महाराष्ट्र में त्योहारों से पहले मिलावटखोरों पर तुकाराम मुंढे के FDA का सबसे बड़ा चाबुक: जारी की 11 खाद्य पदार्थों की 'हिट लिस्ट
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और ईद जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर शासन ने अब तक का सबसे कड़ा और आक्रामक कदम उठाया है। अपनी ईमानदार, सख्त और बेबाक कार्यशैली के लिए देश भर में विख्यात 2005 बैच के आईएएस अधिकारी और वर्तमान में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने राज्य में खाद्य मिलावट के संगठित सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए पूरी व्यवस्था को नए सिरे से पुनर्गठित कर दिया है। अक्सर त्योहारों के बिल्कुल मुहाने पर या किसी बड़ी अप्रिय घटना के बाद सक्रिय होने वाली सरकारी व्यवस्था को बदलते हुए मुंढे ने देश का पहला 'फेस्टिवल एनफोर्समेंट कैलेंडर' (Festival Enforcement Calendar) जारी किया है।
इस नए स्थायी आदेश के तहत एफडीए ने 11 सबसे संवेदनशील खाद्य श्रेणियों की बाकायदा एक आधिकारिक 'हिट लिस्ट' जारी कर दी है। अब जांच का यह सिलसिला त्योहार शुरू होने के बाद नहीं, बल्कि पर्व से ठीक 21 दिन पहले गोपनीय खुफिया सूचनाओं, छापेमारी और लैब टेस्टिंग के साथ धरातल पर उतरेगा। तुकाराम मुंढे ने दो-टूक शब्दों में संदेश दिया है कि आम नागरिकों और श्रद्धालुओं की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी कारोबारी को कतई बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सड़क किनारे की रेहड़ी हो, नामी मिठाई का शोरूम, क्विक-कॉमर्स का वेयरहाउस या फिर फाइव-स्टार होटल।
त्योहार से 21 दिन पहले से 30 दिन बाद तक: समझिए FDA का 4-चरणीय ऐक्शन प्लान
महाराष्ट्र एफडीए द्वारा तैयार किया गया यह नया कैलेंडर साल भर के सभी त्योहारों, मेलों, उर्स और धार्मिक आयोजनों को उनके आकार और भौगोलिक विस्तार के आधार पर तीन श्रेणियों (राज्यस्तरीय, क्षेत्रीय और स्थानीय) में बांटकर काम करेगा। गणेशोत्सव, दिवाली, ईद, नवरात्रि, क्रिसमस जैसे बड़े आयोजनों के लिए चार चरणों का एक व्यापक 'एनफोर्समेंट चक्र' तैयार किया गया है:
-
पहला चरण (त्योहार से 21 दिन पहले): एफडीए के विशेष दस्ते जोखिम वाले इलाकों की पहचान करेंगे, थोक सप्लायर्स पर खुफिया निगरानी रखेंगे, रैपिड टेस्टिंग किट और केमिकल रिएजेंट्स का स्टॉक तैयार करेंगे और राज्य की सभी प्रमुख प्रयोगशालाओं में 24 घंटे जांच की क्षमता सुनिश्चित करेंगे।
-
दूसरा चरण (त्योहार से 14 दिन पहले): अधिकारी विनिर्माण इकाइयों (Manufacturing Units), आटा व तेल मिलों, खवा मंडियों, कोल्ड स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स और थोक बाजारों का सघन निरीक्षण शुरू करेंगे। इस चरण में दूध और पनीर जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की आवाजाही को पकड़ने के लिए रात और तड़के सुबह के समय अंतरराज्यीय सीमाओं और राजमार्गों पर विशेष नाकेबंदी की जाएगी।
-
तीसरा चरण (त्योहार के दौरान): बाजार की प्रत्यक्ष निगरानी, ऑन-द-स्पॉट मोबाइल टेस्टिंग वैन की तैनाती और दुकानों से रैंडम सैंपलिंग कर तत्काल गुणवत्ता का परीक्षण किया जाएगा।
-
