'किस्मत को आजमाना नहीं चाहिए': 30 साल बाद सैफ अली खान को फिर याद आया खौफनाक चाकू हमला
बॉलीवुड के नवाब यानी सैफ अली खान आज जिस शांत, परिपक्व और संजीदा मिजाज के लिए जाने जाते हैं, 90 के दशक में उनकी छवि एक बेहद आक्रामक और बेपरवाह युवा की हुआ करती थी। उस दौर में सैफ अली खान एक ऐसे जानलेवा हादसे का शिकार हुए थे, जिसने उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। हाल ही में एक विस्तृत बातचीत के दौरान अभिनेता ने करीब तीन दशक पुराने उस खौफनाक चाकू हमले (Knife Attack) की दास्तान फिर से बयां की है। सैफ ने न केवल उस डरावनी रात का ब्योरा दिया, बल्कि अपनी उस नादानी और गलती का भी खुलकर जिक्र किया जिसकी वजह से वह मौत के बेहद करीब पहुंच गए थे।
'मैं किस्मत के भरोसे बच गया'— सैफ ने बयां की उस काली रात की पूरी कहानी
यह वाकया 90 के दशक के मध्य का है, जब सैफ अली खान की फिल्म 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी' रिलीज हुई थी और वे सफलता के नशे में चूर थे। उस दौर को याद करते हुए सैफ अली खान ने कहा कि युवावस्था में इंसान खुद को अजेय समझता है और यह मान बैठता है कि उसे कुछ नहीं हो सकता। अभिनेता ने बताया कि एक नाइट क्लब में पार्टी के दौरान कुछ अनजान लड़कों के साथ उनकी अचानक कहासुनी हो गई थी। मामला इतना बढ़ गया कि सामने वाले युवक ने आव देखा न ताव और अपनी जेब से तेज धारदार चाकू निकालकर सीधे सैफ पर वार कर दिया।
सैफ ने बताया, "वह हमला इतना अचानक और घातक था कि अगर चाकू कुछ मिलीमीटर इधर-उधर लगा होता, तो मेरी मुख्य नस कट सकती थी और मैं उसी जगह ढेर हो जाता।" खून से लथपथ हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने कई टांके लगाकर बड़ी मुश्किल से उनकी जान बचाई। अभिनेता के अनुसार, उस रात उन्हें समझ आया कि जिंदगी कितनी नाजुक होती है और किस्मत को बार-बार आजमाना सबसे बड़ी बेवकूफी है।
'वह मेरी सबसे बड़ी गलती थी'— अभिनेता ने कबूला अपना बचपना
इस पूरी घटना का विश्लेषण करते हुए सैफ अली खान ने माना कि उस रात जो कुछ हुआ, उसमें उनकी अपनी गलती भी बहुत बड़ी थी। सैफ ने कहा कि वह स्थिति ऐसी थी जिसे बातचीत से टाला जा सकता था या फिर वहां से चुपचाप हटकर मामला शांत किया जा सकता था। लेकिन अपने स्टारडम, युवा जोश और झूठे अहंकार के चलते उन्होंने उस विवाद को तूल दिया और सामने वाले से उलझ पड़े।
सैफ ने कहा, "मेरी सबसे बड़ी गलती यह थी कि मैंने यह सोचा ही नहीं कि सामने वाले के दिमाग में क्या चल रहा है और वह किस हद तक जा सकता है। पब्लिक प्लेस पर बेमतलब के झगड़े में अपनी एनर्जी लगाना और खुद को साबित करने की कोशिश करना सिर्फ नादानी थी। उस एक रात ने मुझे सिखाया कि बहादुर वह नहीं है जो हर गली-नुक्कड़ की लड़ाई में कूद पड़े, बल्कि समझदार वह है जो यह जाने कि कब पीछे हटना है।"
उस खौफनाक हादसे ने बदल दिया जिंदगी जीने का नजरिया
अभिनेता ने साझा किया कि अस्पताल के बिस्तर पर जब वे कई दिनों तक दर्द से कराह रहे थे, तब उनके दिमाग में अपने परिवार, अपने माता-पिता और अपने करियर का ख्याल आया। उस घटना ने उनके भीतर के उग्र स्वभाव को हमेशा के लिए शांत कर दिया। सैफ ने कहा कि उस सदमे के बाद उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर अपना रवैया पूरी तरह बदल लिया। उन्होंने अनावश्यक पार्टियों, विवादों और रात के अंधेरे में होने वाली गैर-जरूरी बहसों से खुद को पूरी तरह दूर कर लिया। यह वही मोड़ था जिसके बाद सैफ अली खान ने अपने काम पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू किया और 'दिल चाहता है', 'ओमकारा' और 'सेक्रेड गेम्स' जैसी फिल्मों के जरिए खुद को एक बेहतरीन कलाकार के रूप में स्थापित किया।
युवाओं को दी नसीहत: बेवजह के ईगो से बचें
आज पांच दशक का जीवन देख चुके सैफ अली खान ने वर्तमान पीढ़ी और युवाओं को भी इस घटना के हवाले से बड़ी सीख दी है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भी कई युवा सड़कों पर या क्लबों में मामूली कहासुनी पर ईगो की लड़ाई लड़ने लगते हैं। सैफ का कहना है कि किसी अंजान व्यक्ति के उकसावे पर प्रतिक्रिया देना आपकी सबसे बड़ी मूर्खता हो सकती है, क्योंकि आप कभी नहीं जानते कि सामने वाले के पास क्या हथियार है या वह किस मानसिक स्थिति में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मसम्मान और झूठे घमंड के बीच के फर्क को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि जिंदगी दूसरा मौका बहुत कम लोगों को देती है।