₹105 के सरकारी शेयर पर टूटा बाजार, मिला करोड़ों का नया ऑर्डर, निवेशकों में मची खरीदने की होड़

₹105 के सरकारी शेयर पर टूटा बाजार, मिला करोड़ों का नया ऑर्डर, निवेशकों में मची खरीदने की होड़

शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव भरे माहौल के बीच सरकारी कंपनियों यानी पीएसयू स्टॉक्स में एक बार फिर तगड़ा एक्शन देखने को मिल रहा है। दलाल स्ट्रीट पर आज सुबह के कारोबारी सत्र से ही एक खास सरकारी कंपनी के शेयरों पर निवेशकों की भारी नजर टिकी हुई है। लगभग ₹105 के स्तर पर ट्रेड कर रहा यह स्मॉलकैप पीएसयू स्टॉक अचानक निवेशकों का पसंदीदा बन गया है। बाजार खुलते ही काउंटर में भारी वॉल्यूम दर्ज किया गया और खरीदारी का जबर्दस्त दबाव देखने को मिला। खुदरा निवेशकों से लेकर बड़े संस्थागत खरीदारों तक, हर कोई इस सस्ते वैल्यूएशन वाले शेयर में अपनी पोजिशन मजबूत करने की होड़ में दिख रहा है। बीते कुछ सत्रों से सुस्त चाल चल रहे इस काउंटर में आई यह अचानक तेजी बेवजह नहीं है, बल्कि इसके पीछे कंपनी को मिला एक बहुत बड़ा कारोबारी कॉन्ट्रैक्ट है जिसने पूरे सेंटिमेंट को बदलकर रख दिया है।

कंपनी के खाते में आया करोड़ों का नया प्रोजेक्ट वर्क ऑर्डर

कंपनी की ओर से स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नवरत्न/मिनीरत्न श्रेणी की सरकारी फर्म को घरेलू बाजार से एक बड़ा वर्क ऑर्डर प्राप्त हुआ है। यह ऑर्डर सीधे तौर पर बुनियादी ढांचे, मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग सर्विसेज के विस्तार से जुड़ा हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की समयसीमा तय मानकों के तहत निर्धारित की गई है और इससे कंपनी को आने वाली कई तिमाहियों तक स्थिर रेवेन्यू हासिल करने में सीधी मदद मिलेगी। सप्लाई चेन और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन के मोर्चे पर मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाली यह सरकारी इकाई पहले से ही कई अहम परियोजनाओं पर काम कर रही है, लेकिन ताजा ऑर्डर मिलने के बाद इसके ऑर्डर बुक की स्थिति और भी ज्यादा सुदृढ़ हो गई है। बाजार के विश्लेषक मानते हैं कि सरकारी बुनियादी ढांचा पहलों के तेज होने से ऐसी कंपनियों को लगातार नए टेंडर हासिल हो रहे हैं।

बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सरकारी खर्च का मिल रहा सीधा लाभ

भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार के बीच केंद्र सरकार का पूरा फोकस इस समय कैपिटल एक्सपेंडिचर और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर बना हुआ है। रेल, पावर, डिफेंस और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सरकारी कंपनियों को इस व्यापक कैपेक्स साइकिल का सबसे ज्यादा फायदा मिल रहा है। ₹105 के स्तर पर उपलब्ध यह कंपनी भी ऐसे ही अहम सेक्टर्स के लिए क्रिटिकल इक्विपमेंट और सर्विसेज उपलब्ध कराती है। देश भर के अलग-अलग औद्योगिक हब और राज्यों में चल रही विकास परियोजनाओं के चलते कंपनी के पास ऑर्डर्स की कोई कमी नहीं दिख रही है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि सरकारी पहलों जैसे 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत घरेलू कंपनियों को वरीयता मिलने से निजी प्रतिस्पर्धा के मुकाबले इन पीएसयू फर्म्स के मार्जिन में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हो रहा है।

