NSE पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के शेयर की दहाड़, 4.5% उछलकर 3,316 रुपये के पार

NSE पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के शेयर की दहाड़, 4.5% उछलकर 3,316 रुपये के पार

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को चौतरफा बिकवाली और वैश्विक दबाव के बावजूद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ट्रेडिंग टर्मिनल पर एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला। एनएसई पर लिस्टेड एशिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज 'बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज' (BSE Ltd) के शेयरों में अचानक तूफानी खरीदारी शुरू हो गई और शेयर 4.5 प्रतिशत से अधिक की छलांग लगाकर 3,316.50 रुपये के नए इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। बाजार के जानकारों और रिटेल निवेशकों के बीच मची इस भारी लिवाली का सीधा कनेक्शन बीएसई के प्रबंध निदेशक (MD) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुंदररामन रामामूर्ति के उस बेबाक बयान से है, जिसमें उन्होंने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित मेगा आईपीओ के बाद बनने वाले ट्रेडिंग समीकरणों पर से पर्दा उठा दिया। रामामूर्ति ने साफ शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा नियामक व्यवस्था (Regulatory Framework) के तहत एनएसई अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों की ट्रेडिंग (Self-Trading) कतई नहीं कर सकता। इस एक बयान ने दलाल स्ट्रीट पर यह भरोसा पुख्ता कर दिया कि जब एनएसई का 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऐतिहासिक आईपीओ बाजार में आएगा, तो उसके शेयरों का पूरा ट्रेडिंग वॉल्यूम और उससे होने वाली अरबों रुपये की कमाई सीधे बीएसई की झोली में गिरेगी।

सुंदररामन रामामूर्ति का वो एक बयान: जिसने बदल दिया दलाल स्ट्रीट का पूरा मूड

गुरुवार को एक प्रमुख कारोबारी चैनल सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत करते हुए बीएसई के प्रमुख सुंदररामन रामामूर्ति ने बाजार में चल रही उस बड़ी अफवाह पर पूर्णविराम लगा दिया, जो पिछले कुछ हफ्तों से बीएसई के निवेशकों के लिए चिंता का सबब बनी हुई थी। बाजार में ऐसी अपुष्ट खबरें और कुछ ब्रोकरेज रिपोर्ट्स तैर रही थीं कि एनएसई जब बीएसई पर लिस्ट होगा, तो उसके तुरंत बाद वह 'परमिटेड टू ट्रेड' (Permitted to Trade) श्रेणी का सहारा लेकर अपने स्वयं के एक्सचेंज पर भी अपने शेयरों की खरीद-फरोख्त शुरू कर सकता है।

रामामूर्ति ने खुलासा किया कि बीएसई की अनुपालन (Compliance) टीम ने इस मुद्दे पर सीधे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा था कि क्या वे अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के साथ सेल्फ-ट्रेडिंग की इजाजत मांगने वाला कोई नया सप्लीमेंट्री दस्तावेज या एडेंडम (Addendum) जोड़ने की योजना बना रहे हैं। रामामूर्ति के अनुसार, एनएसई ने औपचारिक रूप से पुष्टि की है कि मीडिया में चल रही ऐसी खबरें पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक हैं, और एनएसई अपने ऑफर डॉक्यूमेंट के साथ सेल्फ-ट्रेडिंग के लिए कोई भी एडेंडम जारी नहीं करने जा रहा है। इस दो टूक स्पष्टीकरण के बाहर आते ही बाजार ने राहत की सांस ली और जो आशंकाएं बीएसई के फ्यूचर रेवेन्यू पर मंडरा रही थीं, वे एक झटके में काफूर हो गईं।

2017 की नजीर और सेबी का सख्त कानून: क्यों नहीं हो सकती सेल्फ-लिस्टिंग?

