दुनिया के शीर्ष 5 बैंकों की सूची में कौन-कौन है शामिल, ग्लोबल बैंकिंग की इस लंबी रेस में भारत अभी कितना पीछे है और क्या 'विकसित भारत 2047' तक दुनिया के टॉप बैंकों में जगह बनाने का हमारा सपना सच हो पाएगा?

दुनिया के शीर्ष 5 बैंकों की सूची में कौन-कौन है शामिल, ग्लोबल बैंकिंग की इस लंबी रेस में भारत अभी कितना पीछे है और क्या 'विकसित भारत 2047' तक दुनिया के टॉप बैंकों में जगह बनाने का हमारा सपना सच हो पाएगा?

ग्लोबल बैंकिंग सेक्टर की दुनिया में जब भी कुल संपत्ति, मार्केट कैपिटलाइजेशन और वित्तीय ताकत की बात आती है, तो अमेरिका और चीन का दबदबा सबसे ऊपर नजर आता है। आज के समय में दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान इन्हीं दोनों देशों के पाले में खड़े दिखाई देते हैं, जबकि भारत तेजी से दुनिया की पांचवीं से तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में यह सवाल हर देशवासी के मन में आता है कि दुनिया के टॉप 5 बैंक कौन-से हैं और वैश्विक स्तर पर हमारे भारतीय बैंक इस विशालकाय वित्तीय रेस में आखिर कहां ठहरते हैं। क्या सरकार के 'विकसित भारत 2047' के विजन के तहत हमारे बैंक आने वाले दशकों में दुनिया के शीर्ष बैंकों की बराबरी कर पाएंगे और ग्लोबल लीडर बन सकेंगे, आइए इस पूरी रिपोर्ट के जरिए बैंकिंग सेक्टर के इस समीकरण को बेहद गहराई से समझते हैं।

संपत्ति के आधार पर दुनिया के टॉप 5 बैंक और उनका दबदबा

वैश्विक वित्तीय आंकड़ों और कुल संपत्ति यानी टोटल एसेट्स के पैमाने पर अगर नजर डाली जाए, तो दुनिया के शीर्ष बैंकों की सूची में चीनी बैंकों का पूर्ण वर्चस्व देखने को मिलता है। इस ग्लोबल लिस्ट में पहले स्थान पर चीन का दिग्गज वित्तीय संस्थान 'इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना' यानी आईसीबीसी (ICBC) का नाम आता है, जिसकी विशालकाय संपत्ति दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसके बाद दूसरे स्थान पर एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना, तीसरे स्थान पर चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक और चौथे स्थान पर बैंक ऑफ चाइना का नाम शामिल है, जो यह साबित करते हैं कि चीन का बैंकिंग तंत्र आकार के मामले में कितना बड़ा है। इस टॉप फाइव की इस कड़े मुकाबले वाली सूची में अमेरिका का प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थान जेपी मॉर्गन चेज (JPMorgan Chase) पांचवें पायदान पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराता है, जो पश्चिमी देशों के वित्तीय बाजार का सबसे बड़ा स्तंभ माना जाता है।

वैश्विक बैंकिंग के इस पैमाने पर भारत अभी कितना पीछे है?

भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था आज दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो और हमारे बैंकों का मुनाफा तथा वित्तीय स्वास्थ्य रिकॉर्ड स्तर पर मजबूत हो, लेकिन आकार और कुल संपत्तियों के मामले में भारतीय बैंक वैश्विक दिग्गजों के मुकाबले अभी काफी पीछे हैं। भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) वैश्विक रैंकिंग में कुल संपत्तियों के आधार पर लगभग 43वें स्थान पर आता है, जबकि देश का सबसे बड़ा निजी बैंक एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) टॉप 100 संस्थानों की सूची में लगभग 73वें स्थान पर अपनी जगह बनाता है। चीन के टॉप बैंकों की कुल संपत्ति कई ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुकी है, जबकि हमारे सबसे बड़े बैंकों का एसेट बेस अभी उस पैमाने से काफी छोटा है, हालांकि एनपीए में सुधार और डिजिटल बैंकिंग के मामले में हमारे बैंक वैश्विक मानकों पर बेहद आगे हैं।

क्या 2047 तक पूरा होगा दुनिया के टॉप बैंकों में शामिल होने का सपना?

भारत सरकार ने देश की स्वतंत्रता के सौ साल पूरे होने पर 'विकसित भारत 2047' का एक बहुत बड़ा और दूरदर्शी विजन तैयार किया है, जिसके तहत देश की अर्थव्यवस्था को हर मोर्चे पर आत्मनिर्भर और ग्लोबल बनाना है। इस भव्य रोडमैप के अंतर्गत यह लक्ष्य भी तय किया गया है कि आने वाले समय में भारत के कम से कम दो बड़े बैंकों को दुनिया के टॉप 20 ग्लोबल बैंकों की सूची में गर्व के साथ शामिल किया जाए। इस सपने को साकार करने के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई कमजोर और छोटे सरकारी बैंकों का आपस में बड़े पैमाने पर विलय (Consolidation) किया है, जिससे उनकी उधार देने की क्षमता और वित्तीय ताकत में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा फिनटेक सेक्टर का विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग और आधुनिक जोखिम प्रबंधन प्रणालियां भारतीय बैंकों को तेजी से आगे बढ़ने में मदद कर रही हैं।

भारतीय बैंकिंग सेक्टर का भविष्य और आने वाली चुनौतियां

भले ही आज आकार के मामले में फासला बड़ा नजर आता हो, लेकिन जिस प्रकार से देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ रहे हैं और लोगों की वित्तीय पहुंच मजबूत हो रही है, उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि आने वाला कल भारतीय बैंकिंग का ही है। भारत के बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पैथ मजबूत करने की है। जैसे-जैसे देश की जीडीपी का आकार बढ़ेगा और प्रति व्यक्ति आय में इजाफा होगा, वैसे-वैसे भारतीय बैंकों का आकार भी स्वाभाविक रूप से कई गुना बड़ा हो जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वित्तीय सुधारों की यह रफ्तार लगातार जारी रही और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं, तो 2047 तक दुनिया के शीर्ष बैंकों में भारतीय ध्वज फहराने का यह सपना असंभव नहीं बल्कि पूरी तरह सच साबित होकर रहेगा।