अभिजीत दीपके के बाद राहुल गांधी पर भड़कीं अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन, जॉर्ज सोरोस पर लगाए विदेशी फंडिंग के आरोप
दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी खेमे के विरोध-प्रदर्शनों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी गायिका और अफ्रीकी-अमेरिकी सांस्कृतिक राजदूत मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके से तीखी नोकझोंक के बाद अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला है। मिलबेन ने दोनों नेताओं पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि ये लोग देश के सामने कोई ठोस समाधान प्रस्तुत किए बिना केवल अराजकता, व्यवधान और अशांति फैलाने का काम कर रहे हैं।
'द नेम इज जॉर्ज सोरोस': अमेरिकी फंडिंग से भारत में अशांति फैलाने का बड़ा दावा
मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' और अपने साक्षात्कारों में यह सनसनीखेज आरोप लगाया कि भारत में हो रहे इन विरोध-प्रदर्शनों को अमेरिकी डोनर्स और वैश्विक नेटवर्क द्वारा पोषित किया जा रहा है:
-
जॉर्ज सोरोस की फंडिंग का आरोप: मिलबेन ने अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस का सीधा नाम लेते हुए कहा, "द नेम इज जॉर्ज सोरोस... यह पूरा तंत्र दुनिया भर में इस तरह के विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अराजकता को लगातार फंड करता आ रहा है।"
-
ग्लोबल पैटर्न का दावा: उन्होंने तर्क दिया कि वैश्विक स्तर पर रूढ़िवादी और मजबूत राष्ट्रवादी नेताओं को अस्थिर करने के लिए एक तय पैटर्न चलाया जाता है—पहले किसी देश के पश्चिमी-शिक्षित व्यक्ति को आगे किया जाता है, फिर आंदोलन के नाम पर संस्थाओं की साख पर हमला करवाया जाता है।
-
'सफल नहीं होंगे विदेशी डोनर्स': मिलबेन ने दीपके और विपक्ष को चेतावनी दी कि जब उनका यह एजेंडा भारत में विफल होगा, तो अमेरिकी डोनर्स उन्हें किसी गर्म तवे की तरह छोड़ देंगे (drop like a hot cake), क्योंकि अराजकता कभी लोकतंत्र को नहीं हरा सकती।
'पीएम मोदी को विदेशी सहारे की जरूरत नहीं, उनके साथ 140 करोड़ भारतीय'
कांग्रेस और विपक्षी नेताओं द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार करते हुए मिलबेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जोरदार बचाव किया:
-
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले 25 वर्षों से सार्वजनिक सेवा में हैं, 12 वर्षों से अधिक समय से देश के प्रधानमंत्री हैं और लगातार तीन कार्यकाल पूरे कर चुके हैं।
-
मिलबेन ने लिखा, "पीएम मोदी को किसी बाहरी समर्थन की दरकार नहीं है। उनके साथ 140 करोड़ से अधिक भारतीय नागरिकों का अटूट विश्वास है और देश की जनता उन्हें आने वाले समय में भी पूरा समर्थन देगी।"
-
उन्होंने राहुल गांधी और दीपके को नसीहत दी कि वे सड़कों पर अशांति फैलाने और चुनी हुई सरकार को बदनाम करने के बजाय अपनी शिक्षा और ऊर्जा का उपयोग देश के विकास के लिए करें और सकारात्मक राजनीति अपनाएं।
अभिजीत दीपके का पलटवार: 'विदेशी नागरिकों को भारत के अंदरूनी मामलों में बोलने का क्या हक?'
मैरी मिलबेन के इस बयान के बाद सीजेपी संयोजक अभिजीत दीपके ने भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। दीपके ने कहा:
"विदेशी नागरिकों को भारत के घरेलू मामलों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया? भारत अपने अंदरूनी मसलों को सुलझाने में पूरी तरह सक्षम है। हमें किसी बाहरी व्यक्ति के उपदेश की जरूरत नहीं है।"
उन्होंने यह भी सवाल दागा कि क्या केंद्र सरकार और उसके समर्थक अपने ही देश के नागरिकों को बदनाम करने के लिए अब विदेशियों से बयान दिलवा रहे हैं।
युवा देशभक्तों से 'काउंटर-मूवमेंट' चलाने की अपील
मैरी मिलबेन ने भारत के युवाओं से आह्वान किया कि वे ऐसे विघटनकारी एजेंडे और कथित 'रिजीम चेंज' की साजिशों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट हों। उन्होंने कहा कि भारतीय मिट्टी पर पले-बढ़े युवाओं को अपने लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए शांति, एकता और देशभक्ति के आधार पर एक मजबूत प्रति-आंदोलन (Counter Movement) खड़ा करना चाहिए।