'रामायण' के 'लक्ष्मण' सुनील लहरी ने गणेश भक्तों से की भावुक अपील: बोले- 'बप्पा के विसर्जन के बाद मूर्तियों का ऐसा अपमान देख फटता है कलेजा'
देशभर में गणेशोत्सव का पावन पर्व अत्यंत उल्लास, भक्ति और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। भक्तजन अपने-अपने घरों और विशाल सार्वजनिक पंडालों में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित कर सेवा और आराधना में लीन हैं। हालांकि, इस पावन उत्सव के बीच विसर्जन के समय और उसके अगले दिन सामने आने वाली कुछ बेहद विचलित करने वाली तस्वीरों पर रामानंद सागर की लोकप्रिय 'रामायण' में लक्ष्मण की अमर भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ अभिनेता सुनील लहरी ने अपनी गहरी पीड़ा और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सभी गणेश भक्तों से हाथ जोड़कर एक भावुक प्रार्थना की है, ताकि हमारी आस्था किसी भी सूरत में ईश्वर के अनादर का कारण न बने।
विसर्जन के बाद खंडित मूर्तियों को देख छलका सुनील लहरी का दर्द
सुनील लहरी अक्सर सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। गणेश चतुर्थी के अवसर पर अपने फैंस को शुभकामनाएं देने के साथ ही उन्होंने विसर्जन के बाद समुद्र तटों, नदियों और तालाबों के किनारे उत्पन्न होने वाली गंभीर स्थिति का जिक्र किया।
अभिनेता ने कहा कि जिस विग्रह को हम दस दिनों तक या तीन दिनों तक ढोल-नगाड़ों, जयकारों और अपार श्रद्धा के साथ अपने घर लाते हैं, मोदक का भोग लगाते हैं और सुबह-शाम आरती उतारते हैं, उसी प्रतिमा के विसर्जन के बाद जो दृश्य दिखाई देता है, उसे देखकर कलेजा फट जाता है। कई बार केमिकल युक्त प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियां पानी में नहीं घुलतीं और लहरों के साथ वापस किनारे पर आ जाती हैं। समुद्र तटों पर बप्पा के हाथ, पैर, धड़ अलग-अलग बिखरे पड़े रहते हैं और लोग उनके ऊपर से गुजरते हैं। यह देखना किसी भी सच्चे सनातनी या गणेश भक्त के लिए असहनीय और हृदयविदारक होता है।
'आप लोगों से एक प्रार्थना है...': बप्पा के भक्तों से की खास अपील
सुनील लहरी ने गणेश भक्तों से आग्रह करते हुए कहा, "मेरी आप सभी से केवल एक विनम्र प्रार्थना है। जब हम ईश्वर को अपने घर लाते हैं, तो उनकी गरिमा और मान-सम्मान का अंत तक ध्यान रखना भी हमारी ही जिम्मेदारी है। यदि हम अपने आराध्य की मर्यादा की रक्षा नहीं कर सकते, तो ऐसी भव्यता का कोई औचित्य नहीं रह जाता।"
उन्होंने श्रद्धालुओं को सुझाव दिया कि वे पारंपरिक रूप से केवल मिट्टी (शाडू माटी) या प्राकृतिक तत्वों से बनी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं की ही स्थापना करें। यदि संभव हो तो अपने घर की बालकनी या आंगन में ही साफ पानी के बड़े टब या बाल्टी में बप्पा का विसर्जन करें और उस मिट्टी को किसी तुलसी के गमले या बगीचे के पेड़-पौधों में डाल दें। इससे प्रकृति की रक्षा भी होगी और हमारे आराध्य की प्रतिमा किसी सार्वजनिक जगह पर खंडित या पैरों तले अपमानित होने से बच जाएगी।
बड़े पंडाल आयोजकों को भी दी अहम सलाह
अभिनेता ने विशालकाय मूर्तियां स्थापित करने वाले सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों से भी विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मूर्तियों की ऊंचाई और भव्यता से अधिक महत्व हमारी आंतरिक भक्ति और पवित्रता का होता है।
सार्वजनिक समितियों को पहले से ही प्रशासन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विसर्जन के बाद अवशेषों को उसी दिन पूरी गरिमा, आदर और विधि-विधान के साथ गहरे जल में प्रवाहित किया जाए अथवा उनका समुचित निस्तारण हो, ताकि अगले दिन सुबह समुद्र तटों पर बप्पा की खंडित अवस्था की तस्वीरें अखबारों और सोशल मीडिया पर शर्मसार न करें। सुनील लहरी की इस सार्थक और मार्मिक अपील का इंटरनेट पर यूजर्स और श्रद्धालुओं ने भरपूर समर्थन किया है और इसे सच्ची भक्ति का परिचायक बताया है।