'मौत के बाद भी नहीं करूंगी माफ!' तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर का वो विवाद, जिसने हिला दी थी पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री
हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई बड़े विवाद हुए, लेकिन अभिनेत्री तनुश्री दत्ता और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के बीच उपजे विवाद ने पूरी इंडस्ट्री की जड़ों को हिलाकर रख दिया था। यह कहानी साल 2008 की है, जब फिल्म 'हॉर्न ओके प्लीज' के एक स्पेशल आइटम सॉन्ग की शूटिंग मुंबई के फिल्मिस्तान स्टूडियो में चल रही थी। उस समय 'आशिक बनाया आपने' से रातों-रात सनसनी बनीं पूर्व मिस इंडिया यूनिवर्स तनुश्री दत्ता इस गाने का मुख्य आकर्षण थीं। तनुश्री के मुताबिक, कॉन्ट्रैक्ट के तहत यह उनका सोलो डांस नंबर था, जिसमें नाना पाटेकर की मौजूदगी की कोई योजना नहीं थी। लेकिन शूटिंग के दिन अचानक नाना पाटेकर सेट पर आए और कोरियोग्राफी में दखल देने लगे। तनुश्री ने आरोप लगाया कि नाना पाटेकर ने डांस स्टेप्स सिखाने के बहाने उन्हें अनुचित तरीके से छुआ और इंटीमेट सीन्स जबरन शामिल कराने का दबाव बनाया। जब तनुश्री ने इसका कड़ा विरोध किया और असहज होकर अपनी वैनिटी वैन में चली गईं, तो सेट पर तनाव का ऐसा बवंडर उठा जिसकी गूंज सालों तक सुनाई देती रही।
वैनिटी वैन पर हमला और वो खौफनाक मंजर: तनुश्री के करियर का दुखद अंत
तनुश्री दत्ता द्वारा विरोध दर्ज कराने के बाद मामला सुलझने के बजाय और ज्यादा हिंसक हो गया। आरोप है कि जब तनुश्री ने डांस करने से इनकार कर दिया, तो एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को सेट पर बुला लिया गया। जैसे ही तनुश्री अपने माता-पिता के साथ कार में बैठकर स्टूडियो से निकलने लगीं, उपद्रवियों ने उनकी कार को घेर लिया, खिड़कियों पर लाठियां बरसाईं, शीशे तोड़ने की कोशिश की और भारी तोड़फोड़ मचाई। उस खौफनाक घटना का वीडियो आज भी इंटरनेट पर मौजूद है, जिसमें एक युवा अभिनेत्री और उसके बुजुर्ग माता-पिता अपनी जान बचाने के लिए कार के अंदर सहमे हुए नजर आते हैं। इस भयानक मानसिक आघात और इंडस्ट्री द्वारा उनका बहिष्कार किए जाने के बाद तनुश्री पूरी तरह टूट गईं। उन्हें कई फिल्मों से रातों-रात बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जिसके बाद उन्होंने बॉलीवुड से दूरी बना ली और अध्यात्म की राह पकड़ते हुए अमेरिका में बस गईं।
2018 का भारत में #MeToo आंदोलन: तनुश्री की हुंकार से कांपा पूरा तंत्र
दस साल तक चुप्पी साधे रहने के बाद साल 2018 में जब तनुश्री दत्ता भारत लौटीं, तो उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में उस खौफनाक दिन की पूरी दास्तान दुनिया के सामने रख दी। उनके इस खुलासे ने भारतीय मीडिया और समाज में 'मी टू' (#MeToo) आंदोलन की एक ऐसी आग सुलगा दी जिसने बॉलीवुड, मीडिया, राजनीति और कॉर्पोरेट जगत के कई बड़े और सम्मानित चेहरों के नकाब उतार दिए। तनुश्री की बहादुरी से प्रेरणा लेकर सैकड़ों महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई। तनुश्री ने नाना पाटेकर, कोरियोग्राफर गणेश आचार्य, निर्देशक राकेश सारंग और निर्माता समी सिद्दीकी के खिलाफ ओशिवारा पुलिस स्टेशन में औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई। नाना पाटेकर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कानूनी नोटिस भेजा और दावा किया कि तनुश्री झूठी पब्लिसिटी के लिए यह सब कर रही हैं।
बी-समरी रिपोर्ट और अधूरा न्याय: तनुश्री की व्यवस्था से गहरी नाराजगी
लंबी जांच और गवाहों के बयानों के बाद साल 2019 में मुंबई पुलिस ने अदालत में 'बी-समरी' रिपोर्ट दाखिल की, जिसका मतलब था कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद नाना पाटेकर को कानूनी रूप से क्लीन चिट जैसी राहत मिल गई। हालांकि, तनुश्री दत्ता ने हमेशा यह आरोप लगाया कि पुलिस जांच निष्पक्ष नहीं थी, मुख्य गवाहों को डराया-धमकाया गया और सत्ता व रसूख के दबाव में आकर सच को दबा दिया गया। तनुश्री ने अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर कानूनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया। वे लगातार यह कहती रहीं कि कानून भले ही किसी ताकतवर इंसान को सबूतों के अभाव में बरी कर दे, लेकिन सच और अंतरात्मा की अदालत में वो हमेशा दोषी ही रहेगा।
'मौत के बाद भी नहीं करूंगी माफ': घाव जो कभी नहीं भरे
हालिया घटनाक्रमों और नाना पाटेकर से जुड़े ताजा बयानों के बीच तनुश्री दत्ता का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या समय बीतने या किसी के दुनिया से चले जाने के बाद वे उस कड़वे अतीत को भूल सकती हैं, तो तनुश्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के दो-टूक कहा कि वे उन्हें जीते-जी या मौत के बाद भी कभी माफ नहीं करेंगी। तनुश्री का कहना है कि जिस इंसान ने उनकी 24 साल की उम्र में उनका उभरता हुआ करियर, मान-सम्मान और मानसिक शांति छीन ली, उसे सिर्फ इसलिए माफ नहीं किया जा सकता क्योंकि समय बीत चुका है। तनुश्री ने कहा कि माफी उन लोगों को दी जाती है जो अपनी गलती मानते हैं और पश्चाताप करते हैं, न कि उन्हें जो जीवनभर अपनी शक्ति और प्रभाव के दम पर झूठ का पर्दा डाले रहते हैं। यह पूरा विवाद आज भी इस बात का गवाह है कि एक महिला का संघर्ष सिस्टम की चुप्पी से कभी खत्म नहीं होता।