'हॉर्मुज संकट में नहीं रुकेगा रसोई का चूल्हा!' इंडियन ऑयल ने 30% बढ़ाया घरेलू LPG उत्पादन, 100% से अधिक क्षमता पर दौड़ाईं रिफाइनरियां
पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के सबसे संवेदनशील मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में उपजे गंभीर संकट के बीच भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत राहत भरी और ऐतिहासिक घोषणा की है। समुद्री व्यापार मार्गों में आई रुकावटों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल के बावजूद इंडियन ऑयल ने रिकॉर्ड समय के भीतर अपने घरेलू तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस रणनीतिक कदम का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के करोड़ों परिवारों के रसोई गैस सिलेंडरों और आवश्यक प्राथमिक क्षेत्रों में ईंधन की आपूर्ति बिना किसी बाधा के निर्बाध रूप से जारी रहे।
कंपनी की 67वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) को संबोधित करते हुए इंडियन ऑयल के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने इस बात का खुलासा किया कि कैसे संकट की इस अभूतपूर्व घड़ी में भारत के ऊर्जा तंत्र ने अपनी आत्मनिर्भरता और त्वरित रणनीति का प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस के आयात मार्ग प्रभावित होने के तुरंत बाद केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मार्गदर्शन में एक बहुस्तरीय आपात योजना पर काम शुरू किया गया। इसके तहत कंपनी की तमाम घरेलू तेल शोधन रिफाइनरियों को उनकी पूर्ण क्षमता से भी अधिक (100% से ज्यादा कैपेसिटी यूटिलाइजेशन) पर संचालित किया गया ताकि आयातित आपूर्ति में आने वाली किसी भी संभावित कमी की भरपाई घरेलू स्तर पर ही की जा सके।
90% एलपीजी का रास्ता और हॉर्मुज की संवेदनशीलता: भारत के सामने क्या थी चुनौती?
इस संकट की गंभीरता को समझने के लिए भारत के आयात ढांचे और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत को जानना बेहद आवश्यक है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा और कुल एलपीजी (LPG) आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचता है।
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और लाल सागर व फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ते जोखिम के चलते इस जलडमरूमध्य से होने वाला पोत परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। ऐसी स्थिति में यदि कोई त्वरित और वैकल्पिक रणनीति न अपनाई जाती, तो देश भर में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों और औद्योगिक ईंधन की भारी किल्लत पैदा होने का सीधा खतरा मंडरा रहा था। इंडियन ऑयल ने इस भू-राजनीतिक झटके को भांपते हुए न केवल मध्य-पूर्व के पारंपरिक तेल ग्रेडों पर अपनी निर्भरता को तत्काल घटाया, बल्कि दुनिया के अन्य वैकल्पिक भौगोलिक क्षेत्रों (Alternative Geographies) से कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के नए कार्गो सुरक्षित किए।
109% क्षमता पर दौड़ीं रिफाइनरियां: 24 घंटे मॉनिटरिंग और वॉर रूम मॉडल
चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने विस्तार से बताया कि इंडियन ऑयल ने इस अप्रत्याशित संकट का मुकाबला करने के लिए अपनी कार्यप्रणाली में कौन-से बड़े तकनीकी और परिचालन बदलाव किए। कंपनी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 24 घंटे काम करने वाले विशेष नियंत्रण कक्ष (Control Rooms) स्थापित किए और दैनिक समीक्षा बैठकों के जरिए देश के हर राज्य और जिले में ईंधन के बफर स्टॉक की रियल-टाइम निगरानी शुरू की।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इंडियन ऑयल की रिफाइनरियों ने 109.4 प्रतिशत की असाधारण क्षमता उपयोग (Capacity Utilisation) पर काम करते हुए 1.92 करोड़ टन (19.17 मिलियन टन) कच्चे तेल का रिकॉर्ड प्रसंस्करण किया। रिफाइनरी स्तर पर क्रैकिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स को इस तरह री-अलाइन किया गया कि वे सामान्य से कहीं अधिक अनुपात में एलपीजी गैस का उत्पादन कर सकें। इसी तकनीकी सामंजस्य का नतीजा रहा कि बहुत कम समय में घरेलू एलपीजी उत्पादन में 30% का जबर्दस्त इजाफा दर्ज किया गया, जिससे किसी भी राज्य में गैस आपूर्ति की श्रृंखला टूटने नहीं पाई। इसके साथ ही देशव्यापी पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए तिमाही आधार पर रिकॉर्ड 2.85 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का सुरक्षित परिवहन किया गया।