तिमाही नतीजों और बैलेंस शीट में सुधार की मजबूत संभावनाएं

इस ताजा ऑर्डर के बाद बाजार के जानकारों का ध्यान अब कंपनी की बैलेंस शीट और वित्तीय आंकड़ों की ओर गया है। पिछले वित्त वर्ष की तिमाहियों में कंपनी ने अपनी लागत नियंत्रण और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार दिखाया था। अब जब कंपनी की ऑर्डर बुक में एक और मजबूत परियोजना जुड़ गई है, तो आगामी तिमाहियों में टॉपलाइन और बॉटमलाइन दोनों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो काफी संतुलित है और इस पर किसी बड़े कर्ज का बोझ नहीं है, जो निवेशकों के विश्वास को और बढ़ाता है। कैश फ्लो की निरंतरता और समय पर बिलिंग के कारण कंपनी के पास वर्किंग कैपिटल की कोई कमी नहीं है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स को बिना किसी रुकावट के पूरा करना आसान हो जाता है।

तकनीकी चार्ट पर बना ब्रेकआउट और वॉल्यूम का जबर्दस्त सपोर्ट

टेक्निकल एनालिसिस के नजरिए से देखें तो यह शेयर लंबे समय से एक सीमित दायरे में कंसोलिडेट कर रहा था। ₹98 से ₹102 का स्तर इसके लिए एक मजबूत सपोर्ट जोन बनकर उभरा था, जिसे शेयर ने कई बार टेस्ट किया लेकिन नीचे की ओर नहीं तोड़ा। अब ₹105 के स्तर को पार करते ही शेयर ने अपने 50-दिवसीय और 100-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए के ऊपर निर्णायक क्लोजिंग देने के संकेत दिए हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई भी अब न्यूट्रल जोन से निकलकर बुलिश टेरिटरी की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। चार्ट्स पर हायर हाई और हायर लो का पैटर्न बन रहा है, जिसे मार्केट एक्सपर्ट्स एक क्लासिक ट्रेंड रिवर्सल का संकेत मान रहे हैं। ट्रेडिंग वॉल्यूम में अचानक 3 से 4 गुना का उछाल यह साबित करता है कि बड़े खिलाड़ी इस स्तर पर धीरे-धीरे एक्यूमुलेशन कर रहे हैं।

ब्रोकरेज हाउस की राय और संभावित शेयर प्राइस टारगेट

बाजार के दिग्गज ब्रोकरेज हाउस और स्वतंत्र रिसर्च एनालिस्ट्स ने इस नए घटनाक्रम के बाद काउंटर पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। कई प्रमुख मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि यदि शेयर ₹108 के अहम रेजिस्टेंस को पार करके वहां टिक जाता है, तो शॉर्ट टर्म में ही यह ₹118 से ₹125 के स्तर तक पहुंच सकता है। मध्यम से लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने वालों के लिए कंपनी के फंडामेंटल्स बेहद आकर्षक नजर आ रहे हैं, क्योंकि ₹105 के मौजूदा भाव पर इसका प्राइस-टू-अर्निंग यानी पीई मल्टीपल अपने सेक्टर के औसत से काफी कम है। विश्लेषक यह भी रेखांकित करते हैं कि डिविडेंड यील्ड के मामले में भी ऐसी सरकारी कंपनियां निवेशकों को नियमित पैसिव इनकम देती रही हैं, जिससे गिरावट के समय भी डाउनसाइड रिस्क काफी सीमित हो जाता है।

नए निवेशकों के लिए जोखिम और निवेश की सही रणनीति

भले ही शेयर में सकारात्मक रुझान है और नया ऑर्डर मिलने से भविष्य की आय सुरक्षित नजर आ रही है, लेकिन शेयर बाजार में निवेश हमेशा जोखिमों के अधीन होता है। खुदरा निवेशकों को किसी भी शेयर में केवल खबरों के आधार पर अंधाधुंध पैसा लगाने से बचना चाहिए। मौजूदा स्तरों पर निवेश की योजना बना रहे ट्रेडर्स को सख्त स्टॉपलॉस का पालन करना चाहिए, विशेष रूप से ₹99-₹100 के अहम सपोर्ट लेवल को ध्यान में रखते हुए। वहीं लंबी अवधि के पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी यानी बाय ऑन डिप्स की रणनीति अपनाना अधिक समझदारी भरा फैसला साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में कंपनी की जनरल मीटिंग और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की वास्तविक प्रगति पर नजर रखना जरूरी रहेगा।