180 फ्लॉप और 45 डिजास्टर देने के बाद भी नहीं डिगा स्टारडम: मिथुन चक्रवर्ती के नाम दर्ज है वो ऐतिहासिक रिकॉर्ड
सिनेमा जगत का एक अटल नियम माना जाता है कि कोई अभिनेता पर्दे पर कितने लंबे समय तक टिकेगा, यह पूरी तरह से उसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और हिट फिल्मों की संख्या पर निर्भर करता है। यदि कोई मुख्य अभिनेता लगातार तीन या चार फ्लॉप फिल्में दे दे, तो फिल्म निर्माता और डिस्ट्रीब्यूटर उससे किनारा करने लगते हैं। लेकिन भारतीय सिनेमा के पांच दशक लंबे इतिहास में एक ऐसा अभिनेता भी मौजूद है, जिसने बॉक्स ऑफिस के इस सारे गणित और स्थापित धारणाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। हम बात कर रहे हैं तीन बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता, पद्म भूषण और दादा साहेब फाल्के सम्मान से नवाजे जा चुके अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की।
फिल्म इंडस्ट्री में करीब 50 साल बिता चुके मिथुन चक्रवर्ती के खाते में एक ऐसा आंकड़ा दर्ज है जो किसी भी अन्य लीड एक्टर के लिए हैरान करने वाला है। अपने करियर में 270 से 350 से अधिक फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाने वाले मिथुन दा ने लगभग 180 फ्लॉप फिल्में दी हैं। इनमें से कम से कम 45 फिल्में ऐसी थीं जिन्हें ट्रेड एनालिस्ट्स द्वारा बॉक्स ऑफिस पर 'डिजास्टर' (बेहद बुरी तरह असफल) करार दिया गया। धर्मेंद्र और जितेंद्र जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी अपने करियर में जितनी फ्लॉप फिल्में दी हैं, मिथुन का फ्लॉप फिल्मों का आंकड़ा उससे भी दोगुना है। इसके बावजूद मिथुन चक्रवर्ती को कभी असफल अभिनेता नहीं माना गया, बल्कि वे भारतीय जनमानस में 'महागुरु' और 'जनता के सुपरस्टार' बनकर उभरे, जिनकी आज भी करीब 400 करोड़ रुपये से अधिक की कुल संपत्ति और आलीशान होटल व्यवसाय है।
पहली ही फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड: 'मृगया' से हुई थी सिनेमाई सफर की ऐतिहासिक शुरुआत
कोलकाता के एक साधारण परिवार से निकलकर और नक्सल आंदोलन के दौर के संघर्षों से गुजरते हुए मिथुन चक्रवर्ती ने पुणे स्थित भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (FTII) में अभिनय के गुर सीखे। साल 1976 में महान फिल्मकार मृणाल सेन की कालजयी कला फिल्म 'मृगया' (Mrigayaa) से उन्होंने बड़े पर्दे पर कदम रखा। इस फिल्म में एक सीधे-सादे संथाली आदिवासी शिकारी 'घिनुआ' के किरदार में मिथुन ने इतना स्वाभाविक और रोंगटे खड़े कर देने वाला अभिनय किया कि देश-विदेश के समीक्षक दंग रह गए।
अपनी इस पहली ही फिल्म के लिए मिथुन चक्रवर्ती को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के 'राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' (National Film Award) से सम्मानित किया गया। हिंदी सिनेमा में अपनी डेब्यू फिल्म के लिए ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना एक ऐसा असाधारण कीर्तिमान है, जिसे सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार या शाहरुख खान जैसे सितारे भी अपने नाम नहीं कर सके। अपनी कला फिल्मों से शुरुआत करने के बाद मिथुन ने साबित कर दिया था कि अभिनय की बारीकियों में उनका कोई सानी नहीं है।
