Hema Malini Review on Batwara 1947: सनी देओल की 'बंटवारा 1947' देख भावुक हुईं हेमा मालिनी, सौतेले पोते करण के काम पर लुटाया प्यार, आमिर खान को दी बधाई
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और पंजाब के गुरदासपुर से पूर्व सांसद सनी देओल की हालिया रिलीज पीरियड ड्रामा फिल्म 'बंटवारा 1947' इन दिनों फिल्मी गलियारों और दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस ऐतिहासिक फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इसी बीच सनी देओल और पूरे देओल परिवार के लिए सबसे बड़ा और सुखद समर्थन घर के भीतर से सामने आया है। बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' और मथुरा से सांसद हेमा मालिनी ने बड़े पर्दे पर यह फिल्म देखने के बाद इसकी दिल खोलकर तारीफ की है। हेमा मालिनी ने न केवल अपने सौतेले बेटे सनी देओल के सशक्त अभिनय की सराहना की, बल्कि फिल्म में अहम किरदार निभा रहे अपने सौतेले पोते करण देओल के काम पर भी गर्व जताया है। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म के निर्माता आमिर खान और निर्देशक राजकुमार संतोषी को एक प्रासंगिक और मानवीय संदेश देने वाली फिल्म बनाने के लिए बधाई दी है।
'बंटवारा 1947' देख भावुक हुईं हेमा मालिनी: सोशल मीडिया पर लिखा दिल छू लेने वाला नोट
दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म का विस्तृत और भावुक रिव्यू साझा किया। हेमा मालिनी ने फिल्म के गहरे सामाजिक संदेश को रेखांकित करते हुए लिखा कि उन्होंने 'बंटवारा 1947' देखी और यह सच में एक बेहद शानदार व प्रभावशाली सिनेमाई रचना है।
हेमा मालिनी ने अपनी पोस्ट में लिखा, "मैंने कल फिल्म 'बंटवारा' देखी। यह वास्तव में एक असाधारण और उत्कृष्ट फिल्म है, जो एक बेहद स्पष्ट और सुंदर संदेश देती है जिसकी आज हमारे पूरे देश को सख्त जरूरत है। यह फिल्म हमें यह कड़वी सच्चाई याद दिलाती है कि नफरत, मजहबी दीवारें और सरहदों के बंटवारे से कहीं ज्यादा जरूरी इंसानियत, आपसी सम्मान, प्रेम और भाईचारा है। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस फिल्म का यह मानवीय संदेश लोगों की संकीर्ण सोच को बदलने और नफरत के बदले करुणा व दयालुता का रास्ता चुनने के लिए प्रेरित करेगा।"
सौतेले पोते करण देओल और सनी के अभिनय पर फिदा: शबाना आजमी और प्रीति जिंटा की भी सराहना
फिल्म में कलाकारों के अभिनय की चर्चा करते हुए हेमा मालिनी ने विशेष रूप से सनी देओल और दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी के काम को सर्वोच्च स्तर का बताया। उन्होंने लिखा कि राजकुमार संतोषी का निर्देशन हमेशा की तरह बेमिसाल है और सनी देओल तथा शबाना आजमी ने अपने किरदारों में जान फूंक दी है।
इसके साथ ही हेमा मालिनी ने अपने सौतेले पोते करण देओल के अभिनय की भी विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने लिखा कि करण देओल और प्रीति जिंटा ने भी कहानी में बेहद सधा हुआ और प्रभावशाली अभिनय किया है। आपको बता दें कि करण देओल फिल्म में एक संवेदनशील नौजवान की भूमिका निभा रहे हैं, जो विभाजन की त्रासदी के बीच अपने परिवार और आदर्शों की रक्षा करता है। दादी हेमा मालिनी द्वारा सार्वजनिक रूप से करण के काम की सराहना किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस इसे देओल परिवार के आपसी प्रेम और सकारात्मक जुड़ाव का खूबसूरत प्रतीक बता रहे हैं।
आमिर खान और राजकुमार संतोषी को दी विशेष बधाई: 'सदाबहार और समय की मांग वाली फिल्म'
हेमा मालिनी ने अपनी पोस्ट के अंत में फिल्म के मुख्य निर्माता आमिर खान (आमिर खान प्रोडक्शंस) का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें ऐसी साहसी और संवेदनशील फिल्म बनाने के लिए बधाई दी। उन्होंने लिखा, "आमिर खान को ऐसी सदाबहार (टाइमलेस) और कालजयी फिल्म का निर्माण करने के लिए बहुत-बहुत बधाई, जिसका संदेश वास्तव में वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग है।"
फिल्म 'बंटवारा 1947' के जरिए निर्देशक राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी ने लगभग 30 साल बाद एक साथ वापसी की है। इससे पहले इस जोड़ी ने 'घायल', 'दामिनी' और 'घातक' जैसी हिंदी सिनेमा की ऐतिहासिक और कल्ट क्लासिक फिल्में दी हैं। ऐसे में सिनेमा प्रेमियों के लिए इस जोड़ी का दोबारा साथ आना अपने आप में एक बड़ा भावनात्मक क्षण है।
असगर वजाहत के कालजयी नाटक पर आधारित है कहानी: दर्द और इंसानियत की दास्तान
फिल्म 'बंटवारा 1947' प्रख्यात साहित्यकार असगर वजाहत के मशहूर और कालजयी नाटक 'जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ए नई' का आधिकारिक फिल्मी रूपांतरण है।
