9 एपिसोड वाली इस मिस्ट्री थ्रिलर ने हिलाया दिमाग, 8.2 है IMDb रेटिंग; एक ही हाथ की दो लकीरों में उलझा भविष्य, क्या आपने देखी 'समांतर'
डिजिटल स्ट्रीमिंग और ओटीटी की दुनिया में मर्डर मिस्ट्री और क्राइम थ्रिलर का दौर लगातार छाया हुआ है, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसी कहानी सामने आती है जो पारंपरिक अपराध से हटकर इंसान की किस्मत, भविष्य और समय के पहिए के खौफनाक सच से पर्दा उठाती है। अगर आप वीकेंड पर किसी ऐसी ही आउट-ऑफ-द-बॉक्स थ्रिलर की तलाश में हैं जो आपको शुरू से लेकर अंत तक कुर्सी की पेटी बांधे रखने पर मजबूर कर दे, तो ओटीटी पर मौजूद 'समांतर' (Samantar) आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए। मशहूर मराठी लेखक सुहास शिरवलकर के लोकप्रिय उपन्यास पर आधारित इस सीरीज को आईएमडीबी (IMDb) पर 8.2/10 की शानदार रेटिंग हासिल है। 9-9 एपिसोड वाले सीजन के फॉर्मेट में पेश की गई यह मिस्ट्री थ्रिलर हिंदी में भी उपलब्ध है और इसका हर मोड़ दर्शकों की धड़कनें तेज कर देता है।
दो इंसानों की एक जैसी लकीरें और जिंदगी का सबसे खौफनाक चक्रव्यूह
सीरीज की कहानी कुमार महाजन (स्वप्निल जोशी) नाम के एक आम युवा के इर्द-गिर्द घूमती है। कुमार की जिंदगी आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और लगातार मिल रही असफलताओं के दलदल में फंसी होती है। दिन-रात संघर्ष के बावजूद जब हालात नहीं बदलते, तो उसका एक दोस्त उसे एक जाने-माने भविष्यवक्ता यानी ज्योतिषी के पास ले जाता है। ज्योतिषी जैसे ही कुमार की हथेली देखता है, वह दंग रह जाता है और हाथ देखने से साफ मना कर देता है। काफी जिद करने पर ज्योतिषी एक ऐसा राज खोलता है जिसे सुनकर कुमार के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। ज्योतिषी बताता है कि इस हाथ की रेखाएं बिल्कुल अनोखी हैं और हूबहू ऐसी ही हस्तरेखा 33 साल पहले सुदर्शन चक्रपाणि नाम के शख्स की थी। इसका सीधा मतलब यह था कि कुमार की जिंदगी में जो कुछ भी होने वाला है, वह सुदर्शन चक्रपाणि के जीवन में पहले ही घट चुका है।
सुदर्शन चक्रपाणि की डायरियां और भविष्य जानने की बेचैनी
यह सच सामने आने के बाद कुमार महाजन की जिंदगी में भूचाल आ जाता है। उसे समझ आता है कि उसका भविष्य पहले से तय है और उसका अतीत किसी और की जिंदगी की नकल मात्र है। इसके बाद शुरू होती है सुदर्शन चक्रपाणि (नीतीश भारद्वाज) की तलाश। कुमार चक्रपाणि को ढूंढ़ने के लिए जमीन-आसमान एक कर देता है ताकि वह जान सके कि उसकी आने वाली जिंदगी में क्या लिखा है। जब उसे चक्रपाणि की लिखी पुरानी डायरियां मिलती हैं, तो उसके सामने भविष्य के पन्ने खुलने लगते हैं। कल क्या होने वाला है, कौन मरने वाला है और कब दौलत मिलने वाली है—सब कुछ उन डायरियों में दर्ज होता है। लेकिन भविष्य को पहले से जान लेने का यह कौतूहल धीरे-धीरे एक मानसिक यातना और खौफनाक सजा में तब्दील हो जाता है, जहां कुमार चाहकर भी अपनी नियति को बदल नहीं पाता।
पर्दे के दो 'श्रीकृष्ण' का आमना-सामना, एक्टिंग ने जीता दिल
'समांतर' की सबसे बड़ी यूएसपी और सिनेप्रेमियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण इसकी स्टारकास्ट है। भारतीय टेलीविजन के इतिहास में भगवान श्रीकृष्ण का किरदार निभाकर अमर हो चुके दो दिग्गज कलाकार इस सीरीज में एक-दूसरे के आमने-सामने नजर आते हैं। बी. आर. चोपड़ा की 'महाभारत' में भगवान कृष्ण बने नीतीश भारद्वाज ने रहस्यमयी सुदर्शन चक्रपाणि का किरदार निभाया है। वहीं, रामानंद सागर के धारावाहिक 'श्री कृष्णा' में बाल व युवा कृष्ण की भूमिका निभा चुके स्वप्निल जोशी ने बेबस और उलझे हुए कुमार महाजन का रोल अदा किया है। दोनों अभिनेताओं के बीच की केमिस्ट्री, संवाद अदायगी और मनोवैज्ञानिक द्वंद्व स्क्रीन पर जादू बिखेरता है। इसके अलावा तेजस्विनी पंडित और दूसरे सीजन में सई ताम्हणकर के सधे हुए अभिनय ने कहानी के थ्रिल को कई गुना बढ़ा दिया है।
क्यों आपको एक बार जरूर देखनी चाहिए 8.2 रेटिंग वाली यह सीरीज?
अक्सर थ्रिलर सीरीज में कातिल की तलाश या कत्ल के पीछे का मकसद दिखाया जाता है, लेकिन 'समांतर' उस दार्शनिक सवाल को छूती है जो हर इंसान के जेहन में कभी न कभी उठता है—क्या इंसान अपनी तकदीर खुद लिखता है या फिर सब कुछ पहले से तय है? सीरीज का बैकग्राउंड म्यूजिक, डार्क सिनेमैटोग्राफी और 9 कड़े एपिसोड्स की रफ्तार आपको लगातार बांधे रखती है। पहले सीजन का सस्पेंस जहां एक बड़े सवाल पर खत्म होता है, वहीं दूसरा सीजन उस रहस्य की परतों को और ज्यादा उलझा देता है। अगर आप लीक से हटकर एक ऐसी सस्पेंस थ्रिलर देखना चाहते हैं जिसका प्रभाव शो खत्म होने के बाद भी कई दिनों तक दिमाग में बना रहे, तो एमएक्स प्लेयर और अन्य स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी में मौजूद 'समांतर' को बिल्कुल मिस न करें।