7 से 30 सितंबर के बीच टैक्सपेयर्स न करें ये बड़ी गलतियां: एडवांस टैक्स, TDS चालान और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की आ गईं 5 जरूरी डेडलाइन
वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही का अंतिम महीना यानी सितंबर देश के करोड़ों व्यक्तिगत करदाताओं, व्यापारियों, कंपनियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) के लिए टैक्स अनुपालन (Tax Compliance) के लिहाज से सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। यदि आप भी एक नौकरीपेशा पेशेवर हैं, फ्रीलांसर हैं, शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हैं या कोई स्वतंत्र व्यवसाय चलाते हैं, तो आयकर विभाग के आधिकारिक कैलेंडर पर नजर दौड़ाना आपके लिए बेहद अनिवार्य है। 7 सितंबर से लेकर 30 सितंबर के बीच इनकम टैक्स से जुड़े कई ऐसे जरूरी काम हैं जिन्हें समय सीमा के भीतर पूरा न करने पर भारी वित्तीय दंड, ब्याज और आयकर विभाग के कानूनी नोटिस का सामना करना पड़ सकता है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों और पोर्टल के सर्वर लोड से बचने के लिए करदाताओं को सितंबर के इन सभी अनिवार्य टैक्स कंप्लायंस को समय रहते पूरा कर लेना चाहिए।
7 और 14 सितंबर: टीडीएस/टीसीएस सरकारी खाते में जमा करने और सर्टिफिकेट जारी करने की पहली समय सीमा
सितंबर महीने की टैक्स समय सीमा की शुरुआत 7 सितंबर से होती है। आयकर नियमों के तहत उन सभी नियोक्ताओं, कंपनियों और व्यवसायियों के लिए 7 सितंबर सबसे पहली डेडलाइन है, जिन्होंने अगस्त महीने के दौरान अपने कर्मचारियों के वेतन, वेंडर्स के बिलों, पेशेवर सेवाओं या अनुबंधों के भुगतान पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) या स्रोत पर कर संग्रह (TCS) किया है। चालान नंबर ITNS 281 के माध्यम से यह काटी गई टैक्स राशि 7 सितंबर तक सरकारी खजाने में ऑनलाइन जमा कराना अनिवार्य होता है। यदि कोई टैक्सपेयर 7 तारीख तक टीडीएस की राशि जमा करने में विफल रहता है, तो उसे आयकर अधिनियम की धारा 201(1A) के तहत 1.5 प्रतिशत प्रति माह की दर से दंडात्मक ब्याज का भुगतान करना पड़ता है।
इसके ठीक बाद 14 सितंबर की तारीख उन व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने जुलाई महीने में संपत्ति की खरीद (Section 194-IA), 50 हजार रुपये से अधिक मासिक मकान किराए के भुगतान (Section 194-IB), व्यक्तिगत ठेकेदारों या पेशेवरों को किए गए भुगतान (Section 194M) और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स/क्रिप्टोकरेंसी (Section 194S) पर टीडीएस काटा था। ऐसे सभी डिडक्टर्स को 14 सितंबर तक संबंधित विक्रेता या मकान मालिक को 'फॉर्म 16B', 'फॉर्म 16C' या 'फॉर्म 16D' के रूप में टीडीएस सर्टिफिकेट जारी करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
15 सितंबर का सबसे बड़ा अलर्ट: एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त जमा करने का नियम
15 सितंबर का दिन देश के उन सभी करदाताओं के लिए सबसे बड़ा टैक्स माइलस्टोन है जिनकी पूरे वित्त वर्ष के दौरान कुल अनुमानित टैक्स देनदारी (TDS/TCS काटने के बाद) ₹10,000 या उससे अधिक बैठती है। आयकर अधिनियम की धारा 208 के तहत ऐसे सभी करदाताओं (कंपनियां, फर्म, एलएलपी, फ्रीलांसर्स, व्यापारी और शेयर बाजार के निवेशक) को 'एडवांस टैक्स' (अग्रिम कर) जमा करना होता है। 15 सितंबर तक करदाताओं को अपने कुल अनुमानित वार्षिक टैक्स का कम से कम 45 प्रतिशत हिस्सा सरकारी खजाने में चालान 280 के जरिए जमा कराना अनिवार्य है।
यदि कोई करदाता 15 सितंबर तक 45% एडवांस टैक्स जमा करने में चूक करता है या कम राशि जमा करता है, तो उसे आयकर अधिनियम की धारा 234C के तहत हर महीने 1 प्रतिशत की दर से ब्याज चुकाना पड़ता है। वहीं, जो करदाता धारा 44AD या 44ADA के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन (Presumptive Taxation) स्कीम चुनते हैं, उन्हें पूरी एडवांस टैक्स की राशि 15 मार्च तक जमा करने की छूट होती है। वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष से अधिक आयु) जिनकी व्यवसाय या पेशे से कोई आय नहीं है, उन्हें एडवांस टैक्स जमा करने की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
30 सितंबर: टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (Form 3CA/3CB-3CD) और विदेश से धन प्रेषण का अंतिम दिन
