'द ट्रेटर्स 2' के मंच पर छलका रिया चक्रवर्ती का गहरा दर्द, सुशांत की मौत के बाद के खौफनाक दौर को याद कर बोलीं- 'कई सालों तक खुद पर और दुनिया पर शक के साये में जीती रही'
मनोरंजन जगत में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो सिर्फ किसी एक व्यक्ति की जिंदगी को ही नहीं बदलतीं, बल्कि पूरे समाज, कानून और मीडिया विमर्श को हिलाकर रख देती हैं। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के असामयिक और दुखद निधन के बाद जो तूफान खड़ा हुआ था, उसने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की जिंदगी को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था। सालों तक कानूनी लड़ाइयों, जेल की सलाखों, अनगिनत जांच एजेंसियों के सवालों और देशव्यापी मीडिया ट्रायल का सामना करने के बाद रिया चक्रवर्ती ने एक बार फिर कैमरे के सामने अपनी आत्मा को खोलकर रख दिया है। चर्चित साइकोलॉजिकल रियलिटी शो 'द ट्रेटर्स' के नए सीजन के दौरान रिया चक्रवर्ती ने उस खौफनाक दौर का दर्द बयां करते हुए एक ऐसा खुलासा किया है जिसने दर्शकों और उनके साथी प्रतियोगियों की आंखें नम कर दी हैं। रिया ने स्वीकार किया कि सुशांत के जाने के बाद वे कई वर्षों तक एक ऐसे मानसिक अंधकार में रहीं जहां उन्हें हर इंसान, हर परिस्थिति और यहां तक कि खुद अपने अस्तित्व पर भी गहरा शक होने लगा था।
'कई साल तक शक और डर के साये में जीती रही': रिया का छलका दर्द
'द ट्रेटर्स' के खेल के दौरान जब विश्वास, धोखे और इंसानी फितरत पर चर्चा हो रही थी, तब रिया चक्रवर्ती अपने अतीत की उन कड़वी यादों को याद करने से खुद को रोक नहीं पाईं। रिया ने बताया कि जब आपके ऊपर अचानक पूरी दुनिया टूट पड़े और हर तरफ से केवल नफरत और आरोप बरस रहे हों, तो इंसान का सबसे पहला नुकसान विश्वास का होता है।
रिया ने बेहद भावुक होते हुए कहा, "सुशांत के जाने के बाद जो कुछ घटा, उसने मुझसे मेरा आत्मसम्मान, मेरी शांति और दूसरों पर भरोसा करने की ताकत सब छीन ली थी। मैं कई सालों तक भयानक शक (Paranoia) के साये में जीती रही। मुझे लगता था कि मेरे आसपास का हर व्यक्ति मुझे एक मुजरिम की नजर से देख रहा है। कोई अगर मुझसे प्यार से बात भी करता था, तो मेरे दिमाग में यह संशय पैदा हो जाता था कि कहीं इसके पीछे कोई छिपा हुआ मकसद तो नहीं है। मुझे अपने ही विचारों, अपनी ही यादों और अपने फैसलों पर शक होने लगा था। यह एक ऐसी मानसिक जेल थी जिससे बाहर निकलना किसी भी वास्तविक जेल की कोठरी से हजार गुना ज्यादा मुश्किल था।"
2020 का वो भयानक बवंडर, मीडिया ट्रायल और जेल की सलाखें
साल 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद जो घटनाक्रम हुआ, वह भारतीय टेलीविजन और सोशल मीडिया इतिहास का सबसे विवादास्पद दौर माना जाता है। 24 घंटे चलने वाले न्यूज चैनलों पर रिया चक्रवर्ती को मुख्य आरोपी के रूप में पेश किया गया। विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों की लंबी पूछताछ के बाद रिया को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के एक मामले में मुंबई की भायखला जेल में करीब एक महीना बिताना पड़ा था।
रिया ने बताया कि उस दौर में उनके पूरे परिवार को जिस सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उनके घर के बाहर कैमरों का घेरा, उनके परिजनों पर की गई तीखी टिप्पणियां और सोशल मीडिया पर चलाए गए नफरत भरे अभियानों ने उन्हें अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया था। रिया के अनुसार, जेल के उस तन्हा कमरे में बिताया गया हर एक सेकंड उन्हें यह सोचने पर मजबूर करता था कि क्या कभी वे दोबारा एक सामान्य इंसान की तरह सिर उठाकर जी पाएंगी।
मानसिक स्वास्थ्य की लड़ाई: थेरेपी, परिवार का संबल और खुद को समेटने का सफर