वित्तीय और परिचालन के नए रिकॉर्ड: ₹36,802 करोड़ का शुद्ध लाभ
ऊर्जा संकट की इन चुनौतियों के बीच भी इंडियन ऑयल ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान अपनी परिचालन मजबूती और वित्तीय सेहत का ऐतिहासिक प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी ने मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए ₹8.86 लाख करोड़ के कुल टर्नओवर पर ₹36,802 करोड़ का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ (Standalone Net Profit) दर्ज किया। इस दौरान कंपनी ने पेट्रोलियम उत्पादों, प्राकृतिक गैस और पेट्रोकेमिकल्स की 10.5 करोड़ टन से अधिक की कुल बिक्री की।
कंपनी की रिफाइनरियों ने पूरे वर्ष के दौरान 7.54 करोड़ टन से अधिक कच्चे तेल का रिकॉर्ड शोधन किया, जबकि देश भर में फैली लिक्विड पाइपलाइनों के जरिए 10.25 करोड़ टन ईंधन का परिवहन हुआ, जो अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। घरेलू पेट्रोलियम उत्पादों के बाजार में इंडियन ऑयल की हिस्सेदारी बढ़कर 43.1 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है। हालांकि, पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने कंपनी के मार्जिन पर कुछ दबाव जरूर डाला, लेकिन इसके मजबूत परिचालन ढांचे ने उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं पड़ने दिया।
रिफाइनिंग क्षमता 9.8 करोड़ टन करने की तैयारी: पानीपत, गुजरात और बरौनी का विस्तार
भविष्य में आने वाले ऐसे किसी भी वैश्विक भू-राजनीतिक झटके से देश को सुरक्षित रखने के लिए इंडियन ऑयल अपने बुनियादी ढांचे में भारी पूंजीगत निवेश कर रही है। कंपनी अपनी मौजूदा 8.07 करोड़ टन (80.75 MTPA) की वार्षिक शोधन क्षमता को बढ़ाकर लगभग 9.8 करोड़ टन (98 MTPA) करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
इसके लिए हरियाणा की पानीपत रिफाइनरी, गुजरात रिफाइनरी और बिहार की बरौनी रिफाइनरी में बड़े पैमाने पर क्षमता विस्तार परियोजनाएं पूरी होने के अंतिम चरण में हैं। भारत सरकार के उस राष्ट्रीय विजन के तहत, जिसमें देश की कुल तेल शोधन क्षमता को 30 करोड़ टन प्रति वर्ष तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, अकेले इंडियन ऑयल उस अतिरिक्त क्षमता में 40 प्रतिशत से अधिक का योगदान देगी। इसके अलावा, पारंपरिक तेल कारोबार पर निर्भरता कम करने के लिए कंपनी पेट्रोकेमिकल तीव्रता को 2030 तक 15% करने और प्राकृतिक गैस की बिक्री को डेढ़ गुना बढ़ाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और अपनी रिन्यूएबल ऊर्जा शाखा 'टेरा क्लीन' के जरिए 5 गीगावाट से अधिक की हरित ऊर्जा परियोजनाएं भी विकसित की जा रही हैं।
ऊर्जा सुरक्षा का नया मंत्र: संकट से पहले तैयारी और राष्ट्रीय प्राथमिकता
आईओसी चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया के इस हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किसी भी राष्ट्र की ऊर्जा संप्रभुता संकट आने के बाद नहीं, बल्कि संकट से पहले की गई तैयारियों से तय होती है। उन्होंने कहा, "जब भी राष्ट्रीय जरूरत का समय आता है, देश की ऊर्जा सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि होती है। अनिश्चितता से भरी इस दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा केवल बड़े आकार पर नहीं, बल्कि चपलता (Agility), स्रोतों की विविधता (Diversification) और पूर्व तैयारी पर निर्भर करती है।"
घरेलू एलपीजी उत्पादन में 30% की इस अभूतपूर्व वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किए गए विविधीकरण ने यह साफ कर दिया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में चाहे तनाव कितना भी बढ़ जाए, भारत के घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। देश का विशाल ऊर्जा नेटवर्क न केवल किसी भी वैश्विक आपूर्ति झटके को सोखने में सक्षम है, बल्कि वह आने वाले दशकों के लिए भारत के हर नागरिक के घर तक सुरक्षित और निर्बाध ईंधन पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा है।