चौथा चरण (त्योहार के बाद 30 दिन तक): जब्त किए गए मिलावटी माल को नष्ट करने, लैब की रासायनिक रिपोर्ट आने के बाद अदालतों में त्वरित चार्जशीट दाखिल करने और दोषियों के लाइसेंस रद्द कर कानूनी सजा दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
एफडीए की 'हिट लिस्ट' में शामिल हैं ये 11 हाई-रिस्क खाद्य पदार्थ
त्योहारी सीजन में अत्यधिक मांग के चलते जिन खाद्य पदार्थों में सबसे ज्यादा रासायनिक या जहरीली मिलावट की आशंका रहती है, उन्हें एफडीए ने रेड-अलर्ट श्रेणी में रखा है:
-
दूध और डेयरी उत्पाद: मावा (खोया), पनीर, घी और मक्खन (विशेष रूप से सुबह के समय परिवहन की जांच)।
-
पारंपरिक मिठाइयां: अनधिकृत सिंथेटिक रंग और मिलावटी चांदी के वर्क की जांच।
-
खाद्य तेल (Edible Oils): बार-बार उबाले जाने वाले तेल और खुले तेल में मिलावट।
-
उपवास/व्रत के खाद्य पदार्थ: भगर, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और राजगिरा।
-
मांस और पोल्ट्री: कसाईखानों, फ्रोजन मीट वेंडर्स और कोल्ड चेन की स्वच्छता।
-
बेसन और दालें: खेसारी दाल या सस्ते स्टार्च की मिलावट की पहचान।
-
ताजे फल: कार्बाइड या अन्य जहरीले रसायनों से समय से पहले पकाए गए फल।
-
ड्राई फ्रूट्स: पुरानी और केमिकल से पॉलिश की गई गिरी और मेवे।
-
पेयजल और बर्फ: शीतल पेय, बर्फ के गोले और खुले जूस में दूषित पानी व गैर-खाद्य बर्फ की जांच।
-
बेकरी उत्पाद: केक, पेस्ट्री, क्रीम रोल और बिस्कुट में इस्तेमाल होने वाले ट्रांस-फैट व एसेंस।
-
ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स फूड: डार्क स्टोर्स और 10 मिनट में डिलीवरी करने वाले वेयरहाउस में रखे पैक्ड फूड व इंपोर्टेड प्रोडक्ट्स।
व्रत के खाने पर मायकोटॉक्सिन की जांच और तेल में 25% TPC का कड़ा पैमाना
इस अभियान में एफडीए केवल सतही तौर पर मिलावट नहीं देखेगा, बल्कि वैज्ञानिक मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। नवरात्रि और महाशिवरात्रि जैसे व्रतों में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाले कुट्टू के आटे, भगर और सिंघाड़े के आटे में नमी के कारण फंगस लग जाती है, जिससे जानलेवा 'मायकोटॉक्सिन' (Mycotoxin) पैदा होता है। इसके सेवन से व्रत रखने वाले श्रद्धालु फूड पॉइजनिंग का शिकार होकर अस्पतालों में भर्ती होते हैं। एफडीए टीमें थोक मिलों से ही इन अनाजों के सैंपल उठाकर लैब में फंगल टॉक्सिन की जांच करेंगी।
इसके अतिरिक्त, हलवाइयों, समोसे-कचौड़ी और नमकीन बनाने वाली दुकानों पर बार-बार एक ही तेल को गर्म करने पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। एफडीए के विशेष सेंसर फ्राइंग ऑयल में टोटल पोलर कंपाउंड्स (Total Polar Compounds - TPC) की माप करेंगे। यदि किसी कड़ाही या कंटेनर के तेल में TPC का स्तर 25 प्रतिशत से अधिक पाया गया, तो वह तेल मानव उपभोग के लिए कैंसरकारी और विषाक्त माना जाएगा और उसे मौके पर ही नष्ट कर दिया जाएगा।
मिठाई की दुकानों पर भी सख्त निगरानी रहेगी। काजू कतली और अन्य मिठाइयों पर लगने वाले चांदी के वर्क में यदि एल्युमिनियम या लेड की मिलावट पाई गई, तो दुकान सील होगी। साथ ही, खाने-पीने की चीजों को अखबार या प्रिंटेड पेपर में लपेटकर बेचने वालों पर तत्काल प्रभाव से भारी जुर्माना लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं, क्योंकि अखबारी स्याही में मौजूद सीसा (Lead) और सॉल्वैंट्स सीधे भोजन में मिलकर लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं।
