पीएम मोदी से मुलाकात के बाद विजय का बदला मिजाज? विपक्ष के प्रदर्शन में TVK की सांकेतिक मौजूदगी ने बढ़ाई सियासी हलचल

पीएम मोदी से मुलाकात के बाद विजय का बदला मिजाज? विपक्ष के प्रदर्शन में TVK की सांकेतिक मौजूदगी ने बढ़ाई सियासी हलचल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय की बदली हुई राजनीतिक रणनीति ने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चेन्नई में आयोजित विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के संयुक्त विरोध-प्रदर्शन में टीवीके औपचारिक रूप से शामिल तो हुई, लेकिन पार्टी की मौजूदगी केवल प्रतीकात्मक रही। मुख्यमंत्री विजय खुद इस प्रदर्शन से दूर रहे और उन्होंने अपनी कैबिनेट से केवल एक जूनियर मंत्री राजमोहन को भेजा। हैरानी की बात यह रही कि जहां प्रदर्शन स्थल पर सहयोगी दलों के झंडे, बैनर और कार्यकर्ता भारी तादाद में मौजूद थे, वहीं टीवीके का न तो कोई झंडा नजर आया और न ही जमीन पर कैडर जुटाया गया।

मंत्री के भाषण में तीखा विरोध, लेकिन केंद्र और भाजपा पर साधी साधी चुप्पी

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी. मणिक्कम टैगोर के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में टीवीके की तरफ से पहुंचे मंत्री राजमोहन ने मंच से भाषण तो दिया, लेकिन उनका रुख बेहद नपा-तुला रहा:

  • SIR प्रक्रिया पर प्रहार: राजमोहन ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को देश पर 'थोपी गई व्यवस्था' बताया और कहा कि टीवीके पहले दिन से ही इसके खिलाफ आवाज उठा रही है। उन्होंने कांग्रेस और टीवीके के रिश्ते को 'दो नालियों वाली बंदूक' करार दिया जो लोकतंत्र बचाने के लिए साथ खड़ी हैं।

  • बीजेपी का एक बार भी नाम नहीं: पूरे भाषण के दौरान मंत्री ने न तो केंद्र की मोदी सरकार पर कोई सीधा हमला बोला और न ही एक बार भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) का नाम लिया।

  • कार्यकर्ताओं को दूर रखने की रणनीति: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके नेतृत्व ने जानबूझकर अपने कार्यकर्ताओं को इस सड़क-प्रदर्शन से दूर रखा ताकि केंद्र सरकार के साथ सीधा टकराव पैदा न हो।

पीएम मोदी से मुलाकात और मेट्रो यात्रा के बाद बदले समीकरण?

विजय के इस संकोची और सतर्क रवैये के पीछे हाल के दिनों में घटे हाई-प्रोफाइल राजनीतिक घटनाक्रम को देखा जा रहा है:

  1. राहुल गांधी के साथ लंच: कुछ ही दिन पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी चेन्नई में विजय के आवास पर पहुंचे थे, जहां दोनों नेताओं ने लंबी चर्चा की थी। इसके बाद टीवीके के 'इंडिया' गठबंधन में शामिल होने को लेकर माहौल गरमाया था।

  2. अगले ही दिन पीएम मोदी के साथ मंच साझा: राहुल गांधी से मुलाकात के ठीक अगले दिन मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का औपचारिक स्वागत किया। विजय न केवल पीएम के साथ मंच पर दिखे, बल्कि चेन्नई मेट्रो के नए रूट के उद्घाटन के दौरान उनके साथ सफर भी किया।

  3. प्रोटोकॉल या राजनीतिक बैलेंसिंग? जानकारों का कहना है कि विजय एक तरफ 'इंडिया' गठबंधन के साथ अपनी वैचारिक व चुनावी साझेदारी का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी से सीधे टकराव से बचकर एक सोची-समझी 'बैलेंसिंग एक्ट' पर चल रहे हैं।

डीएमके की नाराजगी और विजय की कानूनी-प्रशासनिक मजबूरियां

विजय की इस सावधानी को तमिलनाडु की पेचीदा राजनीतिक परिस्थितियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है:

  • डीएमके से तल्खी: हाल ही में डीएमके ने कांग्रेस और टीवीके की नजदीकियों के चलते 'इंडिया' गठबंधन के राज्य स्तरीय प्रदर्शनों से दूरी बनाई है। डीएमके के अलग तेवरों के बीच विजय खुद को विपक्ष की मुख्य धुरी के रूप में पेश तो करना चाहते हैं, लेकिन आक्रामक टकराव का जोखिम नहीं लेना चाहते।

  • केंद्रीय एजेंसियों का दबाव: राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि करूर भगदड़ से जुड़ी सीबीआई जांच और टीवीके से जुड़े कुछ नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की पैनी नजर को देखते हुए पार्टी नेतृत्व केंद्र के खिलाफ हद से ज्यादा मुखर होने से बच रहा है।

चेन्नई के इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि विजय विपक्ष की एकता की टेबल पर हाजिरी तो दर्ज कराना चाहते हैं, लेकिन भाजपा के खिलाफ सीधी जुबानी जंग छेड़ने के मूड में फिलहाल नहीं हैं।