टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की होड़ पर MCC का बड़ा बयान, कहा- हालात चिंताजनक पर खिलाड़ी दोषी नहीं

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की होड़ पर MCC का बड़ा बयान, कहा- हालात चिंताजनक पर खिलाड़ी दोषी नहीं

विश्व क्रिकेट में खेल के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित प्रारूप टेस्ट क्रिकेट के अस्तित्व को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है। दुनिया भर के युवा और स्टार खिलाड़ियों द्वारा लाल गेंद के क्रिकेट को छोड़कर आकर्षक टी20 फ्रेंचाइजी लीग्स को प्राथमिकता देने और समय से पहले टेस्ट से संन्यास लेने के मामलों पर क्रिकेट के नियम बनाने वाली ऐतिहासिक संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) ने बेहद चौंकाने वाला और स्पष्ट रुख अपनाया है। एमसीसी की वर्ल्ड क्रिकेट कमेटी ने कहा है कि जिस रफ्तार से दुनिया भर के प्रमुख खिलाड़ी टेस्ट फॉर्मेट से दूरी बना रहे हैं, वह बेहद चिंताजनक है, लेकिन इसके लिए खिलाड़ियों को स्वार्थी ठहराना या दोष देना सरासर गलत है।

खिलाड़ियों को दोष नहीं दिया जा सकता: MCC का दो टूक रुख

एमसीसी की शक्तिशाली क्रिकेट समिति ने अपनी हालिया समीक्षा बैठक के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वास्तविकताओं पर खुलकर बात की। समिति ने साफ किया कि आज एक पेशेवर क्रिकेटर का करियर बेहद सीमित समय का होता है और उसे अपने भविष्य व परिवार की वित्तीय सुरक्षा के बारे में सोचना पड़ता है। जब फ्रेंचाइजी क्रिकेट किसी खिलाड़ी को दो महीने में इतना पैसा दे रहा है जो उसे अपने राष्ट्रीय बोर्ड के लिए कई साल टेस्ट खेलने पर भी नहीं मिल सकता, तो खिलाड़ी का लीग क्रिकेट की ओर झुकना पूरी तरह व्यावहारिक है। एमसीसी का मानना है कि आर्थिक असमानता और अत्यधिक व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर ही इस समस्या की असली जड़ है, न कि खिलाड़ियों की निष्ठा।

टेस्ट क्रिकेट खेलने के बदले मिलने वाले वेतन में भारी खाई

टेस्ट क्रिकेट के सामने सबसे बड़ा संकट दुनिया के विभिन्न क्रिकेट बोर्डों के बीच मौजूद विशाल आर्थिक असमानता का है। जहां भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड (Big 3) के खिलाड़ियों को टेस्ट मैच फीस और केंद्रीय अनुबंध के रूप में बेहद आकर्षक भुगतान मिलता है, वहीं वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान जैसे बोर्ड्स अपने खिलाड़ियों को उस स्तर का पारिश्रमिक देने में असमर्थ हैं। नतीजा यह हो रहा है कि इन देशों के शीर्ष तेज गेंदबाज और आक्रामक बल्लेबाज अपने करियर के शीर्ष पर पहुंचते ही टेस्ट से संन्यास ले रहे हैं ताकि वे पूरे साल दुनिया भर की टी20 और टी10 लीग्स में खेल सकें।

गेंदबाजों के वर्कलोड और फिटनेस की दोहरी मार

टेस्ट क्रिकेट की शारीरिक मांग अन्य प्रारूपों की तुलना में कहीं अधिक कठिन है। पांच दिनों तक मैदान पर लगातार कड़ी मेहनत करना और तेज गेंदबाजों के लिए रोज 15 से 20 ओवर फेंकना उनके शरीर को बुरी तरह निचोड़ देता है। बढ़ते वर्कलोड और बार-बार होने वाली चोटों के कारण कई प्रीमियम तेज गेंदबाज अपनी फिटनेस को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए टेस्ट क्रिकेट का त्याग कर रहे हैं। एमसीसी ने रेखांकित किया कि जब तक खिलाड़ियों को टेस्ट खेलने के लिए शारीरिक आराम और पर्याप्त रिकवरी का समय नहीं मिलेगा, तब तक वे कम मेहनत और ज्यादा कमाई वाले 20-20 ओवर के खेल को ही तरजीह देंगे।

ICC और वैश्विक टेस्ट फंड बनाने की सिफारिश

इस विकट संकट से लाल गेंद के क्रिकेट को बचाने के लिए एमसीसी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के सामने एक मजबूत प्रस्ताव रखा है। समिति ने सिफारिश की है कि आईसीसी को एक समर्पित 'ग्लोबल टेस्ट मैच फंड' (Global Test Fund) बनाना चाहिए। इस फंड का मुख्य उद्देश्य उन क्रिकेट बोर्ड्स को आर्थिक सहायता प्रदान करना होगा जिनकी वित्तीय स्थिति कमजोर है, ताकि वे अपने घरेलू टेस्ट खिलाड़ियों को वैश्विक बाजार के मुकाबले आकर्षक मैच फीस दे सकें। इसके अलावा, एमसीसी ने भविष्य दौरा कार्यक्रम (FTP) को तर्कसंगत बनाने की अपील की है ताकि अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों और टी20 लीग्स के बीच कोई सीधा टकराव न हो।

टेस्ट के अस्तित्व को बचाने के लिए अब ठोस कदमों की दरकार

एमसीसी ने चेतावनी दी है कि यदि केवल बयानबाजी होती रही और जमीनी स्तर पर वेतन विषमता व कैलेंडर ओवरलैपिंग को नहीं सुधारा गया, तो आने वाले कुछ वर्षों में टेस्ट क्रिकेट केवल 3 या 4 अमीर देशों के बीच की रस्म बनकर रह जाएगा। क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि लाल गेंद का खेल ही किसी खिलाड़ी की वास्तविक तकनीक और मानसिक क्षमता की अंतिम परीक्षा होता है। संस्था ने सभी सदस्य देशों से अपील की है कि वे अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करें और खिलाड़ियों पर आरोप मढ़ने के बजाय ऐसी पारदर्शी प्रणाली बनाएं जिसमें टेस्ट क्रिकेट खेलना वित्तीय और करियर दोनों दृष्टिकोण से सबसे आकर्षक विकल्प बन सके।