जब 'डिस्को डांसर' ने तोड़ा 'शोले' का रिकॉर्ड: दुनिया भर में 100 करोड़ कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म
80 के दशक की शुरुआत में मिथुन चक्रवर्ती ने कमर्शियल मेनस्ट्रीम सिनेमा में कदम जमाए और 1982 में रिलीज हुई निर्देशक बी. सुभाष की संगीतमय ड्रामा फिल्म 'डिस्को डांसर'। इस फिल्म ने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया। बप्पी लाहिड़ी के संगीत और मिथुन के अनोखे डांस स्टेप्स ने उन्हें रातों-रात भारत का पहला डांसिंग सेंसेशन बना दिया।
साल 1985 में जब 'डिस्को डांसर' तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) में रिलीज हुई, तो वहां के सिनेमाघरों में अभूतपूर्व भीड़ उमड़ पड़ी। रूस में फिल्म के टिकटों के लिए हफ्तों लंबी कतारें लगीं और फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रच दिया। 'डिस्को डांसर' दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन पार करने वाली भारत की पहली आधिकारिक फिल्म बनी।
इस ऐतिहासिक आंकड़े के साथ ही मिथुन की 'डिस्को डांसर' ने रमेश सिप्पी और अमिताभ बच्चन की आइकॉनिक फिल्म 'शोले' (1975) से भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का ताज छीन लिया। यह रिकॉर्ड पूरे 9 वर्षों तक मिथुन के नाम ही दर्ज रहा, जिसे बाद में साल 1994 में सलमान खान की फिल्म 'हम आपके हैं कौन' ने तोड़ा था। अमिताभ बच्चन अपने स्वर्णिम दौर में भी 100 करोड़ क्लब का यह पहला ऐतिहासिक मुकाम हासिल नहीं कर सके थे, जो रिकॉर्ड मिथुन चक्रवर्ती के नाम दर्ज हुआ।
90 के दशक में ऊटी की फिल्म फैक्ट्री: 6 साल में 33 लगातार फ्लॉप का अनूठा दौर
80 के दशक के मध्य के बाद मिथुन चक्रवर्ती ने अपने करियर में क्वालिटी के बजाय क्वांटिटी (मात्रा) को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया। 90 का दशक आते-आते जब बॉलीवुड में शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान जैसे युवा सितारों का उभार हो रहा था, तब मिथुन ने मुंबई की चकाचौंध से दूर दक्षिण भारत के ऊटी शहर को अपना ठिकाना बनाया। वहां उन्होंने 'द मोनार्क' लग्जरी होटल खोला और वहीं से एक समानांतर फिल्म इंडस्ट्री की नींव रख दी।
उस दौर में मिथुन चक्रवर्ती 20 से 30 दिनों के भीतर कम बजट वाली बी-ग्रेड एक्शन फिल्मों की शूटिंग पूरी कर लेते थे। निर्देशक, निर्माता और पूरी यूनिट उनके होटल में ठहरती थी, जिससे शूटिंग का खर्च बेहद कम हो जाता था। 90 के दशक में उन्होंने लगभग 100 फिल्मों में काम किया, जिनमें से अधिकांश फिल्में बॉक्स ऑफिस पर टिक नहीं पाईं। साल 1993 से 1998 के बीच मिथुन ने लगातार 33 फ्लॉप फिल्में देने का एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो किसी अन्य मुख्य अभिनेता के लिए करियर खत्म करने जैसा था। बतौर सोलो हीरो उनकी आखिरी बड़ी कमर्शियल हिट 1995 में आई फिल्म 'रावण राज' मानी जाती है।
हैरानी की बात यह थी कि लगातार फ्लॉप होने के बावजूद डिस्ट्रीब्यूटर्स को कभी भारी नुकसान नहीं होता था, क्योंकि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सिंगल स्क्रीन थिएटर्स और छोटे कस्बों में मिथुन का नाम ही टिकट खिड़की पर न्यूनतम लागत वसूल कराने के लिए काफी था।
