इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और CNG कमर्शियल वाहनों के मालिकों की हो गई बल्ले-बल्ले, सरकार ने गाड़ी की उम्र सीमा 5 साल बढ़ाने और 20 साल के रोड टैक्स व परमिट को लेकर तैयार किया बड़ा मास्टरप्लान
भारतीय परिवहन और ऑटोमोबाइल सेक्टर में प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) हरित ईंधनों को तेजी से बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। यदि आप भी कमर्शियल वाहन के मालिक हैं और पर्यावरण को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक (EV), हाइड्रोजन या सीएनजी (CNG) गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान ले आएगी क्योंकि सरकार ने इन वाहनों की आयु सीमा सीधे 5 साल तक बढ़ाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा लाए गए इस नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन से देश भर के लाखों ट्रांसपोर्टर्स, फ्लीट ओनर्स और कमर्शियल वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलने वाली है, जिससे वे अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल लंबे समय तक बिना किसी कानूनी अड़चन के कर सकेंगे। इस नए बदलाव के तहत न केवल गाड़ियों की सड़कों पर दौड़ने की उम्र बढ़ेगी, बल्कि नेशनल परमिट और रोड टैक्स से जुड़े नियमों को भी पूरी तरह से आसान और पारदर्शी बनाने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है, आइए इस पूरी रिपोर्ट के जरिए समझते हैं कि सरकार के इस फैसले से वाहन मालिकों को क्या-क्या बड़े फायदे मिलने वाले हैं और इसका ऑटोमोबाइल बाजार पर क्या गहरा असर पड़ेगा।
इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और CNG कमर्शियल वाहनों की आयु सीमा में 5 साल की बड़ी बढ़ोतरी
केंद्र सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार, देश में पारंपरिक डीजल और पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले पर्यावरण को स्वच्छ रखने वाले ग्रीन एनर्जी कमर्शियल वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। वर्तमान नियमों के तहत देश में विभिन्न श्रेणियों के व्यावसायिक वाहनों के लिए अधिकतम परिचालन आयु सीमा 12 या 15 वर्ष तय की गई थी, जिसके पूरा होने के बाद गाड़ियों को अनिवार्य रूप से सड़कों से हटाना पड़ता था। लेकिन अब सड़क मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (CMVR) में संशोधन करते हुए प्रस्ताव रखा है कि बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहनों और प्राकृतिक गैस यानी CNG से चलने वाले नेशनल परमिट कमर्शियल वाहनों की उम्र सीमा में पूरे 5 साल की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर दी जाए। इस नए संशोधन के लागू होने के बाद जिन वाहनों की अधिकतम आयु सीमा पहले 12 साल हुआ करती थी, उसे बढ़ाकर अब 17 साल कर दिया जाएगा, और जिनकी सीमा 15 साल थी, उसे बढ़ाकर सीधे 20 साल तक किया जा रहा है। सरकार के इस कदम से ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को अपनी गाड़ियों पर किए गए भारी-भरकम निवेश को वसूलने का पूरा मौका मिलेगा और वे कम लागत में अधिक समय तक अपने व्यावसायिक संचालन को सुचारू रख सकेंगे।
नेशनल परमिट के झंझट से मुक्ति, अब एक साथ मिलेगा 5 साल का अधिकार
कमर्शियल वाहनों के संचालन में सबसे बड़ी व्यावहारिक समस्या हर साल नेशनल परमिट (National Permit) का नवीनीकरण करवाने और उसके लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की होती थी। इस परेशानी को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सरकार ने एक और बहुत बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। नए ड्राफ्ट नियमों के तहत अब वाहन चालकों को हर साल परमिट रिन्यू करवाने की अनिवार्यता से मुक्ति मिल जाएगी, और वे एक ही बार में पूरे 5 साल के लिए नेशनल परमिट प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए सरकार ने एकमुश्त भुगतान का विकल्प देते हुए सालाना 16,500 रुपये की निर्धारित दर से 5 साल की कुल फीस यानी 82,500 रुपये एक साथ जमा करने का प्रावधान प्रस्तावित किया है। इस सुविधा के शुरू हो जाने से ट्रांसपोर्टर्स का प्रशासनिक कामकाज का बोझ बहुत हद तक कम हो जाएगा और वे बिना किसी रुकावट के देश के एक राज्य से दूसरे राज्य तक अपने वाहनों का आवागमन सुनिश्चित कर सकेंगे। समय और कागजी कार्रवाई की यह बचत कमर्शियल सेक्टर के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी।
20 साल के रोड टैक्स और अनुपालन को लेकर क्या है सरकार की मास्टर योजना?
जैसे-जैसे सरकार कमर्शियल वाहनों की परिचालन आयु सीमा को बढ़ाकर 17 से 20 साल तक कर रही है और 5 साल का इकट्ठा नेशनल परमिट देने की सुविधा ला रही है, वैसे-वैसे टैक्स और अनुपालन (Compliance) से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। वाहनों के लंबे जीवनकाल को देखते हुए एकमुश्त रोड टैक्स या लंबी अवधि के वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी उद्योग जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं, ताकि वाहन मालिकों को हर साल टैक्स जमा करने के झंझट से बचाया जा सके। हालांकि, सड़क मंत्रालय के इस ड्राफ्ट मसौदे पर देश के आम नागरिक, वाहन मालिक, ट्रांसपोर्ट यूनियंस और ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स से अगले 30 दिनों के भीतर आधिकारिक तौर पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। इन सभी प्रतिक्रियाओं की गहन समीक्षा करने के बाद जब इस प्रस्ताव को अंतिम रूप से गजट नोटिफिकेशन में प्रकाशित कर दिया जाएगा, तब ये नए और आधुनिक नियम देश भर में पूरी तरह से कानूनी रूप से प्रभावी हो जाएंगे।
देश के ग्रीन एनर्जी विजन और इकोनॉमी को मिलेगा अभूतपूर्व बूस्ट
सरकार का यह दूरदर्शी कदम देश में 'जीरो एमिशन' और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। अभी तक कई ट्रांसपोर्टर्स ऊंची शुरुआती लागत और कम उम्र सीमा के डर से इलेक्ट्रिक या सीएनजी कमर्शियल गाड़ियां खरीदने से कतराते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि कम समय में गाड़ी बेकार हो जाने से उनका निवेश डूब जाएगा। लेकिन अब आयु सीमा 5 साल बढ़ने से निवेशकों और ट्रांसपोर्ट मालिकों का भरोसा इस ग्रीन टेक्नोलॉजी पर और अधिक मजबूत होगा। जब देश में अधिक से अधिक पर्यावरण-अनुकूल वाहन लंबी अवधि तक सड़कों पर दौड़ेंगे, तो कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कार्यकुशलता बढ़ने से देश की पूरी अर्थव्यवस्था को एक नया आर्थिक बूस्ट मिलेगा और आम उपभोक्ताओं तक सामान पहुँचाने की लागत में भी कमी आएगी।