मां वैष्णों देवी से लेकर हनुमान जी पर बनी हैं ये 5 बेस्ट भक्ति फिल्में: बॉक्स ऑफिस पर मचाया गदर, IMDb रेटिंग देख चौंक जाएंगे आप

मां वैष्णों देवी से लेकर हनुमान जी पर बनी हैं ये 5 बेस्ट भक्ति फिल्में: बॉक्स ऑफिस पर मचाया गदर, IMDb रेटिंग देख चौंक जाएंगे आप

हिंदी सिनेमा के इतिहास में पौराणिक और धार्मिक फिल्मों का एक अलग ही प्रभाव रहा है। 40 के दशक से लेकर आज के आधुनिक दौर तक भगवान श्रीराम, महादेव, माता वैष्णों देवी और संकटमोचन हनुमान जी की भक्ति पर बनी फिल्मों को दर्शकों ने सिर-माथे पर बिठाया है। जब-जब बड़े पर्दे पर आस्था, समर्पण और ईश्वरीय चमत्कारों को बिना किसी मिलावट के सच्चे भाव से दिखाया गया, तब-तब दर्शकों ने सिनेमाघरों को मंदिर बना दिया।

आस्था से लबरेज इन फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर IMDb रेटिंग्स के मामले में भी बड़ी-बड़ी कमर्शियल फिल्मों को बहुत पीछे छोड़ दिया। आइए जानते हैं हिंदी सिनेमा की उन 5 सबसे बेहतरीन और लोकप्रिय भक्ति फिल्मों के बारे में, जिनकी IMDb रेटिंग आज भी लोगों को हैरान कर देती है।

1. संपूर्ण रामायण (1961) – IMDb रेटिंग: 7.8/10

रामानंद सागर की ऐतिहासिक टीवी सीरीज 'रामायण' के आने से कई दशक पहले साल 1961 में दिग्गज निर्देशक बाबूभाई मिस्त्री ने बड़े पर्दे पर 'संपूर्ण रामायण' का निर्माण किया था। इस फिल्म में भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर सीता स्वयंवर, वनवास, रावण वध और लव-कुश तक की संपूर्ण गाथा को बेहद मार्मिक ढंग से दिखाया गया था।

फिल्म में अभिनेता महिपाल ने भगवान राम और अनीता गुहा ने माता सीता का अमर किरदार निभाया था, जबकि सुलोचना लाटकर भी अहम भूमिका में थीं। उस दौर की सीमित तकनीकी सुविधाओं के बावजूद फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स और गीतों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया था। बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त हिट रही इस क्लासिक फिल्म को IMDb पर 7.8 की शानदार रेटिंग हासिल है।

2. जय संतोषी मां (1975) – IMDb रेटिंग: 6.6/10

साल 1975 में जब 'शोले' और 'दीवार' जैसी एक्शन फिल्मों का बोलबाला था, उसी दौर में रिलीज हुई विजय शर्मा निर्देशित फिल्म 'जय संतोषी मां' ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कार किया जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। फिल्म की कहानी माता संतोषी की भक्ति, 16 शुक्रवार के व्रत कथा और भक्त की सच्ची आस्था के इर्द-गिर्द घूमती है।

अभिनेत्री अनीता गुहा ने फिल्म में मां संतोषी का दिव्य रूप साकार किया था। महज 25 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने उस दौर में 5 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया था। यह फिल्म लगभग 51 सालों तक भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा मुनाफा (ROI) कमाने वाली फिल्मों में शीर्ष पर काबिज रही। लोग सिनेमाघरों के बाहर जूते-चप्पल उतारकर और अगरबत्ती जलाकर थिएटर्स में प्रवेश करते थे। IMDb पर इसे 6.6 की रेटिंग मिली हुई है।