महाप्रसाद, लंगर, इफ्तार और भंडारे के लिए नए कड़े नियम: 7 दिन पहले देनी होगी सूचना
सामूहिक धार्मिक आयोजनों में भोजन की सुरक्षा को लेकर भी तुकाराम मुंढे के एफडीए ने कड़े दिशानिर्देश तय किए हैं। अक्सर सार्वजनिक भंडारों और महाप्रसाद में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजन ग्रहण करते हैं, जहां थोड़ी सी लापरवाही सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डाल देती है। नए आदेश के अनुसार, किसी भी महाप्रसाद, इफ्तार, अन्नछत्र, लंगर या सार्वजनिक भंडारे के आयोजकों को कार्यक्रम से कम से कम 7 दिन पहले स्थानीय एफडीए कार्यालय में निर्धारित फॉर्म भरकर अग्रिम सूचना देनी होगी।
आयोजकों के लिए अनिवार्य किया गया है कि वे भोजन तैयार कराने के लिए केवल एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त कैटरर्स की ही सेवाएं लें। भोजन पकाने के लिए उपयोग किए जाने वाले सभी कच्चे माल—जैसे आटा, दाल, तेल, घी और मसाले—केवल वैध लाइसेंस धारक डीलरों से पक्के बिल के साथ खरीदे जाने चाहिए और इन सभी बिलों को आयोजकों को कम से कम एक वर्ष तक सुरक्षित रखना होगा। मुंढे ने स्पष्ट किया कि यह नियम किसी धार्मिक परंपरा में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं, बल्कि सामूहिक स्तर पर विषाक्त भोजन की किसी भी त्रासदी को रोकने के लिए लागू किया गया है।
मुंढे के आने के बाद सैंपलिंग में 340% का ऐतिहासिक उछाल
मई 2026 में तुकाराम मुंढे द्वारा एफडीए कमिश्नर का कार्यभार संभालने के बाद से ही महाराष्ट्र में मिलावट माफिया की कमर टूट चुकी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जून से अगस्त 2026 के महज तीन महीनों के भीतर एफडीए की टीमों ने राज्य भर से 37,604 खाद्य सैंपल एकत्र किए और 32,604 नमूनों की गहन रासायनिक जांच पूरी की। इनमें से 15,268 नमूने सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे और 15,160 सैंपल पूरी तरह सब-स्टैंडर्ड व मिलावटी पाए गए।
पिछले वर्ष 2025-26 की तुलना में इस वर्ष मासिक सैंपल कलेक्शन में 340 प्रतिशत और लैब टेस्टिंग में 435 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य की तीन औषधि प्रयोगशालाओं, तीन मुख्य खाद्य परीक्षण लैब्स और पुणे स्थित स्टेट पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी को इस महा-अभियान के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है।
नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे खरीदारी करते समय दुकान का एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और क्यूआर कोड अवश्य जांचें, पक्का बिल लें और किसी भी सामग्री में दुर्गंध, असामान्य रंग या बनावट दिखने पर एफडीए के टोल-फ्री नंबर पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। महाराष्ट्र का यह अभूतपूर्व फेस्टिवल कैलेंडर देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन चुका है, जहां त्योहारों का उल्लास अब आम जनता की सेहत की 100 फीसदी गारंटी के साथ मनेगा।