फिल्म की कहानी 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के उस भयानक दौर को पर्दे पर जीवंत करती है, जब करोड़ों लोग बेघर हो गए थे और मजहबी दंगों की आग में इंसानियत झुलस रही थी। कहानी एक ऐसे मुस्लिम शरणार्थी परिवार की है, जो भारत से पलायन कर लाहौर पहुंचता है और उन्हें वहां एक विशाल हवेली अलॉट की जाती है। लेकिन हवेली में पहुंचने पर उन्हें पता चलता है कि वहां पहले से ही एक बुजुर्ग हिंदू महिला (शबाना आजमी) रह रही हैं, जिन्होंने अपने पैतृक घर और शहर को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है।
शुरुआती नफरत, अविश्वास और दंगाइयों के खौफ के बीच धीरे-धीरे कैसे दोनों परिवारों के बीच इंसानियत, ममता और भाईचारे का रिश्ता जन्म लेता है, यही इस फिल्म का मुख्य केंद्र बिंदु है। फिल्म का संगीत ऑस्कर विजेता संगीतकार ए. आर. रहमान ने तैयार किया है, जबकि इसके अर्थपूर्ण और मर्मस्पर्शी गीत जावेद अख्तर ने लिखे हैं।
बॉक्स ऑफिस पर कैसा रहा 'बंटवारा 1947' का हाल? 'आवारापन 2' से मिला कड़ा मुकाबला
स्वतंत्रता दिवस के लंबे वीकेंड पर रिलीज होने के बावजूद 'बंटवारा 1947' को बॉक्स ऑफिस पर भारी प्रतिस्पर्धा और संघर्ष का सामना करना पड़ा है। 14 अगस्त को रिलीज हुई इस फिल्म का सीधा मुकाबला इमरान हाशमी की बहुचर्चित 'आवारापन 2' और साउथ सुपरस्टार सूर्या की पारिवारिक ड्रामा 'विश्वनाथ एंड सन्स' से हुआ।
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ओपनिंग डे (शुक्रवार): फिल्म ने पहले दिन धीमी शुरुआत करते हुए लगभग 5.75 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया।
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दूसरा दिन (शनिवार / 15 अगस्त): स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी का लाभ उठाते हुए फिल्म ने 140 प्रतिशत से अधिक की जबर्दस्त छलांग लगाई और 13.50 करोड़ रुपये बटोरे।
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तीसरा दिन (रविवार): रविवार को फिल्म की कमाई में गिरावट दर्ज की गई और इसने 7.25 करोड़ रुपये कमाए।
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कुल वीकेंड कलेक्शन: अपने पहले तीन दिनों में फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर लगभग 26.50 से 27.38 करोड़ रुपये का कारोबार किया है।
ट्रेड जानकारों का मानना है कि फिल्म का विषय गंभीर और संवेदनशील होने के कारण इसे बड़े शहरों और मल्टीप्लेक्स में सराहना मिल रही है, लेकिन मास सर्किट्स में यह 'आवारापन 2' के जबर्दस्त क्रेज के आगे थोड़ी पिछड़ गई। हालांकि, फिल्म समीक्षकों का कहना है कि यह एक ऐसी फिल्म है जिसे आने वाले समय में इसके संदेश और अभिनय के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
देओल परिवार का आपसी रिश्ता और एकजुटता: हेमा मालिनी का यह कदम क्यों है बेहद खास?
हेमा मालिनी का सार्वजनिक रूप से सनी देओल और करण देओल की फिल्म का समर्थन करना सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोर रहा है। अक्सर मीडिया में धर्मेंद्र के दोनों परिवारों (प्रकाश कौर और हेमा मालिनी) के बीच दूरियों और मतभेदों को लेकर कयास लगाए जाते रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में चाहे करण देओल की शादी हो, सनी देओल की फिल्म 'गदर 2' की अपार सफलता का जश्न हो या अब 'बंटवारा 1947' का रिव्यू, दोनों परिवारों ने हमेशा एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम दिखाया है।
हेमा मालिनी ने पूर्व में दिए एक साक्षात्कार में भी स्पष्ट किया था कि "सनी और बॉबी दोनों बहुत प्यारे और संस्कारी हैं। हम सब एक खुशहाल परिवार हैं और हमारे बीच बहुत अच्छा तालमेल है। हम हर बात का ढिंढोरा नहीं पीटते, लेकिन हम हमेशा एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं।" हेमा मालिनी का यह ताजा रिव्यू साबित करता है कि धर्मेंद्र के संस्कारों और पारिवारिक एकता की सीख को पूरा परिवार आज भी पूरी निष्ठा से निभा रहा है।
नफरत के दौर में इंसानियत और भाईचारे का पैगाम देती फिल्म
वर्तमान दौर में जब सिनेमा में हिंसा और आक्रामकता का बोलबाला है, ऐसे समय में 'बंटवारा 1947' जैसी फिल्में दर्शकों को अपने अतीत के दर्द से सीख लेकर भविष्य में प्रेम और शांति से रहने का मार्ग दिखाती हैं। हेमा मालिनी की यह सकारात्मक समीक्षा निस्संदेह फिल्म की टीम का मनोबल बढ़ाएगी और उन दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में मदद करेगी जो सार्थक, विचारोत्तेजक और भावनात्मक सिनेमा देखने के शौकीन हैं।