3. चार धाम (1997) – IMDb रेटिंग: 8.9/10

साल 1997 में रिलीज हुई निर्देशक शांतिलाल सोनी की फिल्म 'चार धाम' भारतीय तीर्थस्थलों और आस्था के ताने-बाने पर बुनी गई एक भावुक कहानी है। फिल्म में नरेंद्र कुमार और पूजा घई रावल ने मुख्य किरदार निभाए थे। कहानी एक ऐसे परिवार के मुखिया की थी जो परिस्थितियों के चलते अपनों से बिछड़ जाता है और फिर भारत के पवित्र चार धामों की तीर्थ यात्रा के दौरान चमत्कारी रूप से अपने परिवार से दोबारा मिलता है।

लगभग 60 लाख रुपये के बजट में बनी यह फिल्म उस समय बॉक्स ऑफिस पर केवल 22 लाख रुपये ही कमा सकी थी और वित्तीय रूप से असफल रही थी। लेकिन टेलीविजन और घरेलू वीडियो के माध्यम से इस फिल्म को दर्शकों का अपार प्यार मिला। अपनी गहरी भावनात्मक कहानी और तीर्थ यात्रा के आध्यात्मिक चित्रण के दम पर इस फिल्म को IMDb पर 8.9 की अविश्वसनीय रेटिंग प्राप्त है।

4. मां वैष्णों देवी (1994) – IMDb रेटिंग: 8.2/10

साल 1994 में माता रानी की महिमा और नवमी के व्रत पर आधारित फिल्म 'मां वैष्णों देवी' रिलीज हुई थी। इस फिल्म की कहानी एक ऐसे नि:संतान दंपति पर आधारित है जो लंबे समय तक औलाद के सुख से वंचित रहते हैं। जब वे सच्चे मन से माता वैष्णों देवी के नवमी के पावन व्रत रखते हैं, तो साक्षात माता उनके घर बाल रूप में पधारती हैं और उनके जीवन के सारे कष्ट हर लेती हैं।

इस फिल्म ने 90 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर बंपर सफलता हासिल की थी। आज भी हर साल नवरात्रि और रामनवमी के दौरान देश के लगभग हर टीवी चैनल पर यह फिल्म प्रसारित की जाती है। इसके मधुर भजनों और माता के चमत्कारों ने इसे घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। IMDb पर इस फिल्म को 8.2 की जबर्दस्त रेटिंग मिली है।

5. हनुमान अंश – IMDb रेटिंग: 9.1/10

इस प्रतिष्ठित सूची में सबसे नया और सबसे बड़ा नाम जुड़ा है फिल्म 'हनुमान अंश' का। पवनपुत्र हनुमान जी के अनन्य भक्त और आधुनिक युग के महान आध्यात्मिक संत पूज्य नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित इस फिल्म ने हाल के दिनों में बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण बदल दिए हैं। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की यह फिल्म रिलीज के शुरुआती हफ्तों में शांत रही, लेकिन तीसरे हफ्ते से इसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में ऐतिहासिक सुनामी आ गई।

महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी यह फिल्म अब तक 120 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुकी है और 'जय संतोषी मां' का 51 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर देश की सबसे ज्यादा प्रॉफिट कमाने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म में हनुमान भक्ति और बाबा के परोपकार को जिस पवित्रता से दर्शाया गया है, उसने हर दर्शक को रोने पर मजबूर कर दिया। IMDb पर इस फिल्म को 9.1 की रिकॉर्ड-तोड़ रेटिंग मिली है, जो किसी भी भारतीय भक्ति फिल्म के लिए अब तक की सबसे अधिक रेटिंग्स में से एक है।

क्यों आज भी प्रासंगिक हैं ये भक्ति फिल्में?

चाहे 1961 की 'संपूर्ण रामायण' हो, 1975 की 'जय संतोषी मां', 90 के दशक की 'मां वैष्णों देवी' या मौजूदा दौर की 'हनुमान अंश'—इन सभी फिल्मों की सफलता का मूल आधार सिर्फ एक ही रहा है: आस्था और सादगी। ये फिल्में साबित करती हैं कि भारतीय दर्शकों को आकर्षित करने के लिए महंगे तामझाम या भारी स्टारकास्ट की जरूरत नहीं होती, बल्कि अगर कहानी में ईश्वरीय शक्ति और निष्ठा का सच्चा भाव हो, तो वह दशकों तक अमर रहती है।