₹2 करोड़ के बजट वाली फिल्म से ₹400 करोड़ की कमाई? 'हनुमान अंश' के चमत्कार पर बोले एक्सपर्ट— 'अभी तो बस शुरुआत है'

₹2 करोड़ के बजट वाली फिल्म से ₹400 करोड़ की कमाई? 'हनुमान अंश' के चमत्कार पर बोले एक्सपर्ट— 'अभी तो बस शुरुआत है'

सिनेमा के इतिहास में दशकों बाद एक ऐसा दौर देखने को मिल रहा है, जहां करोड़ों के पीआर कैंपेन, बड़े-बड़े फिल्मी सितारे और हाई-बजट वीएफएक्स को पछाड़कर महज 2 करोड़ रुपये में बनी एक सात्विक और आध्यात्मिक फिल्म ने पूरे देश को अपना दीवाना बना दिया है। हम बात कर रहे हैं आध्यात्मिक संत नीम करोली बाबा के पावन जीवन और उनके भक्तों के चमत्कारों पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' की।

7 अगस्त को जब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, तब इसे देखने मुट्ठी भर लोग भी नहीं पहुंचे थे। पहले दिन की कमाई महज 10 लाख रुपये के आसपास थी और इसे नाममात्र स्क्रीन्स दी गई थीं। लेकिन रिलीज के 32 दिनों के भीतर जो करिश्मा देखने को मिला, उसने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े एनालिस्ट्स को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है। फिल्म अब तक 130 करोड़ रुपये से अधिक का जबर्दस्त कलेक्शन कर चुकी है और अब यह देश भर में 1300 से ज्यादा स्क्रीन्स पर शान से चल रही है।

ट्रेड एक्सपर्ट्स की बड़ी भविष्यवाणी: क्या ₹400 करोड़ तक जाएगा कलेक्शन?

आमतौर पर किसी भी फिल्म की कमाई 4 हफ्तों के बाद लगभग खत्म हो जाती है, लेकिन 'हनुमान अंश' के मामले में हर गुजरते हफ्ते के साथ थिएटर्स में दर्शकों की भीड़ बढ़ती जा रही है। ट्रेड पंडितों का मानना है कि इस फिल्म का सफर अभी थमने वाला नहीं है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक आंकड़े की ओर बढ़ रही है।

  • अतुल मोहन (ट्रेड एनालिस्ट): ट्रेड एक्सपर्ट अतुल मोहन ने फिल्म की असीम संभावनाओं पर बात करते हुए कहा, "हो सकता है कि फिल्म अगले हफ्ते इस हफ्ते से भी ज्यादा कमाई करे। अभी तो बस शुरुआत है। यह कहीं भी जा सकती है। 200 करोड़, 300 करोड़ और यहां तक कि 400 करोड़ रुपये का लाइफटाइम कलेक्शन भी संभव दिख रहा है। अब तो कई स्कूल और सामाजिक संस्थाएं बच्चों को सामूहिक रूप से यह फिल्म दिखाने की प्लानिंग कर रहे हैं।"

  • तरण आदर्श (फिल्म समीक्षक व ट्रेड एनालिस्ट): तरण आदर्श ने फिल्म को एक 'केस स्टडी' करार देते हुए कहा कि पहले मेकर्स को 'एक टिकट पर एक फ्री' जैसी स्कीम्स का सहारा लेना पड़ा था क्योंकि उनके पास प्रचार का कोई और साधन नहीं था। लेकिन आज जनता ही इस फिल्म की सबसे बड़ी ब्रांड एंबेसडर बन चुकी है। उन्होंने कहा कि अगर फिल्म अपने 8वें वीकेंड पर 5वें वीकेंड से ज्यादा कमाई कर ले, तो कोई अचंभा नहीं होगा।

  • गिरीश जौहर: फिल्म बिजनेस एक्सपर्ट गिरीश जौहर ने कहा कि जब आस्था और जुनून से जुड़ी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दौड़ती हैं, तो उनके लिए कोई सीमा तय नहीं की जा सकती। इसे 200 करोड़ तक सीमित रखना जल्दबाजी होगी।

'जय संतोषी मां' जैसा भक्तिमय मंजर: नंगे पांव थिएटर पहुंच रहे लोग

फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने इस फिल्म की तुलना 1975 की ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर 'जय संतोषी मां' से करते हुए एक भावुक पहलू साझा किया। उन्होंने बताया कि पुराने जमाने में लोग आरती की थाली लेकर और जूते-चप्पल थिएटर के बाहर उतारकर सिनेमाहॉल में प्रवेश करते थे।

ठीक वैसा ही दृश्य आज 'हनुमान अंश' के लिए देखा जा रहा है। कई शहरों से ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं जहां दर्शक 200-250 किलोमीटर का सफर तय करके फिल्म देखने पहुंच रहे हैं और थिएटर के भीतर भगवान हनुमान और नीम करोली बाबा के जयकारे गूंज रहे हैं। दर्शक इसे फिल्म के रूप में नहीं, बल्कि एक दिव्य दर्शन और सत्संग की तरह अनुभव कर रहे हैं।

वरुण धवन और आदित्य धर के सपोर्ट से मिली नई उड़ान

विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को तब और बड़ा बूस्ट मिला जब बॉलीवुड के बड़े निर्देशकों और एक्टर्स ने इसका समर्थन किया। 'धुरंधर' और 'उरी' जैसी मेगा-ब्लॉकबस्टर फिल्मों के डायरेक्टर आदित्य धर ने फिल्म का पोस्टर शेयर कर इसे दिल से सपोर्ट किया।

वहीं अभिनेता वरुण धवन ने अपनी मां के साथ यह फिल्म देखने के बाद एक वीडियो संदेश जारी कर हर भारतीय को अपने माता-पिता के साथ थिएटर जाने की अपील की थी। इसके साथ ही 'केजीएफ' और 'कांतारा' फेम होम्बले फिल्म्स ने अब इस फिल्म को 11 सितंबर से दुनियाभर के विदेशी सिनेमाघरों में भी व्यापक पैमाने पर रिलीज करने का फैसला किया है, जिससे इसके वर्ल्डवाइड कलेक्शन में भारी उछाल आने की पूरी उम्मीद है।

प्रॉफिट के मामले में तोड़े सारे रिकॉर्ड

यदि यह फिल्म 200 से 400 करोड़ का जादुई आंकड़ा छूने में कामयाब रहती है, तो यह भारतीय सिनेमा के 100 से अधिक वर्षों के इतिहास में सबसे ज्यादा रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट (ROI) देने वाली ऑल-टाइम नंबर-1 फिल्म बन जाएगी। महज 2 करोड़ के बजट पर 400 करोड़ का कारोबार यानी 20,000 फीसदी का अकल्पनीय मुनाफा! यह सफलता साबित करती है कि दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए चकाचौंध से ज्यादा कहानी की सच्चाई और आस्था की शक्ति मायने रखती है।