सोने की कीमतों में तूफानी तेजी: अगस्त में ही ₹11,000 प्रति 10 ग्राम उछले दाम, ग्लोबल मार्केट में $4,500 के पार; जानें क्या आगे भी जारी रहेगी यह रिकॉर्ड रैली
त्योहारी और आगामी शादियों के सीजन से ठीक पहले देश और दुनिया के सर्राफा बाजारों में सोने की चमक अभूतपूर्व रूप से तेज हो गई है। अगस्त महीने में सोने के दामों में एकतरफा और तूफानी तेजी देखी जा रही है। घरेलू बुलियन मार्केट में सोने का हाजिर भाव इस महीने अब तक ₹11,000 प्रति 10 ग्राम से अधिक उछल चुका है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना ऐतिहासिक रूप से $4,500 प्रति औंस के पार मजबूती से ट्रेड कर रहा है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,42,860 प्रति 10 ग्राम था, जो 19 अगस्त को बढ़कर ₹1,53,868 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। अगस्त महीने में सोने की कीमतों में लगभग 11% की शानदार तेजी दर्ज की गई है, जो जनवरी (13% की तेजी) के बाद इस साल की दूसरी सबसे बड़ी मासिक रैली है। जहां जेवर खरीदारों के लिए यह झटका साबित हो रहा है, वहीं सोने में निवेश करने वालों के लिए यह मुनाफा कमाने का सुनहरा दौर बन गया है।
अगस्त में अचानक क्यों चमका सोना? समझें तेजी के 3 बड़े कारण
कमोडिटी और वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, सोने की कीमतों में इस भारी उछाल के पीछे वैश्विक और अमेरिकी आर्थिक नीतियों से जुड़े तीन प्रमुख कारक रहे हैं:
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कारण 1: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें न बढ़ाने की संभावना: महीने की शुरुआत में अमेरिकी फेड द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका 70% से ऊपर थी। लेकिन हालिया घटनाक्रमों के बाद ब्याज दर बढ़ने की संभावना घटकर लगभग 30-32% पर आ गई है, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि फेड ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। गैर-ब्याज वाली संपत्तियों (Non-Yielding Assets) जैसे सोने के लिए यह स्थिति बेहद अनुकूल होती है।
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कारण 2: सुस्त लेबर मार्केट और महंगाई में कमी के संकेत: अमेरिका में आई कमजोर रोजगार रिपोर्ट (US Jobs Report) ने अर्थव्यवस्था की सुस्त तस्वीर पेश की। इसके बाद जारी हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और थोक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़ों ने दिखाया कि ऊर्जा को छोड़कर महंगाई का दबाव कम हो रहा है। इससे मंदी की आशंकाओं के बीच सेफ-हेवन (सुरक्षित निवेश) के रूप में सोने की मांग बढ़ गई।
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कारण 3: डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में गिरावट: अमेरिकी ट्रेजरी के दखल के बाद बॉन्ड यील्ड में नरमी आई और अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ। डॉलर कमजोर होने से विदेशी खरीदारों और केंद्रीय बैंकों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारी खरीदारी शुरू हो गई।
क्या सोने में यह तेजी आगे भी रहेगी बरकरार?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की इस रिकॉर्ड तेजी के बावजूद आगे की राह में कुछ चुनौतियां और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं:
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कच्चे तेल और जियोपॉलिटिकल तनाव: कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव जारी है। यदि तेल के दाम और बढ़ते हैं, तो वैश्विक महंगाई फिर से बढ़ सकती है, जिससे केंद्रीय बैंकों को सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है।
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प्रॉफिट बुकिंग का जोखिम: कम समय में 11% से अधिक की तेजी के बाद ऊपरी स्तरों पर हल्की मुनाफावसूली (Profit Booking) संभव है।
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निवेशकों के लिए सलाह: विश्लेषकों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय गिरावट पर धीरे-धीरे गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF), सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या डिजिटल गोल्ड में एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश जारी रखना चाहिए।