'SIR अवैध, CEC इस्तीफा दें'; राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका
संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने चुनाव आयोग (EC), मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ औपचारिक कानूनी जंग छेड़ दी है। दिल्ली की सड़कों पर 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' के दौरान पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद विपक्षी नेताओं की लीगल टीम ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दाखिल कर दी है। इस याचिका में कुल 11 विपक्षी नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें राहुल गांधी प्रमुख याचिकाकर्ता हैं। याचिका में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को अवैध घोषित कर उस पर तत्काल रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की गई है।
सीजेआई की सलाह के बाद प्रशासनिक ज्ञापन की जगह कानूनी याचिका
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था, ताकि वे चुनाव आयोग के खिलाफ एक प्रशासनिक ज्ञापन सौंप सकें। हालांकि, सीजेआई ने 'शक्तियों के पृथक्करण' के सिद्धांत का हवाला देते हुए प्रशासनिक स्तर पर मिलने से इनकार कर दिया था और नेताओं को सुझाव दिया था कि वे अदालत के न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हुए औपचारिक याचिका दाखिल करें। सीजेआई की इसी सलाह के आधार पर वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के मार्गदर्शन में लीगल टीम ने यह याचिका तैयार कर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में विधिवत रूप से पंजीकृत कराई।
याचिका पर हस्ताक्षर करने वाले 11 विपक्षी नेता
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस संयुक्त याचिका में विपक्षी गठबंधन के 11 प्रमुख नेताओं के नाम और हस्ताक्षर शामिल हैं:
-
राहुल गांधी – नेता प्रतिपक्ष एवं सांसद, कांग्रेस (प्रमुख याचिकाकर्ता)
-
मल्लिकार्जुन खरगे – राष्ट्रीय अध्यक्ष, कांग्रेस
-
अखिलेश यादव – राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी (SP)
-
तेजस्वी प्रसाद यादव – नेता प्रतिपक्ष (बिहार), राष्ट्रीय जनता दल (RJD)
-
सौगत राय – वरिष्ठ सांसद, तृणमूल कांग्रेस (TMC)
-
संजय राउत – सांसद, शिवसेना (UBT)
-
सुप्रिया सुले – सांसद, एनसीपी (शरदचंद्र पवार)
-
एम. ए. बेबी – पोलित ब्यूरो सदस्य, सीपीआई (एम)
-
डी. राजा – महासचिव, सीपीआई
-
महुआ माजी – सांसद, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
-
ई. टी. मोहम्मद बशीर – सांसद, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML)
नोट: इस संयुक्त याचिका में आम आदमी पार्टी (AAP) का कोई भी प्रतिनिधि हस्ताक्षरकर्ता के रूप में शामिल नहीं है। याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिका की मुख्य मांगें: एसआईआर पर रोक और सीईसी का इस्तीफा
विपक्ष की ओर से दायर याचिका में मुख्य रूप से तीन बड़े बिंदुओं पर अदालत से अंतरिम और अंतिम राहत की गुहार लगाई गई है:
-
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर तत्काल रोक: याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के जरिए बड़े पैमाने पर वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। इसे 'वोट चोरी' का सुनियोजित तंत्र बताते हुए पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक और अवैध घोषित करने की मांग की गई है।
-
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना: याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक गारंटी पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, इसलिए उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
-
नागरिक अधिकारों की बहाली: दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगी रोक, लाठीचार्ज और छात्र-नेताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार की सुरक्षा की मांग की गई है।
'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' और बाराखंभा रोड पर टकराव
याचिका दाखिल करने से पहले सोमवार दोपहर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से सुप्रीम कोर्ट तक 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' निकाला था। बसों से बाराखंभा रोड पहुंचने के बाद जब नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल बढ़ना शुरू किया, तो दिल्ली पुलिस ने भगवान दास रोड पर भारी बैरिकेडिंग लगाकर मार्च को रोक दिया। इस दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव सहित कई नेता वाहनों की छत पर चढ़कर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते नजर आए। इसके तुरंत बाद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे लीगल टीम के साथ शीर्ष अदालत पहुंचे और औपचारिक रूप से याचिका दायर की।
राजनीतिक बयानबाजी और सुप्रीम कोर्ट में आगामी सुनवाई
याचिका दाखिल करने के बाद प्रेस वार्ता में राहुल गांधी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि विपक्ष की यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र को बचाने की है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष (बीजेपी) ने विपक्ष के इस कदम को अदालतों पर दबाव बनाने की 'राजनीतिक नौटंकी' करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है, जहां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर की संवैधानिक वैधता पर देश की सबसे बड़ी अदालत अपना रुख तय करेगी।