20 साल पुराने वर्ल्ड बैंक रोड प्रोजेक्ट में फंसे CEC ज्ञानेश कुमार, केरल सरकार ने दिए विजिलेंस जांच के आदेश
केरल सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ करीब 20 साल पुराने मामले में विजिलेंस जांच के आदेश दिए जाने के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। 1988 बैच के केरल कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) की यह जांच विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित केरल राज्य परिवहन परियोजना (KSTP) में कथित वित्तीय अनियमितताओं और एक विदेशी प्रोजेक्ट मैनेजर की आत्महत्या से जुड़ी है। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला द्वारा 4 अक्टूबर को दिए गए इस आदेश ने चुनावी राजनीति और नौकरशाही के गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है।
क्या थी KSTP परियोजना और कैसे भटका पूरा रोडमैप?
केरल के मुख्य राज्य राजमार्गों और प्रमुख जिला सड़कों के आधुनिकीकरण के लिए वर्ष 2002 में ₹1,612 करोड़ की भारी-भरकम लागत से केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) की शुरुआत की गई थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सबसे बड़ा हिस्सा—करीब ₹1,224 करोड़—विश्व बैंक के ऋण सहयोग से तय हुआ था।
योजना के पहले चरण में 254 किलोमीटर लंबी सड़कों (कोटारकड़ा-चेंगनूर, अलाप्पुझा-चंगनासेरी और मुवत्तुपुझा-अंगमाली) का चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण होना था, जबकि दूसरे चरण के लिए 327 किलोमीटर सड़कों का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, समय पर जमीन अधिग्रहण न होने और यूटिलिटी शिफ्टिंग में अत्यधिक देरी के चलते परियोजना का बजट बेकाबू हो गया। दिसंबर 2006 तक आते-आते विश्व बैंक ने परियोजना की धीमी प्रगति को देखते हुए इसे "मध्यम रूप से असंतोषजनक" करार दे दिया। नतीजतन, 2008 में भारी वित्तीय घाटे के चलते राज्य सरकार को दूसरा चरण पूरी तरह रद्द करना पड़ा।
मलेशियन इंजीनियर ली सी बीन की आत्महत्या और सुसाइड नोट का खुलासा
इस प्रोजेक्ट के निर्माण का जिम्मा इंडो-मलेशियन संयुक्त उद्यम कंपनी PATI-BEL को सौंपा गया था। काम में रुकावटों और भारी तनाव के बीच 11 नवंबर 2006 को कंपनी के मुख्य प्रोजेक्ट मैनेजर और 58 वर्षीय मलेशियन सिविल इंजीनियर ली सी बीन ने कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली थी।
जांच और तत्कालीन बयानों के अनुसार, ली सी बीन ने मरने से पहले दो सुसाइड नोट छोड़े थे। इनमें से एक नोट में उस समय केरल के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव रहे ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों का नाम दर्ज था। सुसाइड नोट में गंभीर आरोप लगाए गए थे कि पीडब्ल्यूडी के उच्चाधिकारियों द्वारा ठेकेदार कंपनी के जायज बिल पास करने में जानबूझकर अड़चनें डाली जा रही थीं। साथ ही भारी रिश्वतखोरी और मानसिक उत्पीड़न के कारण काम का संचालन असंभव बना दिया गया था।
2006 की अधूरी जांच और ज्ञानेश कुमार की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति
घटना के तुरंत बाद वर्ष 2006 में तत्कालीन वी. एस. अच्युतानंदन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार ने मामले की प्रारंभिक विजिलेंस जांच शुरू करवाई थी। प्रशासनिक कार्रवाई के तहत ज्ञानेश कुमार को PWD सचिव पद से हटा दिया गया था।
हालांकि, इसके फौरन बाद वे दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर चले गए। कांग्रेस नेता मलयनकीझु वेणुगोपाल और अन्य शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि राजनीतिक दबाव और उच्चस्तरीय हस्तक्षेप के चलते उस समय जांच को बिना किसी तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचे ठंडे बस्ते में दबा दिया गया था। अब करीब दो दशक बाद उसी अधूरी जांच को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
SIR विवाद और देशव्यापी सियासी घमासान के बीच फैसला
यह पुराना विवाद ऐसे नाजुक मोड़ पर दोबारा सतह पर आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर पहले से ही चौतरफा घिरे हुए हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा दर्ज कराई गई लिखित आपत्तियों का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। वहीं, विपक्षी दलों और विभिन्न युवा संगठनों द्वारा देश भर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष रहा है कि पिछले एक वर्ष के दौरान SIR सहित सभी नीतिगत निर्णय पूरे आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
विजिलेंस आदेश पर सियासी दलों का तीखा टकराव
केरल सरकार के इस कदम के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है:
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केरल सरकार (कांग्रेस/UDF): गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने स्पष्ट किया कि कानूनी सलाह और गंभीर औपचारिक शिकायत के आधार पर ही फाइल विजिलेंस डायरेक्टर को भेजी गई है। सरकार इतने गंभीर आरोपों पर आंख मूंदकर नहीं बैठ सकती।
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वाममोर्चा (CPI-M): पूर्व वित्त मंत्री टी. एम. थॉमस इसहाक ने इस जांच का स्वागत करते हुए कहा कि 2006 की पुरानी केस फाइलों की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है ताकि जनता के सामने सच आ सके।
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भारतीय जनता पार्टी (BJP): भाजपा विधायक बी. बी. गोपाकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि यह 20 साल पुराना मामला है जिसमें पूर्व में एलडीएफ और यूडीएफ दोनों सरकारों ने राहत दी थी। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया।
फिलहाल इस विजिलेंस जांच के आदेश पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।