गहरे सदमे और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से बाहर आना किसी चमत्कार से कम नहीं था। रिया ने खुलासा किया कि इस भयानक मानसिक दौर से उबरने के लिए उन्होंने लगातार मनोचिकित्सकों की मदद ली, थेरेपी सेशंस का सहारा लिया और ध्यान व योग के जरिए अपनी बिखरी हुई मानसिक स्थिति को धीरे-धीरे समेटना शुरू किया।
इस पूरे संघर्ष में उनके परिवार, विशेष रूप से उनके माता-पिता और भाई शोविक चक्रवर्ती, जो खुद भी जेल जा चुके थे, एक अभेद्य दीवार की तरह उनके साथ खड़े रहे। रिया ने कहा कि जब पूरी दुनिया ने उनके लिए अपने दरवाजे बंद कर लिए थे, तब उनके परिवार के अटूट प्रेम और चंद सच्चे दोस्तों के विश्वास ने ही उन्हें जिंदा रखा। उन्होंने समझा कि जब तक आप खुद को माफ नहीं करेंगे और अतीत के बोझ को पीछे नहीं छोड़ेंगे, तब तक कोई भी बाहरी दवा या सहानुभूति आपको ठीक नहीं कर सकती।
'द ट्रेटर्स' के मंच पर वापसी: डर को हराकर आगे बढ़ने का नया संकल्प
रिया चक्रवर्ती का रियलिटी शो 'द ट्रेटर्स' में शामिल होना उनके करियर और जीवन का एक बड़ा प्रतीकात्मक कदम है। यह शो दिमाग के दांव-पेच, झूठ को पकड़ने और अविश्वास के माहौल में टिके रहने की कला पर आधारित है। ऐसे मंच पर आकर अपने व्यक्तिगत डर का सामना करना यह साबित करता है कि रिया अब अपने अतीत के साये से बाहर निकलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
रिया ने कहा कि इस शो का हिस्सा बनना उनके लिए किसी थेरेपी से कम नहीं रहा। सालों तक जिस 'शक' और 'अविश्वास' ने उन्हें पंगु बना दिया था, आज वे उसी खेल के मैदान में खड़े होकर अपनी मानसिक दृढ़ता का परीक्षण कर रही हैं। रिया का मानना है कि आप जीवन में मिलने वाले जख्मों को मिटा तो नहीं सकते, लेकिन उन जख्मों को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल सकते हैं। उनका यह बेखौफ अंदाज दर्शकों के बीच काफी सराहा जा रहा है।
समाज और डिजिटल दुनिया के लिए आईना: ट्रायल बाय मीडिया का खतरनाक चेहरा
रिया चक्रवर्ती का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत दर्द की दास्तान नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज, मीडिया और डिजिटल दुनिया के लिए एक गहरा आत्म-मंथन का विषय है। सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी व्यक्ति को बिना किसी अदालती फैसले के 'दोषी' ठहरा देना और उसके खिलाफ सार्वजनिक नफरत की मुहिम चलाना कितना जानलेवा साबित हो सकता है, रिया का यह अनुभव इसकी सबसे दर्दनाक मिसाल है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कानून के जानकारों का भी मानना है कि किसी भी त्रासदी के बाद निष्पक्ष जांच और मानवीय गरिमा का संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। रिया की इस आपबीती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शब्द और नफरत भरे नैरेटिव किसी इंसान की रूह को किस हद तक लहूलुहान कर सकते हैं।
अंधेरे से उजाले की ओर: नई शुरुआत और जिंदगी को दूसरा मौका
आज रिया चक्रवर्ती अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रही हैं। चाहे पॉडकास्ट की दुनिया में अपनी आवाज उठाना हो, अभिनय के नए प्रोजेक्ट्स तलाशना हो या फिर सामाजिक मंचों पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना हो, रिया ने यह दिखा दिया है कि वे हार मानने वालों में से नहीं हैं।
'द ट्रेटर्स 2' के मंच से निकली उनकी यह आवाज उन तमाम लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो किसी न किसी रूप में अन्याय, मानसिक आघात या अवसाद के दलदल में फंसे हुए हैं। रिया का यह कहना कि 'शक और डर के दौर से निकलकर अब मैं खुद पर विश्वास करना सीख चुकी हूं', इस बात का प्रमाण है कि इंसान की इच्छाशक्ति सबसे घने अंधेरे को भी चीरकर बाहर निकलने की ताकत रखती है। उनका यह सफर जीवन के उस सबसे बड़े सच को रेखांकित करता है कि जब सब कुछ खत्म होता दिखता है, वहीं से एक नई और मजबूत शुरुआत का जन्म होता है।