पोस्ट ऑफिस ने बदले PPF और सुकन्या समृद्धि के अहम नियम, अनियमित खातों पर सीधा असर

पोस्ट ऑफिस ने बदले PPF और सुकन्या समृद्धि के अहम नियम, अनियमित खातों पर सीधा असर

डाकघर की बचत योजनाओं में निवेश करने वाले करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों और वेतनभोगी निवेशकों के लिए डाक विभाग और वित्त मंत्रालय ने नियमों में बड़ा फेरबदल किया है। सरकार ने पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी पीपीएफ (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), नेशनल सेविंग्स स्कीम (NSS) और अन्य लघु बचत योजनाओं के संचालन से जुड़े दिशानिर्देशों को कड़ा कर दिया है। विभाग की ओर से जारी आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करके खोले गए सभी अनियमित (Irregular) खातों को नए नियमों के दायरे में लाया गया है। यदि खाताधारकों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन खातों को नियमित नहीं कराया, तो उन्हें ब्याज का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है या उनके खाते पूरी तरह फ्रीज किए जा सकते हैं।

नाबालिग के नाम खुले PPF खातों पर अब क्या नियम है?

नए प्रावधानों के तहत किसी नाबालिग यानी माइनर के नाम पर खोले गए पीपीएफ खाते के नियमों में सबसे बड़ा बदलाव किया गया है। अब ऐसे खातों पर तब तक केवल पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट (POSA) के बराबर साधारण ब्याज मिलेगा, जब तक कि बच्चा 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेता। जैसे ही संबंधित खाताधारक बालिग हो जाएगा, उस तारीख से उस खाते पर लागू पीपीएफ की पूर्ण ब्याज दर मिलने लगेगी। इसके साथ ही इस खाते की 15 साल की मैच्योरिटी अवधि की गिनती भी उसी दिन से शुरू मानी जाएगी जिस दिन खाताधारक 18 वर्ष का होगा, न कि उस दिन से जब खाता मूल रूप से खोला गया था।

एक से अधिक PPF खाते होने पर लगेगा झटका

पोस्ट ऑफिस के सख्त दिशा-निर्देशों के मुताबिक, किसी भी एक व्यक्ति के नाम पर केवल एक ही एक्टिव पीपीएफ खाता मान्य है। यदि किसी निवेशक ने अनजाने में या जानबूझकर दो या उससे अधिक पीपीएफ खाते खोल रखे हैं, तो विभाग प्राथमिक खाते को छोड़कर बाकी खातों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। प्राथमिक खाते में वार्षिक जमा सीमा (अधिकतम ₹1.5 लाख) के भीतर की राशि पर ही निर्धारित पीपीएफ ब्याज दिया जाएगा। दूसरे खाते की शेष अतिरिक्त राशि को बिना किसी ब्याज के निवेशक को वापस लौटा दिया जाएगा। यदि किसी निवेशक के पास दो से अधिक खाते हैं, तो उन पर शून्य प्रतिशत ब्याज दर लागू होगी।

दादा-दादी द्वारा खोले गए सुकन्या समृद्धि खातों पर नया फैसला

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) के नियमों में भी कानूनी अभिभावक से संबंधित स्पष्टता लाई गई है। नए निर्देशों के अनुसार, यदि किसी बच्ची का सुकन्या खाता उसके माता-पिता के अलावा दादा-दादी या नाना-नानी द्वारा खोला गया था, तो अब उस खाते का संरक्षक अधिकार (Guardianship) अनिवार्य रूप से जीवित माता-पिता को ट्रांसफर कराना होगा। यदि माता-पिता जीवित नहीं हैं, तभी कानूनी तौर पर नियुक्त अभिभावक ही खाते का संचालन जारी रख सकेंगे। अभिभावक का विवरण अपडेट न कराने की स्थिति में खाते को गैर-मान्य श्रेणी में डालकर उसके संचालन पर रोक लगाई जा सकती है।

एनआरआई और राष्ट्रीय बचत योजना (NSS) के लिए दिशा-निर्देश

जो भारतीय नागरिक अब अनिवासी भारतीय (NRI) बन चुके हैं और उनके पीपीएफ खाते भारत में सक्रिय हैं, उनके लिए भी स्थिति स्पष्ट की गई है। यदि किसी खाताधारक का आवासीय दर्जा बदल गया है, तो उसे रेजिडेंसी बदलने की तारीख तक ही पीपीएफ ब्याज का लाभ मिलेगा। उसके बाद की अवधि के लिए केवल पोस्ट ऑफिस बचत खाते के बराबर ब्याज देय होगा। वहीं, नेशनल सेविंग्स स्कीम-87 (NSS-87) के तहत खुले पुराने खातों को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया गया है, जहां तय सीमा से अधिक खातों पर तुरंत प्रभाव से ब्याज बंद करने और मूलधन वापस लेने का आदेश दिया गया है।

दिल्ली, मुंबई से लेकर गांव-देहात तक के निवेशकों पर असर

डाक विभाग का यह कदम पूरे देश में एक समान रूप से लागू किया गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत सभी राज्यों के शहरी व ग्रामीण डाकघरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने रिकॉर्ड का मिलान करें। गांव और छोटे कस्बों में कई बार जानकारी के अभाव में लोग एक से ज्यादा खाते खोल लेते थे या नियमों के विपरीत अभिभावक बन जाते थे। ऐसे सभी खाताधारकों को अपने नजदीकी मुख्य डाकघर में जाकर पैन कार्ड, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और संबंधित दस्तावेजों के साथ अपने खाते का सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

निवेशकों को तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?

यदि आपके परिवार में भी किसी सदस्य का पीपीएफ या सुकन्या समृद्धि खाता नियमों के विपरीत चल रहा है, तो वित्तीय नुकसान से बचने के लिए तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। सबसे पहले अपने पासबुक और खाता खोलने के फॉर्म की जांच करें कि संरक्षक के कॉलम में किसका नाम दर्ज है। इसके बाद निकटतम डाकघर शाखा में जाकर आवश्यक केवाईसी (KYC) दस्तावेज और निर्धारित फॉर्म भरकर अपने खाते को नियमित कराने का आवेदन दें। समय रहते नियमितीकरण कराने से खाते में जमा पूंजी सुरक्षित रहेगी और भविष्य में मैच्योरिटी के समय किसी भी तरह की कानूनी या तकनीकी रुकावट का सामना नहीं करना पड़ेगा।