बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल ₹167.35 प्रति लीटर, तो E10 पेट्रोल का क्या होगा रेट? समझें गणित और भारत में फ्यूल प्राइसिंग का पूरा नियम
भारत में कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol) का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है। यदि शुद्ध यानी बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल (E0) का खुदरा मूल्य ₹167.35 प्रति लीटर माना जाए, तो इसमें 10 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने पर तैयार होने वाले E10 पेट्रोल की कीमत में स्पष्ट रूप से कमी दर्ज होगी।
ईंधन का खुदरा मूल्य तय करने में शुद्ध पेट्रोल और एथेनॉल के खरीद मूल्य के भारित औसत (Weighted Average) का उपयोग किया जाता है।
E10 पेट्रोल की कीमत का गणितीय कैलकुलेशन
E10 फ्यूल में 90% शुद्ध पेट्रोल और 10% बायो-एथेनॉल का मिश्रण होता है:
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शुद्ध पेट्रोल (E0) का भाव: ₹167.35 प्रति लीटर
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90% पेट्रोल का हिस्सा: 0.90 × 167.35 = ₹150.615
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एथेनॉल की अनुमानित लागत: भारत में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा एथेनॉल की खरीद दर लगभग ₹60 से ₹65 प्रति लीटर (औसतन ₹62.50/लीटर) रहती है।
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10% एथेनॉल का हिस्सा: 0.10 × 62.50 = ₹6.25
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E10 पेट्रोल का अनुमानित कुल रेट: ₹150.615 + ₹6.25 = लगभग ₹156.86 प्रति लीटर
यदि एथेनॉल की लागत को ₹0 (या नगण्य) मानकर केवल 10% की सीधी छूट के सिद्धांत से देखा जाए, तो यह दर ₹150.61 प्रति लीटर तक आ सकती है, लेकिन वास्तविक खरीद लागत जोड़ने पर E10 की कीमत लगभग ₹156.80 से ₹157.00 प्रति लीटर के दायरे में आएगी। यानी प्रति लीटर सीधे लगभग ₹10 से ₹11 तक की बचत होगी।
भारत में पेट्रोल की खुदरा कीमत कैसे होती है तय?
पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल की अंतिम कीमत केवल कच्चे तेल या ब्लेंडिंग अनुपात पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें कई कर और मार्जिन जुड़े होते हैं:
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एथेनॉल खरीद मूल्य: सरकार विभिन्न स्रोतों (गन्ना, मक्का, चावल) से उत्पादित एथेनॉल के लिए अलग-अलग खरीद मूल्य तय करती है।
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केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty): केंद्र सरकार द्वारा प्रति लीटर फ्यूल पर निश्चित उत्पाद शुल्क लगाया जाता है।
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डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप संचालकों को प्रति लीटर मिलने वाला तय मार्जिन।
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राज्य वैट (VAT/Cess): हर राज्य अपनी स्थानीय नीतियों के अनुसार पेट्रोल पर मूल्य वर्धित कर (VAT) लगाता है।
ब्लेंडिंग का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा की बचत करना और उपभोक्ताओं को संभावित मूल्य उतार-चढ़ाव से राहत देना है।