CINTAA में इस्तीफों के भारी बखेड़े के बीच लीलावती अस्पताल में भर्ती हुईं अध्यक्ष पूनम ढिल्लों, डेंगू की चपेट में आईं दिग्गज एक्ट्रेस ने खुद दिया हेल्थ अपडेट

CINTAA में इस्तीफों के भारी बखेड़े के बीच लीलावती अस्पताल में भर्ती हुईं अध्यक्ष पूनम ढिल्लों, डेंगू की चपेट में आईं दिग्गज एक्ट्रेस ने खुद दिया हेल्थ अपडेट

हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री और सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की मौजूदा अध्यक्ष पूनम ढिल्लों को लेकर मुंबई से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। बॉलीवुड में चार दशकों से अधिक समय से सक्रिय 64 वर्षीय अभिनेत्री पूनम ढिल्लों अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ने के बाद मुंबई के प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल में भर्ती कराई गई हैं। डॉक्टरों की जांच में उनके डेंगू वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। यह खबर ऐसे नाजुक समय पर आई है जब सिंटा (CINTAA) के भीतर पिछले कुछ दिनों से लीडरशिप और कार्यप्रणाली को लेकर भारी अंदरूनी घमासान मचा हुआ है और कई बड़े कलाकारों ने सामूहिक इस्तीफा देकर संगठन को हिला कर रख दिया है।

डेंगू के चलते कई दिनों से लीलावती अस्पताल में चल रहा है इलाज

पूनम ढिल्लों पिछले कई दिनों से तेज बुखार, बदन दर्द और कमजोरी से जूझ रही थीं, जिसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें फौरन बांद्रा स्थित लीलावती अस्पताल में दाखिल कराया गया। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों की देखरेख में उनका लगातार इलाज चल रहा है।

अभिनेत्री की तबीयत को लेकर वरिष्ठ मनोरंजन पत्रकार विक्की लालवानी ने सोशल मीडिया पर पहली आधिकारिक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पूनम ढिल्लों से सुबह संदेश भेजकर उनकी सेहत की जानकारी ली, तो अभिनेत्री ने खुद जवाब देते हुए बताया कि वह अब पहले से काफी बेहतर महसूस कर रही हैं और धीरे-धीरे रिकवर हो रही हैं। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, उनकी प्लेटलेट्स और अन्य स्वास्थ्य मानकों पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उनकी हालत फिलहाल पूरी तरह स्थिर और खतरे से बाहर है।

पद्मिनी कोल्हापुरे ने फैंस को दी राहत, बोलीं- 'जल्द मिल सकती है छुट्टी'

पूनम ढिल्लों की बेहद करीबी दोस्त और सिंटा की वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे ने भी उनकी सेहत को लेकर प्रशंसकों को राहत भरी खबर दी है। 1980 के दशक से एक-दूसरे की सुख-दुख की साथी रहीं पद्मिनी कोल्हापुरे ने बताया कि पूनम एक मजबूत इच्छाशक्ति वाली महिला हैं और वह इलाज का अच्छा रिस्पॉन्स दे रही हैं।

पद्मिनी ने मीडिया को जानकारी दी कि पूनम ढिल्लों तेजी से स्वस्थ हो रही हैं और अगर उनकी मेडिकल रिपोर्ट्स इसी तरह सकारात्मक रहीं, तो डॉक्टर उन्हें जल्द ही अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर जाने की अनुमति दे सकते हैं। पूनम ढिल्लों के अस्पताल में भर्ती होने की खबर जैसे ही फैली, बॉलीवुड के कई वरिष्ठ कलाकारों, टेलीविजन सितारों और उनके अनगिनत प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थनाएं शुरू कर दीं।

CINTAA में मचे आंतरिक घमासान के बीच बिगड़ी अभिनेत्री की सेहत

पूनम ढिल्लों के अस्पताल में भर्ती होने का समय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से सिंटा (CINTAA) के भीतर ऐतिहासिक विवाद छिड़ा हुआ है। इस संस्था के चुनाव में चुनी गई 11 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव कमेटी में से 8 प्रमुख सदस्यों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ कलाकारों में मुकेश ऋषि, पुनीत इस्सर, विंदु दारा सिंह, हेमंत पांडे, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, दीपक पराशर और विकास वर्मा जैसे जाने-माने नाम शामिल हैं। इन सदस्यों ने एक साझा शिकायती पत्र जारी करते हुए आरोप लगाया था कि संस्था का पूरा कामकाज केवल अध्यक्ष पूनम ढिल्लों, उपाध्यक्ष पद्मिनी कोल्हापुरे और उनके कुछ करीबी सहयोगियों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया है। सदस्यों का आरोप था कि महत्वपूर्ण फैसलों में अन्य सदस्यों की राय नहीं ली जा रही थी और निजी ईमेल से आधिकारिक निर्देश जारी किए जा रहे थे।

