यश ने ठुकरा दी ₹100 करोड़ की फीस: 'रामायण' के लिए सुपरस्टार ने लिया सबसे बड़ा रिस्क

यश ने ठुकरा दी ₹100 करोड़ की फीस: 'रामायण' के लिए सुपरस्टार ने लिया सबसे बड़ा रिस्क

भारतीय सिनेमा के इतिहास में नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित महाकाव्य 'रामायण' को लेकर दर्शकों और फिल्म उद्योग का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। रणबीर कपूर (भगवान राम), साई पल्लवी (माता सीता) और 'रॉकी भाई' फेम कन्नड़ सुपरस्टार यश (लंकेश रावण) की ड्रीम स्टारकास्ट से सजी यह फिल्म अब तक के सबसे भव्य बजट पर तैयार हो रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सबसे ज्यादा चर्चा सुपरस्टार यश के किरदार और उनके फैसलों को लेकर हो रही है। 'केजीएफ' फ्रेंचाइजी के जरिए पूरे देश में अपनी धमक जमाने वाले यश ने इस फिल्म के लिए एक ऐसा वित्तीय और पेशेवर कदम उठाया है जिसने पूरे बॉलीवुड और साउथ सिनेमा को चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यश ने 'रामायण' में रावण की भूमिका निभाने के लिए मिलने वाली ₹100 करोड़ रुपये से अधिक की एकमुश्त निश्चित फीस (अपफ्रंट फीस) को सीधे तौर पर ठुकरा दिया है और इसके बदले एक बहुत बड़ा रणनीतिक रिस्क लेने का फैसला किया है।

₹100 करोड़ का चेक छोड़कर क्यों चुना को-प्रोडक्शन और प्रॉफिट शेयरिंग?

फिल्म इंडस्ट्री में इस समय जब बड़े-बड़े सितारे अपनी निश्चित फीस बढ़ाने की होड़ में लगे हैं, तब यश ने एक अलग रास्ता चुना है। ट्रेड सूत्रों के अनुसार, निर्माताओं ने यश को उनकी स्टारडम और अखिल भारतीय अपील को देखते हुए 100 से 150 करोड़ रुपये के बीच की निश्चित फीस की पेशकश की थी। लेकिन यश ने इस मोटी रकम को हाथ लगाने से इनकार कर दिया। इसके बजाय, यश ने फिल्म में बतौर 'को-प्रोड्यूसर' (सह-निर्माता) शामिल होने का फैसला किया और निर्माता नमित मल्होत्रा की प्राइम फोकस स्टूडियोज के साथ साझेदारी की। यश ने अपने बैनर मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के तहत फिल्म में वित्तीय निवेश किया है और अब वे फिल्म के कुल मुनाफे में से हिस्सेदारी (प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल) लेंगे।

यह यश का सबसे बड़ा वित्तीय और करियर रिस्क क्यों है?

निश्चित फीस न लेकर मुनाफे में हिस्सेदारी लेना किसी भी अभिनेता के लिए एक दोधारी तलवार की तरह होता है:

  • बॉक्स ऑफिस का पूरा जोखिम: यदि फिल्म किसी कारणवश बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करती है, तो यश को उस अनुपात में बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है जो उन्हें ₹100 करोड़ की फीस लेने पर कभी नहीं होता।

  • लंबी समय सीमा और पूंजी का ब्लॉक होना: 'रामायण' जैसी महागाथा दो या तीन भागों में बन रही है, जिसके निर्माण और रिलीज में कई साल लगेंगे। ऐसे में अपनी पूंजी और समय को एक ही प्रोजेक्ट में बांधे रखना एक बहुत बड़ा दांव है।

  • सफलता मिलने पर ऐतिहासिक रिटर्न: यदि फिल्म भारतीय और वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर 2000 या 3000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक कारोबार करती है, तो बतौर प्रोड्यूसर यश की कमाई ₹100 करोड़ के मुकाबले कई गुना अधिक हो सकती है।

वीएफएक्स और ग्लोबल रीच में ले रहे हैं सीधी दिलचस्पी

यश केवल कागजों पर निर्माता बनकर नहीं बैठे हैं, बल्कि वे फिल्म के हर तकनीकी और रचनात्मक पहलू पर बारीकी से काम कर रहे हैं। ऑस्कर विजेता वीएफएक्स कंपनी डीएनईजी (DNEG) के ग्लोबल नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए यश यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि फिल्म के दृश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे 'अवतार' या 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' के स्तर के हों। यश का मानना है कि रामायण भारतीय संस्कृति की सबसे महान गाथा है, इसलिए इसे केवल भारत तक सीमित रखने के बजाय हॉलीवुड की फिल्मों की तरह पूरे विश्व के 40 से अधिक देशों में बड़े पैमाने पर रिलीज किया जाना चाहिए। रावण के किरदार के हाव-भाव, कॉस्ट्यूम, विशाल लंका के भव्य सेट्स और विजुअल इफेक्ट्स पर यश खुद नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

रणबीर कपूर और यश की महाभिड़ंत देखने के लिए दर्शक बेताब

सिनेमाघरों में पहली बार बॉलीवुड के सबसे बड़े रोमांटिक व ड्रामा स्टार रणबीर कपूर और साउथ के सबसे बड़े एक्शन आइकन यश का आमना-सामना होगा। भगवान राम की शांत, मर्यादित और शक्तिशाली आभा के सामने यश के रूप में एक बेहद अहंकारी, महाविद्वान और पराक्रमी रावण का टकराव बड़े पर्दे पर विजुअल ट्रीट साबित होने वाला है। यश का यह वित्तीय दांव और फिल्म के साथ निर्माता के रूप में गहराई से जुड़ना यह साबित करता है कि वे 'रामायण' को सिर्फ एक कमर्शियल फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने वाले एक ऐतिहासिक आंदोलन के रूप में देख रहे हैं।