Imran Khan : रजा मुराद का तीखा प्रहार, बोले- किसी विदेशी को मुल्क के मामलों में दखल का हक नहीं

Imran Khan : रजा मुराद का तीखा प्रहार, बोले- किसी विदेशी को मुल्क के मामलों में दखल का हक नहीं

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भांजे और फिल्म 'जाने तू... या जाने ना' के जरिए पहचान बनाने वाले अभिनेता इमरान खान को मुंबई पुलिस और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) की तरफ से 'भारत छोड़ो' (Leave India Notice) का निर्देश दिए जाने के बाद सिनेमा जगत में तीखी बहस छिड़ गई है। मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद इमरान खान को 28 अक्टूबर 2026 तक देश छोड़ने का नोटिस जारी किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर जहां किरण राव जैसी हस्तियां नाराजगी जता रही हैं, वहीं हिंदी सिनेमा के जाने-माने दिग्गज अभिनेता रजा मुराद ने अधिकारियों की कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया है। रजा मुराद ने बिना लाग-लपेट कहा कि चाहे कोई भी हो, किसी भी विदेशी नागरिक को हमारे मुल्क की राजनीति और अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।

रजा मुराद ने मुंबई पुलिस की कार्रवाई को बताया कानून सम्मत

समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए रजा मुराद ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई जल्दबाजी या मनमानी नहीं की है, बल्कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर पूरी की जा रही है। उन्होंने कहा, "देखिए, इमरान खान हों या कोई और, किसी भी विदेशी नागरिक को हमारे मुल्क के अंदरूनी मामलों में दखल देने का कोई हक नहीं है। मुझे तो अब पता चला है कि इमरान खान अमेरिकी नागरिक हो गए हैं और यहां सिर्फ एक अभिनेता के रूप में काम कर रहे थे। जब आप एक अमेरिकी नागरिक हैं, तो आपको इस देश के आंतरिक मामलों और राजनीतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का अधिकार नहीं बनता।" रजा मुराद ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन ने इमरान के साथ कोई ज्यादती नहीं की है। उन्होंने कहा कि उन्हें तुरंत 24 घंटे में जाने के लिए नहीं कहा गया, बल्कि पूरे 15 दिन का पर्याप्त समय दिया गया है, जो नियमबद्ध प्रशासनिक प्रक्रिया को दर्शाता है।

इमरान खान के पास सिर्फ दो ही रास्ते: रजा मुराद

वरिष्ठ अभिनेता ने पूरे मामले में संतुलन साधते हुए इमरान खान के सामने मौजूद विकल्पों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "इमरान खान के पास वर्तमान स्थिति में दो ही सीधे रास्ते बचते हैं। पहला यह कि वे प्रशासनिक नोटिस का सम्मान करते हुए 28 अक्टूबर तक मुल्क छोड़कर चले जाएं। दूसरा यह कि अगर उन्हें लगता है कि उनके साथ नाइंसाफी हुई है, उन्हें जबरदस्ती देश से निकाला जा रहा है या उनके अधिकारों का हनन हुआ है, तो भारत एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश है, वे सीधे अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।" रजा मुराद ने जोर देकर कहा कि अदालत जो भी फैसला सुनाएगी, चाहे वह पक्ष में हो या विपक्ष में, हम सभी को सिर झुकाकर उस न्यायिक फैसले को स्वीकार करना होगा।

प्रोटेस्ट में शामिल होने को लेकर क्यों छिड़ा विवाद?

पूरे विवाद की जड़ मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित हुआ विरोध प्रदर्शन बना, जिसमें इमरान खान ने प्रत्यक्ष रूप से शिरकत की थी। भारतीय कानूनों के तहत, भारत में रहने वाले ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारकों या विदेशी पासपोर्ट धारकों को देश के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों में भाग लेने, वोट डालने या चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होती है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर ही FRRO द्वारा यह नोटिस जारी किया गया। रजा मुराद के साथ-साथ अभिनेता गजेंद्र चौहान और अशोक पंडित ने भी यह बात दोहराई है कि जब कोई व्यक्ति विदेशी नागरिकता के साथ भारत में रहता है और यहां से नाम, शोहरत व धन कमाता है, तो उसे देश के आव्रजन कानूनों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। कानून की अनदेखी करने पर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना ही पड़ता है।

बॉम्बे हाई कोर्ट जाने की तैयारी में इमरान खान

दूसरी तरफ, 'भारत छोड़ो' नोटिस के खिलाफ इमरान खान की कानूनी टीम ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की पूरी तैयारी कर ली है। अभिनेता के वकीलों का तर्क है कि इमरान खान का पालन-पोषण भारत में हुआ है, उनका परिवार और कार्यक्षेत्र दशकों से यहीं स्थित है, इसलिए नोटिस को रद्द किया जाना चाहिए। फिल्म जगत में इस मामले को लेकर दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही है—एक वर्ग जहां मानवीय और पारिवारिक आधार पर इमरान के समर्थन में खड़ा है, वहीं दूसरा बड़ा धड़ा देश के नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा के कानूनी ढांचे को सर्वोपरि मान रहा है।