उपासना सिंह के तानाशाही के आरोप और पूनम ढिल्लों का करारा जवाब

इस विवाद में उस वक्त और उबाल आ गया जब सिंटा की जनरल सेक्रेटरी और मशहूर अभिनेत्री उपासना सिंह ने एक पॉडकास्ट में पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे की कार्यशैली पर खुलेआम सवाल उठाए। उपासना सिंह ने आरोप लगाया कि संगठन में तानाशाही जैसा माहौल बना दिया गया है और जो लोग उनकी हां में हां नहीं मिलाते, उन्हें कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस थमा दिए जाते हैं।

अस्पताल में भर्ती होने से ठीक पहले पूनम ढिल्लों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेहद घटिया और आपत्तिजनक बताया था। पूनम ढिल्लों ने समाचार एजेंसी एएनआई और अन्य साक्षात्कारों में कहा था कि वह किसी भी तरह की कीचड़ उछालने की राजनीति में विश्वास नहीं रखतीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने 42 साल के लंबे और बेदाग फिल्मी करियर में अपनी गरिमा, ईमानदारी और आत्मसम्मान से अपनी पहचान बनाई है और वह कभी भी कलाकारों के संगठन के साथ कोई विश्वासघात नहीं कर सकतीं।

CAWT ट्रस्ट और फंड जुटाने के मुद्दे पर दी थी खुली सफाई

पूनम ढिल्लों ने स्पष्ट किया था कि वह और पद्मिनी कोल्हापुरे अपने व्यक्तिगत संपर्कों और संसाधनों का उपयोग सिंटा के सदस्यों के कल्याण के लिए कर रही थीं। उन्होंने सिने आर्टिस्ट्स वेलफेयर ट्रस्ट (CAWT) का जिक्र करते हुए कहा था कि यह ट्रस्ट दिलीप कुमार, अमरीश पुरी और अमजद खान जैसे महान कलाकारों द्वारा जरूरतमंद कलाकारों की मेडिकल और आर्थिक मदद के लिए बनाया गया था।

पूनम ने सवाल उठाया था कि पिछले कई दशकों में किसी ने इस ट्रस्ट के लिए बड़ा फंड जुटाने की पहल नहीं की, लेकिन जब उन्होंने संगीत कार्यक्रमों और निजी प्रयासों से फंड जुटाना शुरू किया, तो कुछ लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा था कि हर अच्छी पहल का विरोध होने से उन्हें गहरा मानसिक और भावनात्मक आघात पहुंचा था, जिसके चलते उन्होंने कई बार अपने पद से हटने तक का विचार किया था।

विवाद के कानूनी पहलू और समिति का भविष्य

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सिंटा के कानूनी सलाहकार एडवोकेट सुविज्ञ विद्यार्थी ने स्पष्ट किया है कि 8 सदस्यों के इस्तीफे के बावजूद तकनीकी रूप से कार्यकारिणी समिति भंग नहीं हुई है। सिंटा के संविधान के अनुसार, समिति तभी भंग मानी जाती है जब 50 प्रतिशत से अधिक निर्वाचित सदस्य पद छोड़ें, लेकिन वर्तमान संख्यात्मक स्थिति और कानूनी प्रावधानों के तहत समिति का संचालन जारी है।

हालांकि, कानूनी स्थिति चाहे जो भी हो, लगातार चल रहे तनाव, बैठकों के दबाव और प्रशासनिक विवादों के बीच पूनम ढिल्लों के स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर पड़ा। लगातार तनाव के दौरान डेंगू के संक्रमण ने उनकी शारीरिक स्थिति को और कमजोर कर दिया, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

जल्द घर वापसी और काम पर लौटने की उम्मीद

पूनम ढिल्लों हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में से हैं जिन्होंने यश चोपड़ा की फिल्म 'त्रिशूल', 'नूरी', 'सोहनी महिवाल', 'नाम' और 'यह वादा रहा' जैसी कल्ट फिल्मों से अपनी अमिट छाप छोड़ी है। अभिनय के अलावा वह हमेशा सामाजिक कार्यों और साथी कलाकारों के अधिकारों के लिए मुखर रही हैं।

फैंस और इंडस्ट्री के लोग अब यही उम्मीद कर रहे हैं कि पूनम ढिल्लों लीलावती अस्पताल से पूरी तरह स्वस्थ होकर जल्द अपने घर लौटेंगी। उनके ठीक होने के बाद ही यह देखना दिलचस्प होगा कि सिंटा के इस गहरे अंदरूनी संकट को सुलझाने के लिए वह क्या ठोस कदम उठाती हैं और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत से कोई सुलह का रास्ता निकल पाता है।