'धुरंधर 2…' लिखकर राम गोपाल वर्मा ने इशारों-इशारों में कसा 'टॉक्सिक' पर तंज? सोशल मीडिया पर छिड़ा घमासान

'धुरंधर 2…' लिखकर राम गोपाल वर्मा ने इशारों-इशारों में कसा 'टॉक्सिक' पर तंज? सोशल मीडिया पर छिड़ा घमासान

भारतीय सिनेमा के जाने-माने और सबसे बेबाक फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा (RGV) अपनी लीक से हटकर फिल्मों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपनी व्यंग्यात्मक, रहस्यमयी और बिना लाग-लपेट वाली टिप्पणियों के लिए हमेशा जाने जाते हैं। जब भी बॉक्स ऑफिस पर कोई बहुत बड़ी पैन-इंडिया फिल्म, विशेष रूप से भारी हिंसा, ड्रग्स और डार्क गैंगस्टर जॉनर की फिल्म रिलीज होती है, तो सिनेमा प्रेमी आरजीवी के रिएक्शन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। हाल ही में सुपरस्टार यश की बहुचर्चित फिल्म 'टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' के रिलीज होने और उसके जबरदस्त बॉक्स ऑफिस हंगामे के बीच राम गोपाल वर्मा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (ट्विटर) पर एक ऐसा एक-पंक्ति का पोस्ट साझा किया, जिसने पूरे एंटरटेनमेंट जगत में सनसनी मचा दी है। आरजीवी ने बिना किसी का सीधा नाम लिए 'धुरंधर 2…' और डार्क सिनेमा के दावों को लेकर कुछ ऐसी गूढ़ पंक्तियां लिखीं, जिसे इंटरनेट यूजर्स और फिल्म समीक्षक सीधे तौर पर 'टॉक्सिक' और उसके हाइप पर कसा गया तीखा तंज मान रहे हैं।

आरजीवी के उस पोस्ट में ऐसा क्या था जिसने इंटरनेट पर मचा दिया बवाल?

राम गोपाल वर्मा की पोस्ट की भाषा हमेशा दोधारी तलवार जैसी होती है, जिसमें तारीफ और तंज के बीच की लकीर बहुत बारीक होती है। सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट्स के अनुसार, आरजीवी ने सिनेमा में 'असली गैंगस्टर' बनाम 'दिखावटी लार्जर-दैन-लाइफ गैंगस्टर' की अवधारणा पर चुटकी लेते हुए लिखा कि आजकल हर कोई केवल स्टाइल, सिगार के धुएं और स्लो-मोशन वॉक को ही गहरी कहानी समझ बैठता है, जबकि असली 'धुरंधर' वह होता है जो बिना किसी तामझाम के केवल कंटेंट के दम पर रोंगटे खड़े कर दे।

आरजीवी द्वारा अचानक 'धुरंधर' शब्द का इस्तेमाल करना और उसे वर्तमान में चल रही डार्क गैंगस्टर फिल्मों के नैरेटिव से जोड़ना ही इस पूरी बहस की जड़ बन गया। चूंकि 'टॉक्सिक' इस समय सिनेमाघरों में अपनी विंटेज स्टाइलिंग, अत्यधिक हिंसा और डार्क फेयरी टेल थीम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा में है, इसलिए लोगों ने दो और दो जोड़ते हुए यह निष्कर्ष निकाल लिया कि आरजीवी का यह गुप्त तीर सीधे यश और निर्देशक गीतू मोहनदास की फिल्म की ओर ही दागा गया है।

'सत्या' और 'कंपनी' के दौर से 'टॉक्सिक' की तुलना: गैंगस्टर जॉनर के मास्टरमाइंड का दृष्टिकोण

