चलती ट्रेन की छत पर रचा गया था इतिहास, जानिए किस महान गीतकार की कलम से निकला शाहरुख खान के करियर का सबसे आइकॉनिक गाना 'छैयां छैयां'
भारतीय सिनेमा के 100 से अधिक वर्षों के इतिहास में कुछ ऐसे गाने बने हैं जो समय, भूगोल और पीढ़ियों की सीमाओं को लांघकर अमर हो जाते हैं। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और ऊर्जा से लबरेज गीत है वर्ष 1998 में रिलीज हुई निर्देशक मणि रत्नम की उत्कृष्ट फिल्म 'दिल से..' (Dil Se..) का मास्टरपीस ट्रैक—"चल छैयां छैयां"। जब भी यह गाना बजता है, कानों में ढोलक और डफली की गूंज, सुखविंदर सिंह की बुलंदी भरी आवाज और आंखों के सामने नीलगिरि की वादियों में चलती छुक-छुक ट्रेन की छत पर लाल जैकेट पहने थिरकते बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान का चेहरा तैर जाता है। यह केवल एक गाना नहीं, बल्कि भारतीय संगीत, सिनेमा और कोरियोग्राफी का एक ऐसा मील का पत्थर है जिसने वैश्विक स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गाने के लिखे जाने, संगीतबद्ध होने और ऊटी के दुर्गम पहाड़ों में चलती ट्रेन पर फिल्माए जाने के पीछे एक बेहद दिलचस्प, आध्यात्मिक और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी छिपी हुई है।
गुलजार साहब की जादुई कलम: बुल्ले शाह के सूफी कलाम से कैसे निकला 'छैयां छैयां'?
शाहरुख खान के पूरे करियर के इस सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय गीत को किसी और ने नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य और सिनेमा के सबसे सम्मानित गीतकार, कवि और ऑस्कर विजेता गुलजार (संपूरन सिंह कालरा) ने अपनी जादुई कलम से तराशा था।
इस गाने की रचना का बीज 17वीं-18वीं सदी के महान पंजाबी सूफी संत और फकीर बाबा बुल्ले शाह की कालजयी सूफी कविता 'तेरे इश्क नचाया करके थैया थैया' में छुपा हुआ था। जब निर्देशक मणि रत्नम और संगीत के जादूगर ए. आर. रहमान फिल्म 'दिल से..' के संगीत पर काम कर रहे थे, तब उन्हें एक ऐसे गीत की आवश्यकता थी जो मुख्य नायक (शाहरुख खान) के दिल में पहली नजर के प्यार के पागलपन, दीवानगी और रूहानी खिंचाव को पूरी तीव्रता से व्यक्त कर सके।
गुलजार साहब ने बाबा बुल्ले शाह के पारंपरिक पंजाबी कलाम 'थैया थैया' को आधुनिक हिंदी-उर्दू और सूफी शब्दावली के ऐसे अद्भुत संगम में ढाला कि वह कालजयी बन गया। गुलजार साहब ने 'थैया थैया' को बदलकर 'छैयां छैयां' किया और प्रेम को एक छाया (आश्रय) का रूप दिया। उनके द्वारा रचे गए शब्द—"जिनके सर हो इश्क की छांव, पांव के नीचे जन्नत होगी, चल छैयां छैयां..." सीधे आत्मा को छू लेने वाले दार्शनिक भाव को प्रकट करते हैं।
ए. आर. रहमान का संगीत और सुखविंदर सिंह की रूहानी आवाज का विस्फोट
गुलजार साहब के इन रहस्यमयी और सूफी शब्दों को जब संगीत के ऑस्कर विजेता उस्ताद ए. आर. रहमान की धुनों का साथ मिला, तो भारतीय संगीत में एक नया इतिहास रच दिया गया। रहमान ने पारंपरिक सूफी कव्वाली के भाव को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक बीट्स, ढोलक और ब्रास सेक्शन के साथ मिलाकर एक ऐसा अनूठा फ्यूजन तैयार किया जो उस दौर के संगीत से कई दशक आगे था।
इस गाने को गाने के लिए रहमान ने गायक सुखविंदर सिंह को चुना। सुखविंदर सिंह ने जब स्टूडियो में पहली बार माइक संभाला और अपनी बुलंद, खनकती और रूहानी आवाज में "जिस्म धुआं... धुआं..." का आलाप लिया, तो स्टूडियो में मौजूद हर शख्स दंग रह गया। सुखविंदर की जोशीली गायकी और उनके साथ गायिका सपना अवस्थी की ठेठ लोक गायकी के तड़के ने इस गाने को एक जादुई ऊंचाई प्रदान की। इस गाने ने सुखविंदर सिंह को रातों-रात भारतीय संगीत जगत का शीर्ष पार्श्वगायक बना दिया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का फिल्मफेयर पुरस्कार भी दिलाया।
चलती ट्रेन की छत पर 4 दिन की शूटिंग: बिना हार्नेस और सुरक्षा के नाचे थे शाहरुख और मलाइका
'छैयां छैयां' की सबसे बड़ी पहचान इसका विजुअल और खतरनाक फिल्मांकन है। इस पूरे गाने को तमिलनाडु के ऊटी में नीलगिरि माउंटेन रेलवे की चलती टॉय ट्रेन की छत पर फिल्माया गया था। आज के आधुनिक दौर में जहां ज्यादातर खतरनाक स्टंट्स और डांस सीक्वेन्स बंद स्टूडियो में ग्रीन स्क्रीन (VFX) और कंप्यूटर ग्राफिक्स के जरिए बनाए जाते हैं, वहीं 1998 में इस पूरे गाने को 100% वास्तविक रूप से चलती ट्रेन पर शूट किया गया था।