सितंबर महीने की आखिरी तारीख यानी 30 सितंबर उन सभी व्यापारियों, पेशेवरों और कॉरपोरेट संस्थाओं के लिए सबसे बड़ी डेडलाइन है जिनके खातों का आयकर अधिनियम की धारा 44AB के तहत 'टैक्स ऑडिट' होना अनिवार्य है। सामान्य नियमों के अनुसार, यदि किसी व्यवसाय का वार्षिक टर्नओवर ₹1 करोड़ (और 95% से अधिक डिजिटल लेन-देन की स्थिति में ₹10 करोड़) से अधिक है, तो उसे किसी पंजीकृत चार्टर्ड अकाउंटेंट से अपने खातों का ऑडिट करवाकर 30 सितंबर तक ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'टैक्स ऑडिट रिपोर्ट' (Form 3CA/3CB और Form 3CD) अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होती है। इसके अलावा जिन पेशेवरों (डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, सीए आदि) की वार्षिक ग्रॉस रिसीट्स ₹50 लाख (या डिजिटल लेन-देन में ₹75 लाख) से अधिक है, उनके लिए भी ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर ही है।
30 सितंबर को ही उन कंपनियों और गैर-कॉरपोरेट संस्थाओं के लिए भी डेडलाइन होती है जिन्होंने अगस्त महीने में सेक्शन 194-IA, 194-IB, 194M या 194S के तहत टैक्स काटा था; उन्हें चालान-कम-स्टेटमेंट (फॉर्म 26QB, 26QC, 26QD, 26QE) दाखिल करना होता है। इसके साथ ही, अधिकृत डीलरों द्वारा जून तिमाही के लिए विदेशी प्रेषण (Foreign Remittances) के संबंध में 'फॉर्म 15CC' में तिमाही विवरण जमा करने की अंतिम तिथि भी 30 सितंबर निर्धारित है।
डेडलाइन चूकने पर लगने वाला भारी जुर्माना और आयकर नोटिस का जोखिम
टैक्स अनुपालन की इन महत्वपूर्ण समय सीमाओं को नजरअंदाज करना करदाताओं की जेब पर बेहद भारी पड़ सकता है। यदि कोई व्यापारी या कंपनी 30 सितंबर तक अपनी टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं करती है, तो आयकर अधिनियम की धारा 271B के तहत कुल टर्नओवर का 0.5 प्रतिशत या अधिकतम ₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये) तक का भारी जुर्माना सीधे तौर पर लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, समय पर ऑडिट रिपोर्ट दाखिल न करने की स्थिति में करदाता चालू वित्त वर्ष के व्यावसायिक नुकसान (Business Losses) को अगले वर्षों के लिए कैरी-फॉरवर्ड (Carry Forward) करने का अधिकार भी गंवा देते हैं।
एडवांस टैक्स न भरने की स्थिति में धारा 234B और 234C के तहत लगने वाला चक्रवृद्धि ब्याज करदाता की कुल देनदारी को काफी बढ़ा देता है। इसके अलावा, आयकर विभाग का ऑटोमेटेड सीपीसी (CPC) सिस्टम डेटा मिसमैच और गैर-अनुपालन के मामलों को तुरंत पकड़कर धारा 143(1) या धारा 148 के तहत सीधे स्क्रूटनी नोटिस जारी कर देता है।
करदाताओं के लिए जरूरी चेकलिस्ट: अंतिम समय की हड़बड़ी से बचने के आसान उपाय
टैक्सपेयर्स को 30 सितंबर तक के इन सभी कंप्लायंस को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए एक व्यवस्थित चेकलिस्ट का पालन करना चाहिए:
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एआईएस और टीआईएस का मिलान: अपने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) को फॉर्म 26AS के साथ डाउनलोड कर सभी बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर ट्रेडिंग और टीडीएस प्रविष्टियों का मिलान करें।
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एडवांस टैक्स की सही गणना: अप्रैल से अगस्त तक की वास्तविक आय और शेष वित्तीय वर्ष की अनुमानित आय का सटीक आकलन कर अपने सीए से एडवांस टैक्स की 45% देनदारी तय करवाएं।
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बही-खातों और इनवॉइस का ऑडिट: जिन व्यापारियों पर टैक्स ऑडिट लागू होता है, वे अपने सभी बैंक स्टेटमेंट्स, जीएसटी रिटर्न्स (GSTR-1, GSTR-3B), स्टॉक रजिस्टर और खर्चों के बिल सीए को तुरंत उपलब्ध कराएं ताकि 3CD फॉर्म समय पर तैयार हो सके।
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डिजिटल मोड से टैक्स भुगतान: टैक्स का भुगतान करने के लिए आयकर पोर्टल के 'ई-पे टैक्स' (e-Pay Tax) विकल्प का उपयोग करें और सही असेसमेंट ईयर (AY) तथा सही माइनर हेड (Advance Tax 100) का चयन सुनिश्चित करें।
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पोर्टल ग्लिच से बचाव: अंतिम दिनों में आयकर पोर्टल पर लाखों यूजर्स के एक साथ आने से सर्वर डाउन या स्लो होने की समस्या आम है, इसलिए 25 सितंबर से पहले ही अपने सभी फॉर्म्स और रिपोर्ट्स सबमिट करने का प्रयास करें।