'मुगल-ए-आजम' के डायरेक्टर के हैरान करने वाले रिश्ते: खुद बने थे दिलीप कुमार के जीजा, तो बेटी ने रचाई दाऊद के राइट हैंड से शादी

'मुगल-ए-आजम' के डायरेक्टर के हैरान करने वाले रिश्ते: खुद बने थे दिलीप कुमार के जीजा, तो बेटी ने रचाई दाऊद के राइट हैंड से शादी

भारतीय सिनेमा के सौ से अधिक वर्षों के इतिहास में अगर किसी एक फिल्म को भव्यता, जुनून और कलात्मक पूर्णता का शिखर माना जाता है, तो वह निस्संदेह साल 1960 में रिलीज हुई निर्देशक के. आसिफ (करीमुद्दीन आसिफ) की कालजयी महागाथा 'मुगल-ए-आजम' है। शीशमहल का करिश्मा, नौशाद का अमर संगीत, शकील बदायूंनी के गीत और पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार व मधुबाला की अमर अदाकारी को जिस शख्स ने 16 साल की अथक तपस्या और अपना सब कुछ दांव पर लगाकर पर्दे पर उतारा, वे फिल्ममेकर के. आसिफ ही थे। सिनेमाई दुनिया में के. आसिफ को एक ऐसे जुनूनी फनकार के रूप में याद किया जाता है, जिनके लिए सिनेमा सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि खुदा की इबादत जैसा था।

हालांकि, सिनेमा के इस महान निर्देशक के व्यक्तिगत जीवन और पारिवारिक रिश्तों के पन्नों को जब पलटा जाता है, तो सामने एक ऐसी अजीबोगरीब और हैरतअंगेज दास्तान निकलकर आती है जो किसी काल्पनिक थ्रिलर से भी ज्यादा नाटकीय लगती है। के. आसिफ का व्यक्तिगत जीवन एक तरफ जहां भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और कुलीन घराने यानी 'ट्रेजेडी किंग' दिलीप कुमार के परिवार से जुड़ा और वे खुद दिलीप कुमार के जीजा (बहनोई) बने, वहीं दूसरी तरफ उनकी अगली पीढ़ी का तार मुंबई के खूंखार अंडरवर्ल्ड और भारत के सबसे बड़े दुश्मन दाऊद इब्राहिम के सिंडिकेट से जाकर जुड़ गया। के. आसिफ की सगी बेटी और अभिनेत्री हिना कौसर ने डी-कंपनी के सबसे कुख्यात ड्रग तस्कर व दाऊद के दाहिने हाथ माने जाने वाले इकबाल मिर्ची से शादी रचाई थी।

जब सेट पर हुआ प्यार और दिलीप कुमार के जीजा बने डायरेक्टर के. आसिफ

के. आसिफ के जीवन में प्रेम और वैवाहिक रिश्ते हमेशा से सुर्खियों का सबब रहे। वे बेहद भावुक और मनमौजी इंसान थे। 'मुगल-ए-आजम' के निर्माण के दौरान ही के. आसिफ का नाम उस दौर की बेहद खूबसूरत और मशहूर अदाकारा निगार सुल्ताना से जुड़ा, जिन्होंने फिल्म में शहजादे सलीम को पाने की हसरत रखने वाली दरबारी नर्तकी 'बहार' का आइकॉनिक किरदार निभाया था। के. आसिफ ने निगार सुल्ताना से निकाह किया, जिनसे उनकी संतानों में बेटी हिना कौसर का जन्म हुआ।

लेकिन इस कहानी का सबसे नाटकीय मोड़ तब आया जब के. आसिफ की नजरें अपने ही मुख्य अभिनेता यानी दिलीप कुमार (यूसुफ खान) की छोटी बहन अख्तर बेगम पर जाकर टिक गईं। के. आसिफ और अख्तर बेगम के बीच नजदीकियां बढ़ीं और दोनों ने एक-दूसरे से निकाह करने का फैसला कर लिया। जब यह बात दिलीप कुमार के परिवार को पता चली, तो उनके घर में भारी भूचाल आ गया। दिलीप कुमार इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे क्योंकि के. आसिफ पहले से शादीशुदा थे और उनका जीवन आर्थिक रूप से अत्यंत अनिश्चितताओं से भरा हुआ था।

