जब आमने-सामने आ गए थे मनोज तिवारी और रवि किशन: 'सुपरस्टार क्लैश' के बीच फंसे निरहुआ

जब आमने-सामने आ गए थे मनोज तिवारी और रवि किशन: 'सुपरस्टार क्लैश' के बीच फंसे निरहुआ

भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में साल 2004 से 2012 का दौर स्वर्णिम और सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी माना जाता है। यह वह दौर था जब इंडस्ट्री पर दो बड़े सूरमाओं—'मृदुल' मनोज तिवारी और 'एक्शन स्टार' रवि किशन का एकछत्र राज हुआ करता था। पर्दे पर दोनों की फिल्में जब रिलीज होती थीं, तो सिनेमाघरों के बाहर फैंस के बीच वैसा ही जुनून दिखता था जैसा कभी बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना या साउथ में रजनीकांत और कमल हासन के दौर में देखा गया। बॉक्स ऑफिस पर दोनों का मुकाबला इतना कड़ा था कि उनके बीच की यह रंजिश सिर्फ परदे तक सीमित नहीं रही, बल्कि असल जिंदगी के अवॉर्ड शोज और सेट पर भी दोनों के बीच जबरदस्त ईगो-क्लैश (अहंकार का टकराव) देखने को मिलता था।

इसी टकराव के बीच भोजपुरी सिनेमा में एक नए सितारे की एंट्री हुई, जिनका नाम था—दिनेश लाल यादव 'निरहुआ'। हाल ही में एक इंटरव्यू और कॉमेडी चैट शो के दौरान निरहुआ ने एक ऐसा अनसुना और मजेदार किस्सा साझा किया, जब मनोज तिवारी और रवि किशन आमने-सामने खड़े हो गए थे और दोनों के अहंकार की इस लड़ाई में बीच-बचाव करते हुए निरहुआ को दोनों के समर्थकों की मार और गुस्सा झेलना पड़ा था।

जब मॉरीशस के अवॉर्ड शो में टकराए 'भोजपुरी के दो शेर'

यह वाकया एक अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी फिल्म अवॉर्ड समारोह का है, जो मॉरीशस में आयोजित किया गया था। उस समय मनोज तिवारी अपने संगीत और ब्लॉकबस्टर फिल्मों की वजह से जनता के दिलों पर राज कर रहे थे, तो वहीं रवि किशन अपनी स्टारडम, स्टाइल और अभिनय के दम पर भोजपुरी के सबसे महंगे और चर्चित अभिनेता थे। दोनों ही स्टार्स अपनी-अपनी गाड़ियों, सुरक्षाकर्मियों और प्रशंसकों के लाव-लश्कर के साथ पहुंचे थे।

होटल की लॉबी में जब दोनों का आमना-सामना हुआ, तो माहौल में सन्नाटा खिंच गया। कोई भी एक-दूसरे को पहले नमस्ते करने या झुकने को तैयार नहीं था। दोनों खेमों के बाउंसर और समर्थक एक-दूसरे को घूर रहे थे। तनाव इतना बढ़ गया कि मंच के पीछे दोनों के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

निरहुआ बने 'शांतिदूत' और दोनों तरफ से पड़ गए धक्के

उस समय दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' इंडस्ट्री में तेजी से उभर रहे थे और उनकी फिल्म 'निरहुआ रिक्शावाला' ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रखा था। खास बात यह थी कि निरहुआ दोनों ही दिग्गजों का बेहद सम्मान करते थे—वे मनोज तिवारी को अपना बड़ा भाई और गुरु मानते थे, तो वहीं रवि किशन के स्टारडम और सहजता के भी कायल थे।

जब दोनों के गुटों में टकराव बढ़ने लगा, तो निरहुआ बिना कुछ सोचे-समझे बीच में कूद पड़े ताकि बात मारपीट तक न पहुंचे। लेकिन शांतिदूत बनना निरहुआ को भारी पड़ गया। मनोज तिवारी के समर्थक समझे कि निरहुआ रवि किशन की तरफ से बात करने आए हैं, इसलिए उन्होंने निरहुआ को धक्का दिया और खरी-खोटी सुनाई। जब निरहुआ पलटकर रवि किशन के खेमे को शांत कराने पहुंचे, तो उनके लोगों को लगा कि निरहुआ मनोज तिवारी की तरफदारी कर रहे हैं, और वहां से भी उन्हें धक्के और मुक्के खाने पड़े।

निरहुआ ने हंसते हुए याद किया, "दोनों बड़े भैया अपनी अकड़ में सीना ताने खड़े रहे और उनके बीच में पिस गया मैं। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मार किससे बचानी है, क्योंकि दोनों तरफ मेरे अपने ही लोग थे। उस रात मैंने कसम खाई कि इन दोनों की लड़ाई में कभी बीच में नहीं पड़ूंगा।""

अगली सुबह का नजारा देख दंग रह गए थे निरहुआ

इस हंगामे के बाद निरहुआ को लगा कि अब शायद भोजपुरी सिनेमा दो फाड़ हो जाएगा और ये दोनों कभी एक साथ बात नहीं करेंगे। लेकिन अगली सुबह जब निरहुआ नाश्ते के लिए डाइनिंग हॉल में पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

मनोज तिवारी और रवि किशन एक ही टेबल पर अगल-बगल बैठकर चाय की चुस्कियां ले रहे थे, ठहाके लगा रहे थे और एक-दूसरे को बड़े प्यार से पकौड़े खिला रहे थे। जब निरहुआ अपने शरीर पर लगे धक्कों का दर्द लिए उनके पास पहुंचे, तो रवि किशन ने मुस्कुराते हुए कहा, "अरे दिनेश, आओ बैठो! कल रात बड़ा ड्रामा हो गया ना?" और मनोज तिवारी ने भी हंसकर बात टाल दी। निरहुआ ने कहा कि उस दिन उन्हें समझ आया कि बड़े सितारों की आपसी समझदारी कितनी गहरी होती है और असल नुकसान सिर्फ बीच में कूदने वालों का होता है।

प्रतिद्वंद्विता से संसद तक का अटूट दोस्ताना

वक्त के साथ-साथ इन दोनों दिग्गजों की प्रतिद्वंद्विता अब एक अटूट दोस्ती में बदल चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि कभी एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे मनोज तिवारी, रवि किशन और निरहुआ आज न केवल राजनीति के मैदान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मजबूत सांसद बनकर देश की संसद में एक साथ बैठते हैं, बल्कि एक-दूसरे के पारिवारिक सुख-दुख में हमेशा आगे खड़े नजर आते हैं।

आज जब भी किसी मंच या टॉक शो पर ये तीनों यार बैठते हैं, तो उस दौर की तनातनी और निरहुआ के पिटने का यह किस्सा छेड़े बिना बातचीत पूरी नहीं होती, जिसे सुनकर दर्शक आज भी लोटपोट हो जाते हैं।