चार दिनों तक चली इस शूटिंग का हर एक पल बेहद खतरनाक और जोखिम से भरा था। उस समय सुरक्षा के आधुनिक उपकरण जैसे सेफ्टी हार्नेस उपलब्ध नहीं थे। शाहरुख खान ने बिना किसी रस्सी या सुरक्षा बेल्ट के चलती ट्रेन की छत पर बेखौफ होकर यह पूरा डांस परफॉर्म किया था। ट्रेन जब ऊटी की संकरी घुमावदार पहाड़ियों, गहरी खाइयों और पुराने संकरे सुरंगों से होकर गुजरती थी, तो जरा सी भी चूक सीधे जानलेवा साबित हो सकती थी। शाहरुख खान की ऊर्जा और समर्पण का आलम यह था कि वे हवा के तेज झोंकों और हिलती ट्रेन की छत पर संतुलन बनाते हुए लगातार छलांग लगाते रहे।
फराह खान की जादुई कोरियोग्राफी और मलाइका अरोड़ा का रातों-रात स्टारडम
इस गाने को विजुअली अमर बनाने का श्रेय मशहूर कोरियोग्राफर फराह खान को जाता है। फराह खान ने चलती ट्रेन की बेहद सीमित जगह का जिस रचनात्मकता के साथ उपयोग किया, उसने उन्हें सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी का राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर अवार्ड दिलाया।
शुरुआत में इस गाने के लिए कई मुख्य बॉलीवुड अभिनेत्रियों से संपर्क किया गया था, किंतु ट्रेन की छत पर डांस करने के खतरे और ऊंचाई के डर के चलते कई अभिनेत्रियों ने इस ऑफर को ठुकरा दिया था। अंत में यह मौका मॉडल मलाइका अरोड़ा को मिला। पारंपरिक घाघरा-चोली और बंजारा लुक में मलाइका अरोड़ा ने शाहरुख खान के साथ ऐसा ऊर्जावान और सहज नृत्य प्रस्तुत किया कि वे रातों-रात पूरे देश की 'सेंसेशन' बन गईं। मलाइका के पैरों में घुंघरू के वजन से छाले पड़ गए थे, किंतु उन्होंने दर्द को भूलकर बिना रुके पूरे चार दिन तक शूटिंग जारी रखी।
'थैया थैया' से 'छैयां छैयां' तक: शब्दों के पीछे का गहरा दार्शनिक अर्थ
गुलजार साहब की शायरी की यह खूबी रही है कि वे आसान शब्दों में ब्रह्मांड का सबसे गहरा दर्शन समेट देते हैं। 'छैयां छैयां' के हर एक अंतरे में सूफी तसव्वुफ और इश्के हकीकी (ईश्वरीय प्रेम) की झलक मिलती है:
"गुलपोश कभी समझाए वो, कभी इस्मत का कंगन खनकाए, वो यार है जो खुशबू की तरह, जिसकी जुबां उर्दू की तरह..." यहां गुलजार ने अपनी प्रेमिका की तुलना उर्दू भाषा की नफासत और खुशबू की ताजगी से की है।
"ताबीज बना के पहनूं उसे, आयत की तरह मिल जाए कहीं..." यह पंक्ति प्रेम को पूजा और किसी पवित्र धार्मिक आयत के समान पवित्र मानती है। यह शब्द इस बात का प्रमाण हैं कि क्यों गुलजार साहब को शब्दों का जादूगर कहा जाता है। उन्होंने एक व्यावसायिक बॉलीवुड फिल्म के डांस नंबर को भी उच्च कोटि की सूफी शायरी का दर्जा दिला दिया।
हॉलीवुड से लेकर बीबीसी तक: वैश्विक स्तर पर आज भी बजता है इस गाने का डंका
'छैयां छैयां' की लोकप्रियता केवल भारत या दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पश्चिमी जगत को भी भारतीय संगीत का दीवाना बना दिया।
वर्ष 2002 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस (BBC World Service) द्वारा 155 देशों के लाखों श्रोताओं के बीच कराए गए एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में 'छैयां छैयां' को दुनिया के अब तक के शीर्ष 10 सबसे लोकप्रिय गानों (Top 10 Songs of All Time) की सूची में 9वां स्थान दिया गया था।
इसके अलावा, हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक स्पाइक ली ने अपनी बहुचर्चित हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म 'इनसाइड मैन' (Inside Man - 2006), जिसमें डेनजेल वाशिंगटन और जोडी फोस्टर लीड रोल में थे, उसके ओपनिंग और क्लोजिंग क्रेडिट्स में 'छैयां छैयां' गाने का रीमिक्स इस्तेमाल किया था। ब्रॉडवे म्यूजिकल 'बॉम्बे ड्रीम्स' में भी इस गाने ने न्यूयॉर्क के दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया था।
लगभग तीन दशक बीत जाने के बाद भी 'छैयां छैयां' की ताजगी, लय और जादू जरा भी कम नहीं हुआ है। गुलजार साहब की कालजयी शायरी, ए. आर. रहमान का अलौकिक संगीत, सुखविंदर सिंह की रूहानी आवाज और शाहरुख खान व मलाइका अरोड़ा का बेमिसाल अंदाज—इन चारों तत्वों के संगम ने मिलकर एक ऐसा ऐतिहासिक सिनेमाई चमत्कार रचा, जो आने वाली कई सदियों तक दुनिया भर के संगीत प्रेमियों के दिलों को थिरकाता रहेगा।