्लस ईटीएफ (Mirae Asset NYSE FANG+ ETF) 59.5 प्रतिशत के प्रीमियम पर बिक रहा है, जबकि मिराए एसेट एसएंडपी 500 टॉप 50 ईटीएफ (Mirae Asset S&P 500 Top 50 ETF) में 58.9 प्रतिशत का प्रीमियम दर्ज किया गया। एशियाई और चीनी तकनीकी बाजार का रुख करने वाले मिराए एसेट हैंग सेंग टेक ईटीएफ में 31.1 प्रतिशत, मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक 100 ईटीएफ में 15.3 प्रतिशत और निप्पॉन इंडिया हैंग सेंग बीईईएस (Nippon India Hang Seng BeES) में 4.6 प्रतिशत का प्रीमियम देखने को मिला। फंड्स के बीच का यह भारी अंतर यह साफ करता है कि जहां मांग अत्यधिक केंद्रित है, वहां कीमतें पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुकी हैं।

आरबीआई और सेबी की 7 बिलियन डॉलर की सीमा बनी मुख्य वजह: नए यूनिट्स के निर्माण पर लगी अघोषित रोक

ग्लोबल ईटीएफ के इस कदर महंगे होने की जड़ें किसी विदेशी शेयर बाजार की तूफानी तेजी में नहीं, बल्कि नियामकीय सीमाओं के कारण पैदा हुई कृत्रिम आपूर्ति की कमी में निहित हैं। भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत संपूर्ण भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश की कुल सीमा 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर (USD 7 Billion) और विदेशी ईटीएफ में निवेश की समग्र सीमा 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तय की गई है। व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड हाउसों के लिए यह सीमा क्रमशः 1 बिलियन डॉलर और 300 मिलियन डॉलर तक सीमित है। भारतीय फंड हाउस इस उद्योग-व्यापी सीमा को काफी पहले ही छू चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप फंड हाउसों द्वारा नए विदेशी निवेश करने और नए ईटीएफ यूनिट्स जारी करने (Fresh Unit Creation) पर व्यावहारिक रूप से रोक लग चुकी है। जब प्राथमिक बाजार में नए यूनिट्स नहीं बन पाते हैं, तो केवल द्वितीयक बाजार यानी स्टॉक एक्सचेंज पर मौजूद पुरानी यूनिट्स की ही खरीद-फरोख्त होती है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय विविधीकरण (Global Diversification) की चाह में खरीदारों की संख्या बहुत बढ़ जाती है और बेचने वालों की संख्या सीमित रहती है, तो ईटीएफ का बाजार भाव अपनी वास्तविक वैल्यू से बहुत दूर निकल जाता है।

प्रीमियम गायब हुआ तो 33% से 50% तक टूट सकती है पूंजी: जानिए कैसे गणित बिगाड़ेगा आपका रिटर्न

बाजार के जानकारों और वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि खुदरा निवेशक अक्सर ईटीएफ की एक्सचेंज कीमत को ही उसका वास्तविक मूल्य समझ लेते हैं, जो एक बहुत बड़ी भूल है। ईटीएफ के प्रीमियम में होने वाली यह अंधाधुंध वृद्धि विदेशी बाजारों के प्रदर्शन का वास्तविक प्रतिबिंब नहीं है। एक साधारण गणितीय उदाहरण से समझें तो यदि कोई निवेशक 50 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे किसी ईटीएफ को खरीदता है, तो इसका मतलब है कि वह 100 रुपये के वास्तविक मूल्य वाले शेयर पोर्टफोलियो के लिए 150 रुपये का भुगतान कर रहा है। यह अतिरिक्त 50 रुपये उस फंड की संपत्तियों की आंतरिक वृद्धि नहीं है, बल्कि केवल बाजार की क्षणिक मारामारी का नतीजा है। यदि भविष्य में नियामक द्वारा विदेशी निवेश की सीमा बढ़ा दी जाती है या फंड हाउस नए यूनिट्स जारी करने में सक्षम हो जाते हैं, तो यह प्रीमियम तुरंत समाप्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में भले ही अमेरिका या चीन के शेयर बाजारों में कोई गिरावट न आए और फंड की एनएवी 100 रुपये पर ही स्थिर रहे, तब भी एक्सचेंज पर ईटीएफ की बाजार कीमत 150 रुपये से गिरकर सीधे 100 रुपये पर आ जाएगी, जिससे निवेशक को बैठे-बिठाए सीधे 33.3 प्रतिशत का भारी पूंजीगत नुकसान झेलना पड़ेगा। वहीं 100 प्रतिशत से अधिक प्रीमियम वाले फंड्स में यह संभावित गिरावट 50 प्रतिशत से भी अधिक हो सकती है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने जारी की सतर्कता चेतावनी: निवेश से पहले iNAV और लिक्विडिटी जरूर जांचें

विदेशी ईटीएफ में लगातार बढ़ते इस अस्वाभाविक फैलाव को देखते हुए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने भी बाजार प्रतिभागियों और निवेशकों को आधिकारिक तौर पर आगाह किया है। एक्सचेंज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई को उन सिक्योरिटीज में लगाने से पहले अत्यधिक सावधानी बरतें जो अपनी अंतर्निहित परिसंपत्ति के मूल्य से बहुत ऊपर ट्रेड कर रही हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि अंतरराष्ट्रीय ईटीएफ में पैसा लगाने से पहले निवेशकों को ब्रोकिंग ऐप पर दिख रहे केवल लास्ट ट्रेडेड प्राइस (LTP) पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्हें फंड हाउस की वेबसाइट या एक्सचेंज पोर्टल पर जाकर ईटीएफ के उस समय के वास्तविक एनएवी और संकेतक इंट्राडे एनएवी यानी iNAV (Indicative NAV) की अनिवार्य रूप से जांच करनी चाहिए। इसके अलावा, फंड में दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी की स्थिति का आकलन करना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रीमियम-टू-एनएवी अनुपात सामान्य स्तर (1 से 2 प्रतिशत) के करीब हो। जब तक विदेशी निवेश की सीमा पर नियामकीय स्पष्टता नहीं आती, तब तक अत्यधिक प्रीमियम पर मिल रहे ग्लोबल ईटीएफ में एकमुश्त बड़ी पूंजी लगाना भारी वित्तीय जोखिम को खुला न्योता देने जैसा है।