राम गोपाल वर्मा भारतीय सिनेमा में यथार्थवादी अंडरवर्ल्ड और गैंगस्टर जॉनर के जनक माने जाते हैं। 90 के दशक में 'सत्या', 'कंपनी' और 'सरकार' जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में बनाकर उन्होंने गैंगस्टर सिनेमा को एक नया यथार्थवादी धरातल दिया था। आरजीवी का सिनेमा हमेशा किरदारों की कच्ची विवशता, सड़कों की वास्तविक बोली और अपराध के कड़वे मनोवैज्ञानिक सच पर आधारित रहा है।

दूसरी ओर, 'केजीएफ', 'एनिमल' और अब 'टॉक्सिक' जैसे नए जमाने के प्रोजेक्ट्स गैंगस्टर की दुनिया को एक स्टाइलाइज्ड, ग्राफिक-नॉवेल जैसे कॉस्मेटिक और विजुअली हाइपर-रियलिस्टिक अंदाज में पेश करते हैं। फिल्म जानकारों का मानना है कि आरजीवी अक्सर इस बात की आलोचना करते रहे हैं कि आधुनिक सिनेमा में कहानी के भावनात्मक ठहराव और वास्तविक दर्द की जगह सिर्फ हाई-वोल्टेज बैकग्राउंड म्यूजिक, लाउड गनशॉट्स और कॉस्ट्यूम ड्रामा ने ले ली है। यही वैचारिक मतभेद उनके इस ताजा पोस्ट में साफ झलकता नजर आ रहा है।

'धुरंधर' का असली कनेक्शन क्या है? रणवीर सिंह और आदित्य धर की फिल्म से जुड़ाव

इस विवाद में 'धुरंधर' शब्द के आने से एक और बड़ा कोण सामने आ गया है। बॉलीवुड निर्देशक आदित्य धर (जिन्होंने 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' बनाई थी) अभिनेता रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन और अक्षय खन्ना के साथ 'धुरंधर' (Dhurandhar) नामक एक बड़े बजट की इंटेंस स्पाई-एक्शन थ्रिलर फिल्म पर काम कर रहे हैं।

कुछ सोशल मीडिया विश्लेषकों का यह भी मानना है कि आरजीवी का पोस्ट केवल 'टॉक्सिक' पर कटाक्ष नहीं था, बल्कि वे बॉलीवुड और साउथ के एक्शन सिनेमा के बीच बनने वाले आगामी टकराव की ओर इशारा कर रहे थे। उनका संकेत यह हो सकता है कि भविष्य में जब इस तरह के वास्तविक और इंटेंस प्रोजेक्ट्स आएंगे, तब आज के तथाकथित डार्क प्रोजेक्ट्स को असली चुनौती का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, जिस टाइमिंग पर यह पोस्ट आया है, उसने इसे 'टॉक्सिक' बनाम आरजीवी की बहस में तब्दील कर दिया है।

यश के फैंस और आरजीवी समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर महायुद्ध

आरजीवी का यह कथित तंज सामने आते ही 'रॉकिंग स्टार' यश के लाखों डाई-हार्ड फैंस मैदान में उतर आए। यश की सेना ने आरजीवी के कमेंट सेक्शन को घेर लिया और उनके पुराने असफल प्रोजेक्ट्स (जैसे 'आग' या हालिया बी-ग्रेड थ्रिलर्स) के मीम्स शेयर करते हुए उन्हें करारा जवाब देना शुरू कर दिया। एक यूजर ने लिखा, "जब अपनी खुद की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर पानी मांगने लगती हैं, तो दूसरों की 100 करोड़ी ओपनिंग देखकर ज्ञान देना सबसे आसान काम होता है।"

वहीं दूसरी तरफ, आरजीवी के पुराने सिनेमाई दर्शन के समर्थकों ने उनका बचाव करते हुए कहा कि आरजीवी ने जो कहा है वह सिनेमाई दृष्टिकोण से एक वैध आलोचना है। उनका कहना था कि हर बड़ी फिल्म को केवल बॉक्स ऑफिस नंबरों के तराजू पर नहीं तौला जाना चाहिए; पटकथा की मजबूती और किरदारों की गहराई पर सवाल उठाना किसी भी अनुभवी फिल्ममेकर का अधिकार है।

