IIT की डिग्री, छोड़ी मोटी सैलरी वाली नौकरी; शुरुआती नाकामी के बाद ऐसे बने 'मिर्जापुर द मूवी' के स्टार
फिल्म इंडस्ट्री में जब भी 'आउटसाइडर्स' की सफलता की मिसाल दी जाती है, तो जितेंद्र कुमार का नाम सबसे आगे रखा जाता है। बिना किसी गॉडफादर और बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के केवल अपनी सादगी और दमदार अदाकारी के दम पर दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले जितेंद्र कुमार आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई बड़े बजट की एक्शन फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' (Mirzapur: The Movie) में 'बबलू पंडित' के अहम किरदार में नजर आए जितेंद्र कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल ओटीटी के ही नहीं, बल्कि बड़े पर्दे के भी बड़े खिलाड़ी हैं। दुनिया भर में 270 करोड़ रुपये से अधिक का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर चुकी इस फिल्म की सफलता ने उनके करियर में एक नया मील का पत्थर जोड़ दिया है।
हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी था जब मुंबई में शुरुआती असफलता के बाद वे अभिनय का सपना छोड़कर बेंगलुरु में एक कॉरपोरेट नौकरी करने लगे थे।
IIT खड़गपुर से सिविल इंजीनियरिंग और थिएटर का जुनून
राजस्थान के खैरथल (अलवर) के एक सामान्य परिवार में जन्मे जितेंद्र कुमार बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार थे। उनके पिता सिविल इंजीनियर थे, इसलिए परिवार ने उन्हें आईआईटी की तैयारी के लिए कोटा भेज दिया। कठिन परीक्षा पास करने के बाद जितेंद्र ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT खड़गपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की।
कॉलेज के दिनों में ही उनका रुझान अभिनय और रंगमंच (थिएटर) की तरफ बढ़ा। वे आईआईटी के 'हिंदी टेक्नोलॉजी ड्रामेटिक्स सोसाइटी' में सक्रिय हो गए। इसी दौरान उनकी मुलाकात बिस्वपति सरकार से हुई, जो आगे चलकर 'द वायरल फीवर' (TVF) के क्रिएटिव डायरेक्टर बने। बिस्वपति ने जितेंद्र के हुनर को पहचाना और उन्हें कॉलेज खत्म होने के बाद एक्टिंग में हाथ आजमाने का न्योता दिया।
पहले वीडियो पर नहीं मिले व्यूज, मुंबई छोड़ 9 महीने की कॉरपोरेट नौकरी
साल 2012 में कॉलेज पूरा होते ही जितेंद्र अभिनय का ख्वाब लेकर मुंबई आ गए। उन्होंने टीवीएफ के लिए अपना पहला वीडियो शूट किया, लेकिन शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। उनके पहले वीडियो को यूट्यूब पर 10 हजार व्यूज भी नहीं मिले। इसके बाद उन्होंने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर भी काम किया, लेकिन जब काम नहीं बना और आर्थिक तंगी घेरने लगी, तो जितेंद्र ने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया।
वे मुंबई छोड़कर बेंगलुरु चले गए और अपने एक दोस्त की मदद से वहां एक कंस्ट्रक्शन/कॉरपोरेट कंपनी में नौकरी शुरू कर दी। उन्होंने करीब 8 से 9 महीने तक वह मोटी सैलरी वाली कॉरपोरेट जॉब की, लेकिन उनका मन दफ्तर की फाइलों में नहीं लगा।
एक वायरल वीडियो ने बदली जिंदगी, 'मुन्ना जज्बाती' से लेकर 'सचिव जी' तक का सफर
बेंगलुरु में नौकरी के दौरान ही एक दिन जितेंद्र के पास बिस्वपति सरकार का फोन आया। उन्होंने बताया कि उनका दूसरा वीडियो 'मुन्ना जज्बाती: द क्यूतिया इंटर्न' (Munna Jazbaati) यूट्यूब पर रातों-रात वायरल हो चुका है और उसे लाखों लोग देख चुके हैं। इस एक वीडियो ने जितेंद्र के भीतर दबे एक्टर को फिर से जगा दिया। उन्होंने बिना देर किए अपनी हाई-पेइंग कॉरपोरेट जॉब से इस्तीफा दे दिया और हमेशा के लिए मुंबई लौट आए।
इसके बाद का सफर भारतीय डिजिटल स्ट्रीमिंग के इतिहास में दर्ज है:
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पिचर्स और कोटा फैक्ट्री: 'टीवीएफ पिचर्स' ने उन्हें घर-घर में 'जीतू' के रूप में पहचान दिलाई। इसके बाद आई 'कोटा फैक्ट्री', जहां उनके 'जीतू भैया' के किरदार ने देश भर के छात्रों और युवाओं का दिल जीत लिया।
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पंचायत के 'सचिव जी': साल 2020 में आई प्राइम वीडियो की ब्लॉकबस्टर सीरीज 'पंचायत' में अभिषेक त्रिपाठी उर्फ 'सचिव जी' का किरदार निभाकर जितेंद्र देश के सबसे चहेते ओटीटी स्टार बन गए। फुलेरा गांव की यह सादगी भरी कहानी हर भारतीय परिवार की पसंद बन गई।
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बॉलीवुड में दस्तक: ओटीटी के साथ उन्होंने आयुष्मान खुराना के साथ फिल्म 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' से बॉलीवुड में बड़ा ब्रेक लिया और इसके बाद 'जादूगर', 'चमन बहार' व 'ड्राई डे' जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं।
'मिर्जापुर: द मूवी' में बबलू पंडित बनकर 270 करोड़ क्लब में एंट्री
एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले जब 'मिर्जापुर: द मूवी' की घोषणा हुई, तो मेकर्स ने जितेंद्र कुमार पर सबसे बड़ा दांव खेला। फिल्म में उन्होंने विक्रांत मैसी की जगह लेते हुए 'बबलू पंडित' का बेहद अहम और इंटेंस किरदार निभाया। पंकज त्रिपाठी (कालीन भैया) और अली फजल (गुड्डू पंडित) के सामने जितेंद्र के बदले हुए तेवर और एक्शन अवतार को दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया।
फिल्म ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 270 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर नया इतिहास रच दिया है। कभी 10 हजार व्यूज के लिए तरसने और नौकरी के लिए दर-दर भटकने वाले जितेंद्र कुमार आज हिंदी सिनेमा और ओटीटी के उन चुनिंदा कलाकारों में शुमार हो चुके हैं, जिनकी मौजूदगी ही कंटेंट के हिट होने की गारंटी मानी जाती है।