सुंदररामन रामामूर्ति ने अपने बयान में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के कड़े ऐतिहासिक नियमों और नजीर का हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2017 में जब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने अपना ऐतिहासिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) पेश किया था, तब उसने भी अपने ही एक्सचेंज पर खुद को लिस्ट करने और अपने ही प्लेटफॉर्म पर शेयरों की ट्रेडिंग करने की अनुमति मांगी थी। लेकिन बाजार नियामक सेबी ने 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) का हवाला देते हुए बीएसई के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था।

नियम के मुताबिक, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद की लिस्टिंग और अपनी ही कंपनी के शेयरों के दैनिक नियमन की सीधी निगरानी नहीं कर सकता, क्योंकि इससे इनसाइडर ट्रेडिंग, अनियंत्रित मूल्य उतार-चढ़ाव और कॉरपोरेट गवर्नेंस के गंभीर उल्लंघन का जोखिम पैदा होता है। यही वजह रही कि बीएसई को अपने शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर क्रॉस-लिस्ट करवाने पड़े और आज तक बीएसई के शेयरों की वास्तविक ट्रेडिंग एनएसई पर ही होती है। रामामूर्ति ने स्पष्ट किया कि जब तक सेबी अपने मौजूदा नियमों में कोई बड़ा नीतिगत बदलाव नहीं करता, तब तक यही कानून एनएसई पर भी हुबहू लागू होगा। यानी एनएसई को भी लिस्टिंग के लिए पूरी तरह बीएसई के पाले में ही आना होगा।

एनएसई के मेगा आईपीओ की आहट और बीएसई की बंपर कमाई का गणित

दलाल स्ट्रीट पर बीएसई के शेयरों में आई इस तेजी के पीछे का वित्तीय गणित बेहद दिलचस्प है। वित्तीय हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, एनएसई का बहुप्रतीक्षित आईपीओ लगभग 30,000 करोड़ से 32,000 करोड़ रुपये का हो सकता है, जो पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा। इस आईपीओ के जरिए मौजूदा घरेलू व विदेशी वित्तीय संस्थान अपनी 4 से 5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे।

जब देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज बीएसई के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होगा, तो वह भारत के सबसे ज्यादा लिक्विड और हाई-टर्नओवर वाले शेयरों में शुमार होगा। कैश मार्केट में एनएसई के शेयरों की अरबों रुपये की दैनिक खरीद-फरोख्त केवल और केवल बीएसई के ट्रेडिंग इंजन के जरिए होगी। ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल (PL Capital) के एक विश्लेषण का हवाला देते हुए बाजार विशेषज्ञों ने रेखांकित किया था कि यदि एनएसई अपने शेयरों की सेल्फ-ट्रेडिंग करने में कामयाब हो जाता, तो इससे वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में बीएसई की कुल कमाई पर कम से कम 1 से 2 प्रतिशत का सीधा नकारात्मक असर पड़ता। लेकिन रामामूर्ति के बयान ने यह सुनिश्चित कर दिया कि यह पूरा टर्नओवर और उससे मिलने वाले ट्रांजैक्शन चार्ज, कस्टडी फीस और क्लियरिंग इनकम सीधे बीएसई के बहीखाते में जुड़ेंगे, जिससे बीएसई के ऑपरेटिंग मार्जिन और शुद्ध मुनाफे को एक बड़ा और स्थायी उछाल मिलेगा।

को-लोकेशन केस का सैटलमेंट: सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी और आईपीओ का रास्ता साफ

बीएसई के शेयर में आए इस उछाल की पृष्ठभूमि में एक और बड़ी कानूनी सफलता भी शामिल है, जिसने एनएसई के आईपीओ की टाइमलाइन को बेहद करीब ला दिया है। गुरुवार को ही देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित 'को-लोकेशन' (Co-Location) और 'डार्क फाइबर' मामलों में बाजार नियामक सेबी द्वारा एनएसई के खिलाफ दायर याचिकाओं का औपचारिक निस्तारण (Settlement) कर दिया। यह कानूनी रास्ता तब साफ हुआ जब सेबी ने एनएसई के साथ लगभग 1,491.21 करोड़ रुपये के समग्र समझौते (Consent Settlement) को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी।

को-लोकेशन का यह मामला पिछले कई वर्षों से एनएसई की सार्वजनिक लिस्टिंग के रास्ते में सबसे बड़ा कानूनी रोड़ा बना हुआ था, जिसमें कुछ चुनिंदा स्टॉक ब्रोकर्स को बाजार के आंकड़े सामान्य निवेशकों से कुछ माइक्रोसेकंड पहले मिलने के आरोप लगे थे। एनएसई ने पहले ही सेबी के पास 776.47 करोड़ रुपये जमा करा दिए थे और हाल ही में 714.74 करोड़ रुपये की शेष राशि का भुगतान करके 1,491.21 करोड़ रुपये की पूरी समझौता राशि चुका दी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन मामलों का निपटारा किए जाने के बाद अब एनएसई के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को सेबी से मंजूरी मिलने और आगामी हफ्तों (संभावित रूप से सितंबर 2026 के उत्तरार्ध) में आईपीओ लॉन्च होने की संभावनाएं लगभग शत-प्रतिशत पक्की हो चुकी हैं।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और अगस्त में डेरिवेटिव्स वॉल्यूम पर लगा ब्रेक