पारिवारिक विरोध और दिलीप कुमार की भारी नाराजगी के बावजूद के. आसिफ और अख्तर बेगम ने अपने फैसले से पीछे हटने से इनकार कर दिया और दोनों ने निकाह कर लिया। इस निकाह के बाद के. आसिफ आधिकारिक तौर पर अपने ही फिल्म के 'शहजादा सलीम' यानी सुपरस्टार दिलीप कुमार के सगे जीजा (बहनोई) बन गए। कहा जाता है कि इस शादी के बाद दिलीप कुमार और के. आसिफ के बीच कई वर्षों तक भारी व्यक्तिगत कड़वाहट और अनबन रही, हालांकि दोनों ने पेशेवर मर्यादा को बनाए रखते हुए 'मुगल-ए-आजम' के बचे हुए काम को पूरा किया।

बेटी हिना कौसर का बॉलीवुड में सफर और अंडरवर्ल्ड की काली परछाई

के. आसिफ और अभिनेत्री निगार सुल्ताना की बेटी हिना कौसर ने अपने माता-पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए 1970 के दशक के अंतिम वर्षों में हिंदी सिनेमा में कदम रखा। खूबसूरत और तीखे नैन-नक्श वाली हिना कौसर ने उस दौर की कई फिल्मों में सहायक और चरित्र अभिनेत्रियों की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने 'निकाह', 'आवाम', 'अमीर आदमी गरीब आदमी' और कई बी-ग्रेड व मसाला फिल्मों में काम किया।

लेकिन 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में मायानगरी मुंबई की आबोहवा तेजी से बदलने लगी थी। यह वह स्याह दौर था जब मुंबई फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड की काली छाया पूरी तरह हावी हो चुकी थी। दुबई और कराची में बैठे गैंगस्टर्स फिल्मों को फाइनेंस कर रहे थे, निर्माताओं को धमकाकर मनचाही कास्टिंग करा रहे थे और बॉलीवुड के सितारों का अंडरवर्ल्ड की महफिलों में जाना आम बात बन चुकी थी। इसी दौर में बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों के नाम सीधे तौर पर माफिया डॉन और उनके गुर्गों से जुड़ने लगे। मंदाकिनी और दाऊद इब्राहिम के रिश्तों से लेकर अनीता अयूब और मोनिका बेदी तक, ग्लैमर और जुर्म की दुनिया एक-दूसरे में पूरी तरह घुल-मिल रही थी।

दाऊद के 'राइट हैंड' इकबाल मिर्ची से निकाह: लंदन तक गूंजा इस शादी का शोर

इसी दौर में अभिनेत्री हिना कौसर की मुलाकात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सबसे बड़े और अमीर सिंडिकेट पार्टनर इकबाल मेमन उर्फ 'इकबाल मिर्ची' से हुई। मिर्च के वैध मसाले के व्यापार से अपनी पहचान शुरू करने वाला इकबाल मिर्ची असल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हेरोइन, अफीम और मेथामफेटामाइन (ड्रग्स) की तस्करी का बेताज बादशाह बन चुका था। वह डी-कंपनी के वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग और रियल एस्टेट निवेश का मुख्य रणनीतिकार था।

