डर और ठहाकों का परफेक्ट तड़का या बिखरी कहानी? जानें यामी गौतम की हॉरर कॉमेडी में कितना है दम

डर और ठहाकों का परफेक्ट तड़का या बिखरी कहानी? जानें यामी गौतम की हॉरर कॉमेडी में कितना है दम

बॉलीवुड में इन दिनों हॉरर कॉमेडी जॉनर का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है और इसी कड़ी में प्रतिभाशाली अभिनेत्री यामी गौतम अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'नई नवेली' के साथ बड़े पर्दे पर लौट आई हैं। हमेशा लीक से हटकर किरदार चुनने के लिए पहचानी जाने वाली यामी गौतम ने इस बार एक ऐसी नई नवेली दुल्हन का किरदार निभाया है जिसके ससुराल में कदम रखते ही अजीबो-गरीब, डरावनी और साथ ही पेट पकड़कर हंसाने वाली घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है। फिल्म के टीजर और गानों ने रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच एक अच्छा बज बना दिया था, जिससे उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं। अब जब यह फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों के सामने आ चुकी है, तो सवाल उठता है कि क्या यह फिल्म 'स्त्री' और 'मुंज्या' जैसी हॉरर कॉमेडी फिल्मों की तरह अपनी छाप छोड़ पाती है या फिर सिर्फ एक सामान्य प्रयोग बनकर रह जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं इस फिल्म की कहानी, अदाकारी, निर्देशन और इसके मजबूत व कमजोर पहलुओं के बारे में।

क्या है 'नई नवेली' की मुख्य कहानी और सस्पेंस

फिल्म की कहानी एक पारंपरिक और सुदूर गांव में स्थित एक पुराने, रहस्यमयी खानदानी मकान से शुरू होती है। यामी गौतम का किरदार एक आधुनिक और आत्मविश्वासी युवती का है, जिसकी शादी एक पारंपरिक संयुक्त परिवार में होती है। जैसे ही वह लाल जोड़े में घूंघट ओढ़कर ससुराल की दहलीज लांघती है, घर के भीतर पहले से मौजूद एक प्राचीन आत्मा और अलौकिक शक्तियों के बीच टकराव शुरू हो जाता है। शुरुआत में घरवाले बहू के बदले-बदले व्यवहार और रात के सन्नाटे में होने वाली हलचलों को शादी के शुरुआती तनाव या वहम का नाम देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे साफ होता है कि यह घर सिर्फ इंसानों का नहीं है। कहानी का असली मजा तब आता है जब डर के गंभीर माहौल में देसी पंच, पारिवारिक उलझनें और सिचुएशनल कॉमेडी का ऐसा तड़का लगता है जो दर्शकों को लगातार बांधे रखता है। इंटरवल तक आते-आते फिल्म एक ऐसा रहस्यमयी मोड़ लेती है जो दर्शकों को सीट से चिपके रहने पर मजबूर कर देता है।

यामी गौतम की लाजवाब अदाकारी और सपोर्टिंग कास्ट का दम

अभिनय की बात करें तो पूरी फिल्म यामी गौतम के कंधों पर मजबूती से टिकी हुई है। यामी ने एक भोली-भाली नई दुल्हन से लेकर अचानक खौफनाक और अनपेक्षित रूप अख्तियार करने वाली महिला के दोहरे शेड्स को बेहद सहजता और सघनता से निभाया है। उनके चेहरे के भाव, संवाद अदायगी और कॉमेडी सीन्स में उनकी टाइमिंग देखने लायक है। यह कहना गलत नहीं होगा कि यामी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे किसी भी जॉनर में खुद को पूरी तरह ढालने की अद्भुत क्षमता रखती हैं। फिल्म में उनके पति के किरदार में नजर आने वाले अभिनेता ने भी अपनी घबराहट और असमंजस को बहुत ही स्वाभाविक ढंग से पर्दे पर पेश किया है। वहीं ससुराल के बुजुर्गों और अजीबोगरीब तांत्रिक-पंडितों का किरदार निभाने वाले सहायक कलाकारों ने अपनी देसी जुगलबंदी से फिल्म में जमकर हास्य के रंग भरे हैं, जिससे थिएटर्स में लगातार हंसी के ठहाके गूंजते हैं।

निर्देशन, वीएफएक्स और बैकग्राउंड म्यूजिक का प्रभाव

फिल्म के निर्देशक ने हॉरर और कॉमेडी के संतुलन को साधने का पूरा प्रयास किया है। हॉरर कॉमेडी बनाना हमेशा से दोधारी तलवार की तरह होता है, जहां ज्यादा हंसी डर को बेअसर कर सकती है और ज्यादा डर कॉमेडी का मजा किरकिरा कर सकता है। निर्देशक ने पहले हाफ में इस संतुलन को बहुत खूबसूरती से साधा है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर रोंगटे खड़े कर देने वाला है, खासकर रात के दृश्यों में जब पायल की झंकार या सन्नाटे में बजती अचानक चीखें दर्शकों को चौंका देती हैं। वीएफएक्स और लाइटिंग पर भी अच्छा काम किया गया है, जो किसी भी दृश्य को अत्यधिक बनावटी नहीं लगने देता। हालांकि, सेकंड हाफ में कुछ जगहों पर कहानी की गति थोड़ी धीमी पड़ती नजर आती है और क्लाइमैक्स के कुछ दृश्य थोड़े खिंचे हुए महसूस होते हैं, लेकिन अंतिम बीस मिनट का अप्रत्याशित ट्विस्ट इन छोटी कमियों पर पर्दा डाल देता है।

फिल्म के मजबूत और कमजोर पहलू

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका चुटीला स्क्रीनप्ले और देसी अंदाज में पिरोए गए वन-लाइनर्स हैं, जो आम भारतीय परिवार के ताने-बाने से सीधे जुड़ते हैं। यामी गौतम का बेबाक अंदाज और हॉरर एलिमेंट्स का समय पर इस्तेमाल दर्शकों को बोर नहीं होने देता। वहीं कमजोर कड़ी की बात करें तो फिल्म का संगीत औसत है; ऐसा कोई भी गाना नहीं है जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद जुबान पर चढ़ा रहे। इसके अलावा कुछ जंप-स्केयर्स ऐसे हैं जिनका अंदाजा पहले से ही लगाया जा सकता है। अगर पटकथा को दूसरे हाफ में थोड़ा और कसा जाता, तो यह फिल्म इस जॉनर में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सकती थी। बावजूद इसके, यह फिल्म अपने पूरे रनटाइम में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने में पूरी तरह कामयाब रहती है।

अंतिम फैसला: क्या सिनेमाघरों में देखनी चाहिए यह फिल्म?

कुल मिलाकर 'नई नवेली' एक पैसा वसूल पारिवारिक हॉरर कॉमेडी फिल्म है, जो आपको डराती भी है और दिल खोलकर हंसने का मौका भी देती है। यदि आप सस्पेंस, देसी कॉमेडी और यामी गौतम के बेहतरीन अभिनय के शौकीन हैं, तो वीकेंड पर परिवार या दोस्तों के साथ यह फिल्म देखना एक बेहतरीन अनुभव साबित हो सकता है। यह फिल्म हॉरर कॉमेडी के शौकीनों को बिल्कुल भी निराश नहीं करेगी और बॉक्स ऑफिस पर भी अपनी मजबूत पकड़ बनाने का पूरा माद्दा रखती है।