धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म रिलीज होनी है बाकी: 89 की उम्र में स्वतंत्रता सेनानी के रोल में आएंगे नजर, भावुक हुए फैंस
भारतीय सिनेमा के ओरिजिनल ही-मैन धर्मेंद्र पिछले छह दशकों से अधिक समय से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं। उम्र के 89वें पड़ाव में पहुंचकर भी उनका अभिनय के प्रति जुनून जरा भी कम नहीं हुआ है। हाल के वर्षों में 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' और 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया' जैसी फिल्मों में अपनी सहज अदाकारी से तालियां बटोरने के बाद अब धर्मेंद्र की एक और बेहद खास और भावनात्मक फिल्म रिलीज होने की कतार में है। इस फिल्म को कई मायनों में उनके करियर की सबसे यादगार और संभवतः बतौर मुख्य चरित्र कलाकार उनकी आखिरी बड़ी फिल्मों में से एक माना जा रहा है, जिसमें वह एक देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में पर्दे पर अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने वाले हैं।
इस बहुचर्चित फिल्म का नाम है 'इक्कीस' (Ikkis), जिसका निर्देशन बॉलीवुड के मंझे हुए फिल्ममेकर श्रीराम राघवन ने किया है। जैसे ही यह खबर सामने आई कि धर्मेंद्र इस ऐतिहासिक वॉर-बायोपिक में एक बेहद संवेदनशील भूमिका में नजर आने वाले हैं, वैसे ही उनके करोड़ों चाहने वालों के बीच जबरदस्त उत्सुकता और भावुकता का माहौल बन गया है।
श्रीराम राघवन की फिल्म 'इक्कीस' और धर्मेंद्र का ऐतिहासिक किरदार
'इक्कीस' दरअसल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के अमर नायक और भारत के सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की शौर्यगाथा पर आधारित है। फिल्म में अरुण खेत्रपाल का मुख्य किरदार अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा निभा रहे हैं। वहीं, इस पूरी कहानी का सबसे मजबूत और भावनात्मक स्तंभ धर्मेंद्र का किरदार है।
धर्मेंद्र फिल्म में अरुण खेत्रपाल के पिता ब्रिगेडियर मदन लाल खेत्रपाल की भूमिका निभा रहे हैं। ब्रिगेडियर एम.एल. खेत्रपाल न सिर्फ एक सम्मानित सैन्य अधिकारी थे, बल्कि वह देश की आजादी की लड़ाई से जुड़े मूल्यों और सेना के गौरवशाली इतिहास के प्रतीक रहे हैं। फिल्म में उनके किरदार के जरिए उस दौर के एक पिता के बलिदान, राष्ट्रप्रेम और अपने वीर सपूत को खोने के असहनीय दर्द को बेहद मार्मिक ढंग से पर्दे पर उतारा गया है।
89 की उम्र में भी कैमरे के सामने झोंकी पूरी ताकत
सेट से जुड़े सूत्रों और खुद निर्देशक श्रीराम राघवन के मुताबिक, धर्मेंद्र ने इस उम्र में भी अपनी भूमिका की तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी। शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र का अनुशासन और जोश देखकर युवा कलाकार भी दंग रह गए थे। कई भावुक और भारी दृश्यों में उन्होंने बिना किसी ग्लिसरीन के अपनी स्वाभाविक आंखों की नमी से पूरे सेट को सन्न कर दिया था।
धर्मेंद्र हमेशा से ही देश, मिट्टी और फौजियों से गहरा लगाव रखते आए हैं। 60 के दशक में चेतन आनंद की कल्ट क्लासिक वॉर फिल्म 'हकीकत' से लेकर बाद में जे.पी. दत्ता की ब्लॉकबस्टर 'बॉर्डर' तक, धर्मेंद्र जब भी वर्दी या देशभक्ति के कैनवास पर उतरे हैं, उन्होंने इतिहास रचा है। ऐसे में 'इक्कीस' में उनका यह रूप उनके प्रशंसकों के लिए किसी भावुक तोहफे से कम नहीं होगा।
अगस्त्य नंदा और जयदीप अहलावत के साथ पावरफुल स्क्रीन प्रेजेंस
फिल्म 'इक्कीस' में केवल धर्मेंद्र ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्री के बेहतरीन कलाकारों की टोली शामिल है। जोया अख्तर की 'द आर्चीज' से डेब्यू करने वाले अगस्त्य नंदा के लिए यह फिल्म उनके अभिनय की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है, जहां उन्हें धर्मेंद्र जैसे लीजेंड के साथ स्क्रीन स्पेस साझा करने का मौका मिला है।
इसके साथ ही प्रतिभाशाली अभिनेता जयदीप अहलावत भी इस वॉर-ड्रामा में एक बहुत ही अहम और सशक्त भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के निर्माता दिनेश विजन (मैडॉक फिल्म्स) हैं, जो कंटेंट-ड्रिवन और बड़े बजट की फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। मेकर्स ने इस फिल्म के युद्ध दृश्यों और 1971 की बसंतर की लड़ाई (Battle of Basantar) को री-क्रिएट करने के लिए बड़े पैमाने पर रिसर्च और वीएफएक्स का सहारा लिया है।
करियर के अंतिम पड़ाव पर सिनेमाई विदाई या नई शुरुआत?
सोशल मीडिया पर फैंस इस बात को लेकर बेहद भावुक हैं कि क्या 'इक्कीस' धर्मेंद्र की आखिरी रिलीज होने वाली फीचर फिल्म होगी। धर्मेंद्र ने 1960 में 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' से अपनी यात्रा शुरू की थी और 300 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं। उम्र के इस दौर में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद सिनेमा के प्रति उनका यह समर्पण प्रेरणादायक है।
दर्शकों का मानना है कि यदि यह उनकी आखिरी फिल्म साबित होती है, तो एक सच्चे देशभक्त और वीर सैनिक के पिता का किरदार उनके छह दशक लंबे स्वर्णिम करियर की सबसे शानदार और गौरवपूर्ण विदाई साबित होगा। सिनेमाप्रेमी अब बेसब्री से उस तारीख का इंतजार कर रहे हैं जब बड़े पर्दे पर एक बार फिर ही-मैन अपनी गरजदार आवाज और आंखों के भावों से सिनेमाघरों में सन्नाटा खींच देंगे।