मुंबई के रईस होटलों और विदेशी महफिलों में मुलाकातों के बाद हिना कौसर अंडरवर्ल्ड के इस बेताज बादशाह के प्यार में गिरफ्तार हो गईं। साल 1991 में जब मुंबई में अंडरवर्ल्ड के गैंगवार अपने चरम पर थे, तब हिना कौसर ने इकबाल मिर्ची के साथ निकाह कर लिया। हिना कौसर, इकबाल मिर्ची की दूसरी पत्नी बनीं (मिर्ची की पहली पत्नी का नाम हजरा मेमन था)। इस शादी के साथ ही 'मुगल-ए-आजम' जैसी अमर और पवित्र कलाकृति रचने वाले महान निर्देशक की बेटी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वॉन्टेड एक ड्रग माफिया की बेगम बन चुकी थी।

1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद जब भारत सरकार ने दाऊद इब्राहिम और उसके सिंडिकेट के खिलाफ चौतरफा शिकंजा कसा, तो इकबाल मिर्ची भारत छोड़कर फरार हो गया। वह पहले दुबई और फिर बाद में ब्रिटेन (लंदन) जाकर बस गया। हिना कौसर भी अपने पति के साथ लंदन शिफ्ट हो गईं, जहां वे लंदन के सबसे पॉश और महंगे इलाके मेफेयर के एक आलीशान विला में महारानी की तरह जिंदगी बसर करने लगीं।

मौत के बाद भी नहीं थमा विवाद: ईडी की छापेमारी और वर्ली की संपत्तियां

साल 2013 में 63 वर्ष की आयु में लंदन में दिल का दौरा पड़ने से इकबाल मिर्ची की मौत हो गई, लेकिन उसकी मौत के वर्षों बाद भी हिना कौसर और उसके परिवार का नाम भारत की अदालतों और जांच एजेंसियों की फाइलों में गूंजता रहा। साल 2019 और 2020 के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जब इकबाल मिर्ची की अवैध काली कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ देशव्यापी जांच शुरू की, तो मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित 'सी व्यू', 'मरियम' और 'रबिया मैंशन' जैसी सैकड़ों करोड़ रुपये की प्राइम संपत्तियों में हिना कौसर का नाम सह-मालिक और बेनामी लाभार्थी के रूप में सामने आया।

ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इन सभी संपत्तियों को कुर्क किया और हिना कौसर को जांच में शामिल होने के लिए कई बार समन जारी किए। भारत सरकार ने उन्हें भगोड़ा घोषित करने और उनकी संपत्तियों को अंतिम रूप से जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया भी चलाई।

कला के शिखर से अपराध के गर्त तक: एक परिवार के दो छोर

के. आसिफ के परिवार की यह समूची कहानी नियति के उस भयानक और त्रासद विरोधाभास को दर्शाती है जिसे कोई पटकथा लेखक भी शायद अपनी कल्पना में न लिख सके। एक तरफ करीमुद्दीन आसिफ जैसा महान स्वप्नद्रष्टा था, जिसने अपनी जेब का आखिरी सिक्का तक 'मुगल-ए-आजम' जैसी अमर कलाकृति को मुकम्मल करने में खर्च कर दिया और जिन्होंने दिलीप कुमार जैसे लीजेंड से अपनी बहन का हाथ मांगकर सिनेमाई रॉयल्टी से रिश्ता जोड़ा।

वहीं दूसरी तरफ, उसी निर्देशक के आंगन में पली-बढ़ी बेटी हिना कौसर ने उस जुर्म की दुनिया के सरगना का हाथ थाम लिया, जिसने भारत के खिलाफ नफरत और ड्रग्स का खूनी जाल बुना। एक ही खून, एक ही परिवार, लेकिन एक सिरा भारतीय सिनेमा के अमर गौरव से जुड़ा, तो दूसरा सिरा देश के सबसे बड़े संगठित अपराध की कालिख में जाकर लिपट गया। यही कारण है कि जब भी बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के रिश्तों का इतिहास खंगाला जाता है, तो के. आसिफ, दिलीप कुमार, हिना कौसर और इकबाल मिर्ची के इस उलझे हुए पारिवारिक ताने-बाने की दास्तान आज भी हर किसी को हैरान कर देती है।