परंदूर के बाद चेन्नई एयरपोर्ट के लिए 2 नए ठिकाने: विजय सरकार ने मनल्लोर और चेय्यूर पर क्यों लगाया दांव?
तमिलनाडु में चेन्नई के बहुप्रतीक्षित दूसरे ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को लेकर चल रही अनिश्चितता के बीच मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। कांचीपुरम जिले के परंदूर (Parandur) में प्रस्तावित मेगा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को किसानों के भारी विरोध और पर्यावरणीय चिंताओं के चलते आधिकारिक तौर पर रद्द करने के महज कुछ ही दिनों बाद, सरकार ने नए एयरपोर्ट के लिए दो वैकल्पिक ठिकानों को शॉर्टलिस्ट कर लिया है। राज्य सरकार द्वारा प्रारंभिक अध्ययन पूरा करने के बाद मनल्लोर (तिरुवल्लूर जिला) और चेय्यूर (चेंगलपट्टू जिला) का नाम भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को तकनीकी व व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) के लिए भेजा गया है।
कौन से हैं ये 2 नए ठिकाने और क्या है इनकी भौगोलिक स्थिति?
चेन्नई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र (CMA) और राज्य के तेजी से बढ़ते औद्योगिक व कार्गो ट्रैफिक को संभालने के लिए सरकार ने शहर के उत्तर और दक्षिण दोनों छोरों पर विकल्प तलाशे हैं:
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मनल्लोर (Manellore - तिरुवल्लूर जिला):
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दूरी: यह स्थल चेन्नई शहर से लगभग 50 से 60 किलोमीटर दूर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में गुम्मिडीपूंडी के पास स्थित है।
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कनेक्टिविटी: यह इलाका आंध्र प्रदेश सीमा से सटा हुआ है और राष्ट्रीय राजमार्ग व औद्योगिक गलियारे से सीधे जुड़ा है, जिससे उत्तरी चेन्नई और श्री सिटी (Sri City) के औद्योगिक क्लस्टर्स को सीधा लाभ मिल सकता है।
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चेय्यूर (Cheyyur - चेंगलपट्टू जिला):
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दूरी: यह क्षेत्र चेन्नई से दक्षिण दिशा में लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
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कनेक्टिविटी: यह ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) और जीएसटी रोड (GST Road) के नजदीक पड़ता है, जो पुडुचेरी और दक्षिणी तमिलनाडु के औद्योगिक बेल्ट को सुगम पहुंच प्रदान करता है।
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विजय सरकार ने परंदूर को छोड़कर इन साइटों को क्यों चुना?
विधानसभा में 24 अगस्त को परंदूर परियोजना को रद्द करने की घोषणा करते हुए सीएम विजय ने स्पष्ट किया था कि चेन्नई के विस्तार और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए दूसरा हवाई अड्डा जरूरी तो है, लेकिन यह किसानों की आजीविका और जलस्रोतों को उजाड़कर नहीं बनाया जा सकता।
सरकार द्वारा नए ठिकानों को चुनने के पीछे के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
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कृषि भूमि का न्यूनतम नुकसान: परंदूर परियोजना के लिए प्रस्तावित 5,846 एकड़ जमीन में से 2,681 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि और कई रिहायशी बस्तियां थीं। नई चुनी गई साइटों पर आबादी के बड़े पैमाने पर विस्थापन और उपजाऊ खेतों को बर्बाद करने से बचाने की प्राथमिकता रखी गई है।
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जलस्रोतों और पर्यावरण की रक्षा: परंदूर में लगभग 1,558 एकड़ सरकारी जमीन झीलों, तालाबों और प्राकृतिक जलप्रवाह नहरों (Water Bodies) से घिरी थी, जिससे चेन्नई में बाढ़ का खतरा बढ़ने की चेतावनी पर्यावरणविद् दे रहे थे। नए स्थलों में प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को कम से कम बाधित करने का खाका खींचा गया है।
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चुनावी वादा और राजनीतिक जवाबदेही: जनवरी 2025 में पार्टी गठन के बाद विजय ने परंदूर के प्रभावित किसानों के आंदोलन में शामिल होकर सत्ता में आने पर इस प्रोजेक्ट को शिफ्ट करने का वादा किया था। सरकार बनने के बाद उन्होंने अपने इसी कोर एजेंडे को लागू किया है।
विपक्ष के तीखे सवाल: क्या नए ठिकानों पर नहीं हैं तकनीकी अड़चनें?
सरकार के इस कदम पर राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने तीखा हमला बोला है। डीएमके (DMK) का आरोप है कि परंदूर में 48 फीसदी से अधिक भूमि अधिग्रहण और बुनियादी कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी थी, लेकिन सरकार ने राजनीतिक कारणों से प्रगतिशील परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिससे राज्य के विकास को कम से कम पांच साल का झटका लगेगा।
वहीं, भाजपा ने इन दोनों नए विकल्पों पर तकनीकी सवाल उठाए हैं:
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गुम्मिडीपूंडी (मनल्लोर) की अड़चन: यह स्थल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा) के अत्यधिक नजदीक पड़ता है, जिससे हवाई सुरक्षा और एयरस्पेस क्लीयरेंस की जटिलताएं आ सकती हैं।
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चेय्यूर की अड़चन: चेय्यूर के आसपास प्रसिद्ध वेदांतंगल पक्षी अभयारण्य (Vedanthangal Bird Sanctuary) और कलपक्कम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kalpakkam Nuclear Power Plant) स्थित हैं, जिसके चलते कड़े पर्यावरण और सुरक्षा मानकों से मंजूरी मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
AAI की टीम करेगी स्थलीय दौरा, तब तय होगा भविष्य
तमिलनाडु सरकार द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की एक विशेष तकनीकी टीम दोनों प्रस्तावित स्थलों का स्थलीय और वायुमंडलीय निरीक्षण करने चेन्नई पहुंचेगी।
रनवे ओरिएंटेशन, पवन की दिशा (Cross-winds), अप्रोच पाथ और मिट्टी की भार वहन क्षमता के आधार पर ही किसी एक साइट को अंतिम हरी झंडी मिलेगी। इस बीच, मौजूदा मीनांबक्कम स्थित चेन्नई एयरपोर्ट के टर्मिनल 5 के विकास की योजना पर भी काम तेज किया जा रहा है ताकि जब तक नया हवाई अड्डा बनकर तैयार न हो, तब तक शहर की हवाई क्षमता को 55 मिलियन यात्रियों तक बनाए रखा जा सके।