इस बड़ी तेजी के बीच बीएसई के सीईओ सुंदररामन रामामूर्ति ने भारतीय शेयर बाजार के एक अन्य अत्यंत ज्वलंत मुद्दे—'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS)—पर भी अपनी चिंताएं जाहिर कीं। अगस्त 2026 की शुरुआत से सेबी द्वारा एफएंडओ शेयरों के लिए 3:15 से 3:30 बजे के बीच शुरू की गई नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था के बाद से बाजार में लिक्विडिटी की भारी कमी देखी गई है। रामामूर्ति ने स्वीकार किया कि सीएएस में पर्याप्त लिक्विडिटी न होने के कारण भागीदारी घटी है और इंडेक्स ऑप्शंस के वॉल्यूम में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त के महीने में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का मासिक इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर घटकर 34.48 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो नवंबर 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का अगस्त डेरिवेटिव्स टर्नओवर 32.2 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, जो जून 2025 के बाद का सबसे कम स्तर है। रामामूर्ति ने बताया कि बीएसई लगातार ब्रोकर्स और डीलर्स से बैठकें कर रहा है और इस नई व्यवस्था में सुधार के सुझाव सेबी को सौंपने की तैयारी में है, जिसमें एफएंडओ एक्सपायरी को सीएएस से अलग करना और ऑर्डर मॉडिफिकेशन पर रोक लगाना शामिल है। बाजार इस बात को सकारात्मक रूप से देख रहा है कि बीएसई प्रबंधन नियामक चुनौतियों के समाधान के लिए सबसे आगे आकर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

फंडामेंटल्स की मजबूती और ऑपरेटिंग लीवरेज का कमाल: क्या बनी रहेगी तेजी?

पिछले दो वर्षों के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE Ltd) के शेयरों ने भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े वेल्थ-क्रिएटर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। सेंसेक्स और बैंकेक्स डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की री-लॉन्चिंग के बाद से बीएसई ने डेरिवेटिव्स मार्केट में अपनी बाजार हिस्सेदारी को शून्य से बढ़ाकर 40 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाया है। वित्त वर्ष 2025-26 और हालिया तिमाहियों में कंपनी के राजस्व में 60 से 70 प्रतिशत से अधिक की सालाना वृद्धि दर्ज हुई है, जबकि इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन बढ़कर 45 प्रतिशत के पार पहुंच चुका है।

एक्सचेंज बिजनेस की सबसे बड़ी खूबी उसका 'नॉन-लीनियर ऑपरेटिंग लीवरेज' होता है—यानी जब एक बार एक्सचेंज का बुनियादी तकनीकी ढांचा तैयार हो जाता है, तो ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ने पर कंपनी की लागत नहीं बढ़ती, बल्कि आने वाला हर अतिरिक्त रुपया सीधे शुद्ध मुनाफे में तब्दील हो जाता है। अब जब एनएसई की लिस्टिंग की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और यह तय हो गया है कि एनएसई केवल बीएसई पर ही ट्रेड होगा, तो ब्रोकरेज हाउस मान रहे हैं कि आने वाले तिमाहियों में बीएसई का कैश मार्केट टर्नओवर अपने नए सर्वकालिक उच्च स्तर को छू सकता है।

गुरुवार को बीएसई के शेयरों में आई यह 4.5 प्रतिशत की दहाड़ केवल एक दिन का सट्टा नहीं, बल्कि देश के दोनों प्रमुख एक्सचेंजों के बीच बदलते शक्ति संतुलन और मजबूत नियामक अनुशासन पर निवेशकों के अटूट भरोसे का स्पष्ट प्रमाण है। जैसे-जैसे एनएसई के आईपीओ की तारीखें नजदीक आएंगी, बीएसई का शेयर दलाल स्ट्रीट पर एक्शन का सबसे बड़ा केंद्र बना रहेगा।