NSE IPO GMP में भारी गिरावट: लिस्टिंग से पहले 71% फिसला ग्रे मार्केट प्रीमियम, जानें क्या घटेंगे लिस्टिंग गेन

NSE IPO GMP में भारी गिरावट: लिस्टिंग से पहले 71% फिसला ग्रे मार्केट प्रीमियम, जानें क्या घटेंगे लिस्टिंग गेन

दलाल स्ट्रीट और देश के प्राथमिक पूंजी बाजार में इस समय नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के ऐतिहासिक पब्लिक इश्यू को लेकर जबरदस्त गहमागहमी देखने को मिल रही है। हालांकि शेयर बाजार में लिस्टिंग की तारीख नजदीक आने के साथ ही अनऑफिशियल ग्रे मार्केट से आ रहे संकेतों ने निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अनलिस्टेड और ग्रे मार्केट को ट्रैक करने वाले स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एनएसई आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) जो निर्गम खुलने से कुछ समय पहले 300 रुपये के उच्च स्तर को छू रहा था, वह शनिवार दोपहर तक तेज बिकवाली और सुस्ती के चलते सीधे लुढ़ककर 87 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। अपने उच्चतम स्तर से प्रीमियम में आई लगभग 71 प्रतिशत की यह तेज गिरावट बाजार विश्लेषकों और खुदरा निवेशकों दोनों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।

ग्रे मार्केट में आए इस अचानक दबाव के पीछे सेकेंडरी मार्केट की अस्थिरता और वैल्यूएशन को लेकर चल रहे आंतरिक विमर्श को मुख्य कारक माना जा रहा है। जीएमपी में इस तेज करेक्शन के बावजूद प्राइमरी मार्केट में इस इश्यू को लेकर संस्थागत और गैर-संस्थागत निवेशकों का भरोसा अब भी काफी मजबूत बना हुआ है। 22,569 करोड़ रुपये के इस विशाल निर्गम को निवेशकों की ओर से पर्याप्त समर्थन मिला है, जिससे यह साफ होता है कि निवेशक छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव के बजाय देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे पर अधिक भरोसा दिखा रहे हैं।

दूसरे दिन ही पूरी तरह सब्सक्राइब हुआ 22,569 करोड़ का मेगा आईपीओ, बिडिंग के आंकड़े मजबूत

ग्रे मार्केट के सुस्त रुझान के विपरीत प्राथमिक बाजार में बोली लगाने की प्रक्रिया काफी सकारात्मक गति से आगे बढ़ रही है। शुक्रवार को बोली के दूसरे कारोबारी दिन ही एनएसई का यह सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से सब्सक्राइब हो गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) द्वारा जारी आधिकारिक संचयी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल 8.86 करोड़ शेयरों के ऑफर साइज के मुकाबले निवेशकों की ओर से 10.28 करोड़ शेयरों के लिए वैध बोलियां प्राप्त हो चुकी हैं। इसमें संस्थागत खरीदारों (QIB) और उच्च नेटवर्थ वाले निवेशकों (NII) के हिस्से में विशेष रूप से ठोस प्रतिक्रिया देखी गई है।

यह पूरा निर्गम शुद्ध रूप से ऑफर फॉर सेल (OFS) संरचना पर आधारित है, जिसके तहत एक्सचेंज के मौजूदा बड़े शेयरधारक कुल 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों का विनिवेश कर रहे हैं। इस स्ट्रक्चर का सीधा अभिप्राय यह है कि शेयर बिक्री से जुटाए जाने वाले पूरे 22,569 करोड़ रुपये सीधे उन बेचने वाले शेयरधारकों के पास जाएंगे, और इसमें से कोई भी नई पूंजी सीधे एक्सचेंज के बैलेंस शीट या कॉरपोरेट फंड में नहीं जुड़ेगी। प्रबंधन ने इस इश्यू के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड निर्धारित किया है। 1,785 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग 4.42 लाख करोड़ रुपये बैठता है। यह सार्वजनिक निर्गम सोमवार, 21 सितंबर को निवेशकों के लिए बंद हो जाएगा, जिसके बाद शेयरों का आवंटन पूरा कर 24 सितंबर को प्रमुख एक्सचेंजों पर इसकी आधिकारिक लिस्टिंग होने की संभावना है।

वित्तीय प्रदर्शन में मामूली सुस्ती: राजस्व और ट्रांजैक्शन शुल्क से होने वाली आय में गिरावट

ग्रे मार्केट में प्रीमियम टूटने की एक अहम वजह कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजों में आई हल्की गिरावट को भी माना जा रहा है। वित्तीय विवरणों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का परिचालन से कुल राजस्व 16,601.31 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। यदि इसकी तुलना पिछले वित्तीय वर्ष (वित्त वर्ष 2024-25) के 17,140.67 करोड़ रुपये के राजस्व से की जाए, तो इसमें 3 प्रतिशत से अधिक की सालाना गिरावट देखने को मिली है। एक्सचेंज के कुल टर्नओवर और डेरिवेटिव्स सेगमेंट में वॉल्यूम के उतार-चढ़ाव ने इस आंकड़े को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।

इसके साथ ही, एनएसई की बैलेंस शीट में मुख्य योगदान देने वाले ट्रांजैक्शन शुल्क (Transaction Charges) से प्राप्त होने वाली आय में भी संकुचन दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां ट्रांजैक्शन शुल्क से एक्सचेंज को 13,635.76 करोड़ रुपये की आय हुई थी, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये पर आ गया, जो लगभग 4 प्रतिशत की वार्षिक कमी को दर्शाता है। नियामक स्तर पर ट्रेडिंग नियमों में हुए कुछ संरचनात्मक बदलावों और मार्जिन नियमों के कड़े होने के चलते दैनिक वॉल्यूम में आए बदलाव का असर इस आय पर साफ दिखाई दिया है, जिसे कई विश्लेषक अल्पकालिक ठहराव के रूप में देख रहे हैं।

जीएमपी के संकेत और लिस्टिंग डे पर क्या होनी चाहिए निवेशकों की रणनीति?

बाजार के दिग्गज विधिक और वित्तीय विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल एक अनौपचारिक और गैर-विनियमित संकेतक होता है। यह सिर्फ इतना दर्शाता है कि सूचीबद्ध होने से पहले कुछ ट्रेडर इश्यू प्राइस के ऊपर कितनी राशि का भुगतान करने का जोखिम उठाने को तैयार हैं। जीएमपी किसी भी कानूनी संस्था द्वारा नियंत्रित नहीं होता और न ही यह इस बात की कोई गारंटी देता है कि लिस्टिंग के दिन शेयर अनिवार्य रूप से प्रीमियम पर ही खुलेगा। इतिहास गवाह रहा है कि कई बार भारी जीएमपी वाले शेयर सपाट लिस्ट हुए हैं, जबकि कम जीएमपी वाले शेयरों ने बाजार की मजबूती के दम पर मजबूत शुरुआत की है।

अब पूरी दलाल स्ट्रीट की निगाहें सोमवार, 21 सितंबर को सामने आने वाले अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों पर टिकी हैं। 24 सितंबर को प्रस्तावित लिस्टिंग के दिन बाजार का व्यापक सेंटिमेंट, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लिवाली और खुदरा निवेशकों की सहभागिता ही एनएसई के शेयर की वास्तविक दिशा तय करेगी। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए एक्सचेंज का एकाधिकार जैसा कारोबारी मॉडल, मजबूत ऑपरेटिंग मार्जिन और भारत के बढ़ते रिटेल निवेशक आधार को देखते हुए बुनियादी ढांचा अभी भी आकर्षक बना हुआ है।