आरजीवी का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड: कभी तारीफ तो कभी भारी ट्रोलिंग

यह पहली बार नहीं है जब राम गोपाल वर्मा ने किसी पैन-इंडिया फिल्म को लेकर ऐसा विवादित रुख अपनाया हो। आरजीवी का इतिहास रहा है कि वे अक्सर बड़े स्टार्स की फिल्मों पर ऐसे बयान देते हैं जो चर्चा का केंद्र बन जाते हैं:

  • 'केजीएफ: चैप्टर 2' के समय भी उन्होंने फिल्म की भारी सफलता को स्वीकार करते हुए एक ट्वीट में कहा था कि इस फिल्म ने बॉलीवुड के पुराने निर्देशकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे अब तक क्या कचरा बना रहे थे।

  • 'आरआरआर' और 'बाहुबली' के समय उन्होंने एसएस राजामौली की तारीफ करते हुए उन्हें 'सिनेमा का भगवान' बताया था, लेकिन साथ ही अन्य निर्देशकों के अस्तित्व पर व्यंग्य कसा था।

  • रणबीर कपूर की 'एनिमल' के रिलीज के समय भी उन्होंने संदीप रेड्डी वांगा को एक क्रांतिकारी डायरेक्टर बताया था, जिसने सभी तथाकथित बुद्धिजीवियों के ढकोसले को तोड़ दिया।

आरजीवी का यह स्वभाव रहा है कि वे पहले किसी ट्रेंड को तीखे शब्दों में चुनौती देते हैं और फिर जब उस पर बड़ा विवाद खड़ा हो जाता है, तो एक नया स्पष्टीकरण देकर मामले को और अधिक दिलचस्प बना देते हैं।

'टॉक्सिक' की टीम की गरिमापूर्ण चुप्पी: बॉक्स ऑफिस के आंकड़े दे रहे जवाब

इस पूरे सोशल मीडिया ड्रामे पर 'टॉक्सिक' के मेकर्स, निर्देशक गीतू मोहनदास या सुपरस्टार यश की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि यश और उनकी टीम इस तरह के ऑनलाइन विवादों और अप्रत्यक्ष तंजों से पूरी तरह दूर रहना पसंद करती है।

मेकर्स का पूरा ध्यान फिल्म के वर्ल्डवाइड डिस्ट्रीब्यूशन, कलेक्शन और आने वाले वीकेंड के प्रमोशन पर है। पहले ही दिन दुनिया भर से 140 करोड़ से अधिक का ग्रॉस कलेक्शन जुटाकर 'टॉक्सिक' ने यह साबित कर दिया है कि दर्शकों का एक बहुत बड़ा वर्ग इस नए विजुअल स्टाइल और डार्क नैरेटिव को पूरे दिल से स्वीकार कर रहा है।

सिनेमाई बहस का सकारात्मक पहलू: क्या इससे फिल्म की पब्लिसिटी को मिल रहा फायदा?

पीआर और मार्केटिंग विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़ी फिल्म के रिलीज के समय राम गोपाल वर्मा जैसे हाई-प्रोफाइल और विवादित व्यक्तित्व का कोई भी पोस्ट, चाहे वह तारीफ हो या आलोचना, फिल्म के लिए एक मुफ्त के 'मेगा-प्रमोशन' की तरह काम करता है।

आरजीवी के इस पोस्ट ने 'टॉक्सिक' की कहानी, उसके जॉनर और उसके ट्रीटमेंट को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बौद्धिक और सिनेमाई बहस छेड़ दी है। जो लोग केवल सामान्य दर्शक थे, वे भी अब यह जानने के लिए सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या दिखाया गया है जिस पर इंडस्ट्री के बड़े-बड़े दिग्गज दो खेमों में बंट गए हैं। अंततः, बॉक्स ऑफिस की दुनिया में हर तरह की चर्चा फिल्म के पक्ष में ही जाती है, और आरजीवी का यह 'इशारों का खेल' इस बात की एक और मिसाल बन गया है।