PM Modi Birthday: वेतन आयोग से लेकर UPS पेंशन तक; मोदी सरकार के इन 5 बड़े फैसलों ने बदल दी केंद्रीय कर्मचारियों की तकदीर

PM Modi Birthday: वेतन आयोग से लेकर UPS पेंशन तक; मोदी सरकार के इन 5 बड़े फैसलों ने बदल दी केंद्रीय कर्मचारियों की तकदीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर जहां देश भर में विभिन्न विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा हो रही है, वहीं पिछले एक दशक में केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हित में लिए गए ऐतिहासिक फैसलों की चर्चा भी जोरों पर है। भारत में लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख से अधिक पेंशनर्स हैं, जो देश के प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ माने जाते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार ने न केवल सेवा शर्तों को आधुनिक और पारदर्शी बनाया, बल्कि वेतनमान, भत्तों, ग्रेच्युटी सीमा और सामाजिक सुरक्षा (पेंशन) को लेकर कई ऐसे बड़े और नीतिगत कदम उठाए, जिन्होंने कर्मचारियों के जीवन स्तर और वित्तीय स्थिरता को नई दिशा दी है।

वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से लेकर बहुप्रतीक्षित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की मंजूरी तक, आइए जानते हैं मोदी सरकार के वे 5 बड़े फैसले जिन्होंने केंद्रीय कर्मचारियों की तकदीर बदल दी:

1. 7वां वेतन आयोग लागू करना और न्यूनतम वेतन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

साल 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ा प्रशासनिक कार्य 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (7th Pay Commission) की रिपोर्ट को अमल में लाना था।

  • वेतन और फिटमेंट फैक्टर: सरकार ने जस्टिस एके माथुर समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया। इसके परिणामस्वरूप न्यूनतम मूल वेतन को ₹7,000 से सीधे बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह कर दिया गया, जो 2.5 गुना से अधिक की सीधी छलांग थी।

  • पे-मैट्रिक्स व्यवस्था: पुरानी और जटिल पे-बैंड/ग्रेड-पे प्रणाली को समाप्त कर एक पारदर्शी 'पे-मैट्रिक्स' (Pay Matrix) लागू किया गया, जिससे कर्मचारियों के लिए अपने भविष्य के प्रमोशन और वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का सटीक आकलन करना आसान हो गया।

2. यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS): पुरानी और नई पेंशन का सुनहरा समन्वय

कर्मचारियों की सबसे पुरानी और मुखर मांग 'ओल्ड पेंशन स्कीम' (OPS) की बहाली को लेकर थी, जिसे साल 2004 में खत्म कर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लाया गया था। कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए मोदी कैबिनेट ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' (Unified Pension Scheme - UPS) को मंजूरी दी।

  • सुनिश्चित 50% पेंशन: 25 साल की न्यूनतम सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति से पहले के आखिरी 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50% सुनिश्चित पेंशन के रूप में देने की गारंटी दी गई।

  • पारिवारिक पेंशन और डीए रिलीफ: पेंशनभोगी के निधन पर उसकी पेंशन का 60% पारिवारिक पेंशन के रूप में सुरक्षित किया गया। साथ ही, महंगाई से सुरक्षा के लिए इसे महंगाई राहत (DR) से भी जोड़ा गया। इसने कर्मचारियों को बिना सरकारी खजाने पर असहनीय बोझ डाले सुनिश्चित वित्तीय सुरक्षा प्रदान की।

3. महंगाई भत्ते (DA/DR) में समयबद्ध बढ़ोतरी और साल में दो बार संशोधन

महंगाई की मार से कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को बचाने के लिए मोदी सरकार ने महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) की समीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नियमित बनाया।

  • औद्योगिक श्रमिकों के सूचकांक (AICPI-IW) से जुड़ाव: सरकार ने हर साल जनवरी और जुलाई में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर डीए में 3 से 4 प्रतिशत की नियमित बढ़ोतरी का फॉर्मूला सख्ती से लागू रखा।

  • कोविड के बाद तेज बहाली: महामारी के दौरान रोके गए डीए को बाद में बहाल कर कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को गिरने नहीं दिया गया। मौजूदा समय में महंगाई भत्ता 50% का अहम आंकड़ा छू चुका है, जिसके चलते कई अन्य संबद्ध भत्ते भी स्वतः बढ़ गए हैं।

4. टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख (और अब ₹25 लाख)

रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को मिलने वाली ग्रेच्युटी पर सरकार ने बड़ा और दीर्घकालिक टैक्स रिलीफ दिया।

  • दोगुनी सीमा: 7वें वेतन आयोग के लागू होने के साथ ही मोदी सरकार ने पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट में संशोधन करते हुए कर-मुक्त (Tax-Free) ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹20 लाख कर दिया था।

  • डीए 50% होने पर ₹25 लाख का लाभ: नियमों के तहत जब महंगाई भत्ता 50% के स्तर पर पहुंचा, तो ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को और बढ़ाकर ₹25 लाख कर दिया गया। इस फैसले ने दशकों तक देश सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय भारी वित्तीय राहत प्रदान की।

5. डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाण), कैडर रिस्ट्रक्चरिंग और लीव रिफॉर्म्स

वेतन और पेंशन के अलावा कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance) और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए आधुनिक सुधार किए गए:

  • बायोमेट्रिक 'जीवन प्रमाण' पत्र: बुजुर्ग और अस्वस्थ पेंशनर्स को हर साल नवंबर में बैंक या कोषागार जाकर घंटों कतार में खड़े होने की मजबूरी से मुक्ति दिलाते हुए आधार-आधारित 'डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट' और 'फेस ऑथेंटिकेशन' सुविधा शुरू की गई, जिससे पेंशनभोगी घर बैठे अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं।

  • महिलाओं और एकल पिताओं के लिए लीव रिफॉर्म्स: महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश को 180 दिन करने के साथ-साथ 'चाइल्ड केयर लीव' (CCL) के नियमों को उदार बनाया गया। इसके अतिरिक्त, एकल पुरुष माता-पिता (विधुर या तलाकशुदा) को भी 730 दिनों की चाइल्ड केयर लीव का अधिकार दिया गया।

  • मिशन कर्मयोगी: सरकारी कर्मचारियों को केवल नियमों में बंधा बाबू बनाने के बजाय नागरिक-केंद्रित सेवा प्रदाता बनाने के लिए 'मिशन कर्मयोगी' के तहत राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया गया।