अमेरिका में ब्याज दरों पर ठहराव के संकेत, डॉलर में नरमी से सोने-चांदी में आई शानदार तेजी

अमेरिका में ब्याज दरों पर ठहराव के संकेत, डॉलर में नरमी से सोने-चांदी में आई शानदार तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन दिनों कमोडिटी मार्केट की चाल पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया कमजोर आंकड़ों के सामने आने के बाद निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) आगामी बैठकों में ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकता है। नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने और महंगाई के मोर्चे पर मद्धम संकेतों के कारण वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर सूचकांक (US Dollar Index) में कमजोरी देखने को मिल रही है। डॉलर की कमजोरी का सीधा और सकारात्मक फायदा सुरक्षित निवेश के विकल्प माने जाने वाले कीमती धातुओं यानी सोना और चांदी को मिल रहा है।

सोने में लगातार तीसरे सत्र में तेजी का रुख

कमजोर डॉलर और फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी के चलते सर्राफा बाजार में बुलियन की चमक लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ सत्रों से जारी सुस्ती को पीछे छोड़ते हुए सोने की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां नरम बनी रहेंगी, तब तक सोने की कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिलता रहेगा। दुनिया भर के निवेशकों का रुझान सुरक्षित परिसंपत्तियों की तरफ बढ़ने से घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में भी सोने के दाम ऊंचाई पर बने हुए हैं, जिससे खरीदारों और निवेशकों में उत्साह का माहौल है।

चांदी की चमक भी हुई तेज, इंडस्ट्रियल डिमांड का मिल रहा साथ

सोने के नक्शेकदम पर चलते हुए सफेद धातु यानी चांदी के तेवर भी बाजार में मजबूत बने हुए हैं। अमेरिकी मुद्रा में नरमी और औद्योगिक मांग में निरंतर सुधार के कारण चांदी की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला है। ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), सोलर पैनल और आधुनिक तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में चांदी की खपत लगातार बनी हुई है। इसके अलावा, मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने चांदी में भी लिवाली बढ़ाई है, जिससे इसके तकनीकी दायरे में सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया है और यह निवेशकों के बीच एक बेहतरीन विकल्प के रूप में उभर रही है।

भविष्य की चाल और निवेशकों के लिए आगे की राह

आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठकों के मिनट्स और प्रमुख आर्थिक मंचों पर आने वाले नीतिगत बयान बेहद अहम भूमिका निभाएंगे। यदि वैश्विक महंगाई और अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़े आगे भी कमजोर रहते हैं, तो डॉलर पर दबाव और बढ़ सकता है, जिसका सीधा फायदा बुलियन मार्केट को मिलेगा। बहरहाल, मौजूदा समय में ब्याज दरों में बदलाव न होने की संभावनाओं और कमजोर डॉलर के दम पर सोने-चांदी के निवेशकों को लगातार राहत मिल रही है और बाजार में उनका भरोसा मजबूत होता दिख रहा है।