'अग्निपथ' में अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर: जब कृष्णन अय्यर बनकर लूटी महफिल
बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन और मिथुन चक्रवर्ती के आपसी रिश्ते हमेशा से बेहद सम्मानजनक रहे हैं। साल 1990 में मुकुल एस. आनंद के निर्देशन में बनी कालजयी फिल्म 'अग्निपथ' में दोनों दिग्गज एक साथ नजर आए। जहां अमिताभ बच्चन ने विजय दीनानाथ चौहान के गंभीर और एंग्री यंग मैन वाले किरदार से दर्शकों को सम्मोहित किया, वहीं मिथुन चक्रवर्ती ने तमिल नारियल-पानी वाले 'कृष्णन अय्यर एमए' के किरदार में अपनी कॉमिक टाइमिंग और निष्ठा से समां बांध दिया।
इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के भारी-भरकम स्टारडम के बावजूद मिथुन ने अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज कराई और उस साल का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का 'फिल्मफेयर अवॉर्ड' अपने नाम किया। दोनों की कार्यशैली में जमीन-आसमान का अंतर था—अमिताभ जहां बड़े बजट, ए-लिस्ट निर्देशकों और चुनिंदा स्क्रिप्ट्स के साथ आगे बढ़ते थे, वहीं मिथुन ने कभी किसी निर्माता को खाली हाथ नहीं लौटाया और आम मजदूरों, ऑटो चालकों व रिक्शा चालकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई।
72 की उम्र में 350 करोड़ का धमाका: 'द कश्मीर फाइल्स' से साबित किया दम
साल 2000 के बाद मिथुन चक्रवर्ती ने धीरे-धीरे कैरेक्टर रोल्स और सपोर्टिंग किरदारों की ओर रुख किया। उन्होंने 'गुरु', 'गोलमाल 3', 'ओह माय गॉड' और 'हाउसफुल 2' जैसी मल्टी-स्टारर सुपरहिट फिल्मों में अपनी अलग छाप छोड़ी। इसके अलावा टेलीविजन पर 'डांस इंडिया डांस' में उनके 'ग्रैंडमास्टर' के रूप में दिए गए तकियाकलाम 'क्या बात, क्या बात, क्या बात' ने उन्हें नई पीढ़ी के बच्चों के बीच भी लोकप्रिय बना दिया।
मिथुन के करियर का सबसे चौंकाने वाला अध्याय साल 2022 में लिखा गया, जब 72 वर्ष की उम्र में वे विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' में रिटायर्ड डिविजनल कमिश्नर ब्रह्म दत्त के संजीदा किरदार में नजर आए। महज 15 से 20 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर दुनिया भर में सनसनी मचा दी। दिलचस्प बात यह है कि 180 फ्लॉप फिल्में देने वाले मिथुन चक्रवर्ती के पूरे 50 साल के करियर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म उनके जीवन के 72वें साल में आई।
बॉक्स ऑफिस के गणित से परे एक अपराजेय लीजेंड
मिथुन चक्रवर्ती की यह यात्रा दर्शाती है कि भारतीय सिनेमा में सफलता की परिभाषा केवल हिट और फ्लॉप फिल्मों के प्रतिशत से तय नहीं होती। 180 फ्लॉप और 45 डिजास्टर फिल्मों के बावजूद मिथुन दा का नाम कभी धूमिल नहीं हुआ। पहली फिल्म में नेशनल अवॉर्ड से लेकर देश को पहली 100 करोड़ी ग्लोबल ब्लॉकबस्टर देने तक, उनका करियर यह साबित करता है कि जनता का सच्चा प्यार आंकड़ों से कहीं बड़ा होता है। वे एक ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने हार को कभी अपने अस्तित्व पर हावी नहीं होने दिया और भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा अनूठा अध्याय लिख दिया जिसकी बराबरी कर पाना किसी भी सुपरस्टार के लिए नामुमकिन है।