'सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अब अभिजीत दीपके की बारी?': घर पर पुलिस की दस्तक के बाद गिरफ्तारी की अटकलें तेज
दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था के उल्लंघन से जुड़े मामले में एक्टिविस्ट सौरभ दास और आशुतोष रांका की औपचारिक गिरफ्तारी के बाद अब 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम अभिजीत दीपके के आवास पर पहुंची, जिसके बाद राजनीतिक और एक्टिविस्ट हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या पुलिस उन्हें भी हिरासत में लेने जा रही है।
सौरभ दास और आशुतोष रांका पहले से सलाखों के पीछे
पुलिसिया कार्रवाई की शुरुआत जंतर-मंतर पर बिना पूर्व अनुमति के भारी जमावड़ा करने, पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने के प्रयास और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों के तहत दर्ज प्राथमिकियों (FIRs) के बाद हुई:
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सौरभ दास पर आरोप: एक्टिविस्ट और शोधकर्ता सौरभ दास पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल अभियानों के जरिए भ्रामक सूचनाएं प्रसारित कीं और संवेदनशील इलाके में भीड़ जुटाने की अगुवाई की।
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आशुतोष रांका की भूमिका: आशुतोष रांका पर जमीनी स्तर पर प्रदर्शनकारियों को संगठित करने और निषेधाज्ञा (धारा 144/BNSS प्रावधानों) का उल्लंघन करने के आरोप में मामला दर्ज कर उन्हें पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
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दोनों प्रमुख चेहरों के जेल जाने के बाद जांच एजेंसियों ने आंदोलन से जुड़े प्रमुख रणनीतिकारों और वित्तीय लेन-देन के स्रोतों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।
दीपके के आवास पर पुलिस की दस्तक: पूछताछ या गिरफ्तारी की तैयारी?
अभिजीत दीपके के घर पुलिस टीम के पहुंचने की खबर सोशल मीडिया पर फैलते ही समर्थकों में हड़कंप मच गया।
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नोटिस और पूछताछ: सूत्रों के अनुसार, पुलिस टीम ने प्रदर्शनों के समन्वय, विदेशी संपर्कों और फंडिंग से जुड़े बयानों के संबंध में दीपके को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस तामील कराया और प्रारंभिक पूछताछ की।
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दीपके का बयान: सोशल मीडिया पर दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि उनके साथियों—सौरभ और आशुतोष—को गैरकानूनी रूप से जेल में डाला गया है और अब उन्हें भी डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे कानूनी लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
अंतरराष्ट्रीय बयानों और जॉर्ज सोरोस कनेक्शन की भी जांच के दायरे में आने की चर्चा
हाल ही में अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन द्वारा लगाए गए आरोपों—जिसमें उन्होंने इस पूरे आंदोलन को विदेशी डोनर्स और जॉर्ज सोरोस नेटवर्क से पोषित होने का दावा किया था—के बाद जांच एजेंसियों पर वित्तीय सुराग खंगालने का भी दबाव है। पुलिस यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या राजधानी में आयोजित इस विरोध आंदोलन के पीछे कोई सुनियोजित साजिश या विदेशी फंड का इस्तेमाल तो नहीं हुआ था।
विपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में आक्रोश
दीपके के घर पुलिस पहुंचने और साथी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं ने इसे 'अघोषित आपातकाल' करार देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के उल्लंघन और सार्वजनिक शांति भंग करने के मामलों में पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है।