'डूबते सूरज को भी दिया जाता है सम्मान...', बिहारी कल्चर की कायल हुईं तमन्ना भाटिया; महापर्व छठ की महिमा पर दिया दिल छू लेने वाला बयान

'डूबते सूरज को भी दिया जाता है सम्मान...', बिहारी कल्चर की कायल हुईं तमन्ना भाटिया; महापर्व छठ की महिमा पर दिया दिल छू लेने वाला बयान

भारतीय सिनेमा की खूबसूरत और लोकप्रिय अभिनेत्री तमन्ना भाटिया अक्सर अपने अभिनय, स्टाइल और बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। साउथ से लेकर बॉलीवुड तक अपने हुनर का परचम लहराने वाली तमन्ना ने हाल ही में बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर, पारंपरिक संस्कारों और लोकपर्वों को लेकर दिल खोलकर बातें की हैं। तमन्ना ने विशेष रूप से बिहार के सबसे बड़े लोक आस्था के महापर्व 'छठ पूजा' (Chhath Puja) की महत्ता का जिक्र करते हुए बिहारी संस्कृति की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया जहां सिर्फ उगते हुए सूरज को सलाम करती है, वहीं बिहार की यह पावन धरती डूबते हुए सूरज को भी वही आदर और सम्मान देना सिखाती है। तमन्ना भाटिया के इस बयान ने सोशल मीडिया पर लाखों बिहारवासियों और देश-विदेश में बसे प्रवासियों का दिल जीत लिया है।

'पूरी दुनिया उगते को पूजती है, लेकिन बिहार डूबते सूर्य को भी अर्घ्य देता है'

एक हालिया इंटरव्यू और सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान तमन्ना भाटिया से जब भारतीय लोक परंपराओं और क्षेत्रीय संस्कृतियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही आदर और उत्साह के साथ बिहार का जिक्र किया। तमन्ना ने कहा कि भारत की विविधता में कई खूबसूरत रंग हैं, लेकिन बिहार का जो सांस्कृतिक दर्शन है, वह पूरी दुनिया के लिए एक गहरा सबक है।

तमन्ना ने कहा, "हमारी दुनिया का कड़वा सच यह है कि लोग केवल उगते हुए सूरज, यानी कामयाबी और चमक-दमक के पीछे भागते हैं और उसी को नमन करते हैं। लेकिन जब मैंने बिहार के महापर्व छठ पूजा के बारे में गहराई से जाना, तो मैं हैरान रह गई। छठ पूजा इस बात का सबसे बड़ा और सुंदर प्रमाण है कि प्रकृति के हर चक्र का आदर होना चाहिए। यहां डूबते हुए सूर्य को पहले अर्घ्य दिया जाता है और अगली सुबह उगते हुए सूर्य की वंदना होती है। यह परंपरा सिखाती है कि ढलती हुई शाम हो या उतार का वक्त, सम्मान और कृतज्ञता कभी कम नहीं होनी चाहिए।"

'छठ केवल एक पर्व नहीं, प्रकृति से जुड़ने का सबसे पवित्र जरिया है'

तमन्ना भाटिया ने छठ महापर्व की सादगी, शुद्धता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि चार दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में जिस तरह से मिट्टी के चूल्हे, बांस के सूप, दउरा, गंगा या नदियों के घाटों की सफाई और फलों-सब्जियों का उपयोग होता है, वह पर्यावरण संरक्षण का सबसे जीवंत उदाहरण है।

एक्ट्रेस ने कहा कि इस त्योहार में न तो कोई छोटा होता है और न कोई बड़ा; समाज के हर वर्ग के लोग एक ही घाट पर खड़े होकर पानी में सूर्य देव और छठी मइया की आराधना करते हैं। किसी भी आडंबर या दिखावे के बिना इतनी कठोर साधना और 36 घंटे का निर्जला व्रत रखना आस्था की सबसे बड़ी परीक्षा है। तमन्ना ने कहा कि यह त्योहार पारिवारिक एकजुटता और महिलाओं के त्याग को सर्वोच्च स्थान देता है, जिसे देखकर कोई भी भावविभोर हो सकता है।

बिहारी खानपान और सादगी पर भी जताया अगाध प्रेम

सिर्फ छठ पूजा ही नहीं, तमन्ना भाटिया ने बातचीत के दौरान बिहार के पारंपरिक खानपान और वहां के लोगों के सरल स्वभाव की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें प्रामाणिक लिट्टी-चोखा, ठेकुआ और सत्तू से बनी पारंपरिक चीजें चखने का मौका मिलता है, तो उन्हें उसका स्वाद बेहद लाजवाब लगता है।

तमन्ना ने कहा कि बिहार की धरती ने भारत को भगवान बुद्ध का ज्ञान, भगवान महावीर का अहिंसा का संदेश और चाणक्य जैसी महान विभूतियां दी हैं। आधुनिक दौर में भी बिहारी समाज ने अपनी जड़ों और भाषा को नहीं छोड़ा है, जो सबसे प्रशंसनीय बात है। उन्होंने कहा कि बाहर से लोग जो भी धारणाएं बनाते हों, लेकिन हकीकत यह है कि बिहार का आतिथ्य और वहां के लोगों का अपनत्व अद्वितीय है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तमन्ना का बयान, फैंस ने लुटाया प्यार

तमन्ना भाटिया का यह वीडियो और बयान सामने आते ही इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैल गया। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोशल मीडिया यूजर्स ने तमन्ना के इस संवेदनशील और सम्मानजनक नजरिए की मुक्तकंठ से सराहना की। लोगों ने कमेंट्स में लिखा कि एक गैर-बिहारी कलाकार द्वारा छठ महापर्व के आध्यात्मिक और दार्शनिक मर्म को इतनी खूबसूरती से समझना वाकई गर्व की बात है। फैंस ने तमन्ना को 'छठी मइया का आशीर्वाद' मिलने की शुभकामनाएं दीं और उन्हें छठ के अवसर पर व्यक्तिगत रूप से बिहार के पावन घाटों पर आने का न्योता भी दिया।

भारतीय लोकसंस्कृति को लगातार मिल रहा राष्ट्रीय सम्मान

हाल के वर्षों में छठ महापर्व का दायरा केवल बिहार या यूपी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि मुंबई, दिल्ली, लंदन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक वैश्विक स्तर पर फैल चुका है। जब मुख्यधारा के शीर्ष फिल्मी सितारे अपनी सांस्कृतिक जड़ों और इस तरह के अनूठे पर्वों के दर्शन की खुलकर सराहना करते हैं, तो नई पीढ़ी में भी अपनी परंपराओं के प्रति गर्व का भाव मजबूत होता है। तमन्ना भाटिया के इस बयान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार की सांस्कृतिक गहराई सरहदों और भाषाओं से परे जाकर हर किसी को अपना मुरीद बना लेती है।